QR Fraud: भुगतान से पहले नाम नहीं देखा तो गया पैसा, तेजी से फैल रहा यह धोखा
दुकानों और रेस्तरां में अब एक नया और चौंकाने वाला धोखाधड़ी का तरीका तेजी से सामने आ रहा, जिसमें ठग क्यूआर कोड बदलकर लोगों की मेहनत की कमाई अपने खाते में पहुंचा रहे। यह तरीका इतना साधारण और चालाक है कि आम ग्राहक को इसका पता भी नहीं चलता।
दरअसल, जब आप किसी दुकान पर भुगतान करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करते, तो आपको लगता है कि पैसा सीधे दुकानदार के खाते में जा रहा। लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं होता। ठग असली क्यूआर कोड के ऊपर अपना नकली क्यूआर कोड चिपका देते। यह काम वे कुछ ही सेकंड में कर देते, खासकर तब जब दुकान पर भीड़ हो या कोई ध्यान नहीं दे रहा हो।
क्यूआर कोड के जरिए भी हो रहा फ्रॉड
यह नकली क्यूआर कोड दिखने में बिल्कुल असली जैसा होता है। ग्राहक बिना शक किए उसे स्कैन करता है, रकम डालता है और भुगतान कर देता। लेनदेन सफल भी दिखता है, लेकिन पैसा गलत खाते में चला जाता। इस पूरे प्रक्रिया में कोई चेतावनी या अलर्ट नहीं मिलता, जिससे धोखाधड़ी पकड़ में नहीं आती।
भुगतान करते समय खाताधारक का नाम जरूर पढ़ें
सबसे बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर लोग भुगतान करते समय प्राप्तकर्ता का नाम जांचना जरूरी नहीं समझते। यही छोटी सी लापरवाही ठगों के लिए मौका बन जाती। अगर नाम पर ध्यान दिया जाए, तो तुरंत पता चल सकता कि पैसा सही व्यक्ति को जा रहा है या नहीं।
जब ग्राहक भुगतान कर देता और दुकानदार को पैसा नहीं मिलता, तब असली परेशानी शुरू होती। ग्राहक को लगता है कि उसने भुगतान कर दिया जबकि दुकानदार के खाते में रकम नहीं पहुंचती। ऐसे में विवाद और भ्रम की स्थिति बन जाती। बाद में पैसा वापस पाना भी आसान नहीं होता, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि शिकायत कितनी जल्दी दर्ज की गई और ठग का खाता ट्रेस हो पाता है या नहीं।
इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए ज्यादा तकनीक नहीं, बल्कि सतर्कता की जरूरत है। ग्राहकों को भुगतान से पहले हमेशा नाम की पुष्टि करनी चाहिए। अगर नाम में थोड़ी भी गड़बड़ी लगे, तो तुरंत भुगतान रोक देना चाहिए।
दुकानदारों को भी क्यूआर कोड की जांच करनी चाहिए
वहीं दुकानदारों को भी समय-समय पर अपने क्यूआर कोड की जांच करनी चाहिए। अगर कोड पर कोई अतिरिक्त परत, टेढ़ापन या हाल ही में छेड़छाड़ के संकेत दिखें, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। डिजिटल डिस्प्ले वाले क्यूआर कोड या साउंड सिस्टम का उपयोग भी इस खतरे को कम कर सकता है, क्योंकि इनके साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल होता है।
आखिर में यह साफ है कि यह कोई जटिल साइबर हमला नहीं, बल्कि एक साधारण चाल है जो लोगों की आदतों और भरोसे का फायदा उठाती है। इसलिए सावधानी ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।
(प्रियंका कुमारी)
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