Lauki Dosa Recipe: गर्मियों में आलू नहीं, बनाएं हेल्दी लौकी वाला डोसा, नोट करें स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी
Lauki Dosa Recipe: घर में जब भी लौकी बनाई जाती है तो अक्सर लोग उसे देखकर मुंह बना देते हैं. मगर क्या आप जानते हैं इस सब्जी को खाने के कितने फायदे है? गर्मियों में लौकी या घीया से बेहतरीन सब्जी शायद ही कोई हो. इस सब्जी में 90 प्रतिशत पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखता है. गर्मियों में आलू वाला डोसा खाना थोड़ा हैवी महसूस करवा सकता है. डोसा को गर्मियों के हिसाब से और ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए आलू वाला नहीं बल्कि लौकी का डोसा बनाएं. इसे आप रोजाना भी खा सकते हैं.
चलिए पढ़ते हैं लौकी का डोसा बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी और जरूरी सामग्रियां.
लौकी का डोसा बनाने के लिए सामग्रियां
- लौकी, कद्दूकस की हुई
- सूजी या चावल का आटा
- दही
- हरी मिर्च, बारीक कटी हुई
- अदरक, कुटा हुआ
- नमक स्वादानुसार
- तेल, जरूरत के अनुसार
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लौकी डोसा बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
- लौकी का डोसा बनाने के लिए सबसे पहले लौकी को धोकर, छीलना है और कद्दूकस कर लेना है. इसमें से अतिरिक्त पानी को निकाल लें.
- इसके बाद आपको लौकी में सूजी या चावल का आटा मिलाना है. इसके बाद दही डालें और अच्छे से मिक्स करें.
- लौकी डोसा बनाने के लिए इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक और स्वादानुसार नमक मिलाएं. अच्छे से मिक्स करने के बाद बैटर को रेस्ट करने के लिए रख दें. ध्यान रखें बैटर बहुत ज्यादा पतला या गाढ़ा न हों. इसे एडजस्ट करने के लिए पानी मिला सकते हैं. हालांकि, लौकी का थोड़ा बचा पानी भी बैटर के लिए पर्याप्त होता है.
- डोसा बनाने के लिए आपको गैस पर तवा रखकर गर्म करना है. इसके बाद थोड़ा सा तेल लगाएं. अगर नॉन स्टिक पैन है तो तेल की जरूरत पड़ेगी. अब तवे पर गोलाकार में बैटर डालकर फैला लें. अब मध्यम आंच पर उसे पकाएं.
- लौकी का डोसा जब एक तरफ से गोल्डन हो जाए तो पलट कर दूसरी तरफ से भी पकाएं. दोनों तरफ सेकने के बाद इसे चटनी के साथ सर्व करें.
लौकी डोसा खाने के फायदे
- लौकी का डोसा बच्चों और बड़ों, दोनों को पसंद आएगा. यह लौकी की सब्जी से काफी स्वादिष्ट लगेगी.
- लौकी का डोसा हाइड्रेशन को बनाए रखेगा. इसमें भरपूर मात्रा में पानी होता है.
- लौकी का डोसा खाने से वजन नियंत्रित रहता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा फाइबर और कैलोरी कम होता है.
- लौकी का डोसा खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है.
- इसे नाश्तें में या रात में हल्के डिनर की तरह खा सकते हैं.
Disclaimer: इस खबर को सामान्य जानकारी के आधार पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से आर्थिक संघर्षों को सुलझाने में अफ्रीकी देशों की मदद करने को तैयार चीन
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका में भीषण तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मोजाम्बिक के राष्ट्रपति डेनियल चैपो की मेजबानी की। इस दौरान राष्ट्रपति शी ने कहा कि अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के बीच चल रहे भीषण तनाव की वजह से जो आर्थिक उथल-पुथल मची है, उससे निपटने में चीन अफ्रीकी देशों की मदद करने के लिए तैयार है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद किसी अफ्रीकी नेता का पहला दौरा है। मई में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। ऐसे में अमेरिकी मीडिया सीएनएन का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे से पहले शी जिनपिंग विदेशी नेताओं के साथ लगातार मीटिंग कर रहे हैं।
यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है, जब ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अफ्रीकी देश इस्वातिनी का अपना दौरा रद्द करना पड़ा, क्योंकि आसपास के कई देश चीन के दबाव में ओवरफ्लाइट क्लीयरेंस रद्द कर रहे थे।
अफ्रीकी देश फ्यूल, खाने और फर्टिलाइजर के इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से अफ्रीकी देश पर वैश्विक आर्थिक संकट का असर ज्यादा होने की उम्मीद है।
शी ने मंगलवार को चैपो के साथ मीटिंग में कहा, “ग्लोबल साउथ, जिसका रिप्रेजेंटेशन चीन और अफ्रीका करते हैं, उथल-पुथल वाली दुनिया में लगातार न्याय के लिए एक ताकत रहा है।”
शी ने अफ्रीकी देशों पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के असर को माना और वादा किया कि चीन इन चुनौतियों से निपटने, शांति को बढ़ावा देने और साथ मिलकर विकास करने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
बीजिंग ने फरवरी में घोषणा की थी कि वह व्यापार संबंधों को बढ़ाने के लिए 1 मई से 53 अफ्रीकी देशों से सभी इम्पोर्ट के लिए जीरो-टैरिफ स्कीम लागू करेगा।
चीन की इस स्कीम से एकमात्र अफ्रीकी देश इस्वातिनी बाहर रखा गया। इस्वातिनी एक लैंडलॉक्ड देश है और इसका ताइवान के साथ डिप्लोमैटिक संबंध है, लेकिन चीन के साथ नहीं है। दरअसल, चीन की पूरी नजर ताइवान पर है और वह लगातार इस बात को दोहराता रहा है कि आज नहीं तो कल इसे बीजिंग में शामिल होना होगा। हालांकि, ताइवान हमेशा से इस बात का विरोध करता रहा है।
लैंडलॉक्ड देश (भू-आबद्ध) ऐसे संप्रभु राष्ट्र को कहा जाता है, जो चारों तरफ से जमीन से घिरे होते हैं और जिनकी सीमा किसी खुले महासागर या समुद्र से नहीं लगती है। ताइवान ने मंगलवार को कहा कि लाई का विदेश दौरा कैंसिल कर दिया गया है क्योंकि सेशेल्स, मेडागास्कर और मॉरिशस ने लाई की फ्लाइट को अपने एयर स्पेस से गुजरने की मंजूरी वापस ले ली है।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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