वर्ल्ड अर्थ डे 2026 : 'हमारी शक्ति हमारा ग्रह', बढ़ते जलवायु संकट के बीच पृथ्वी दिवस अहम,
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल 22 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्रति हमारी जिम्मेदारी को याद दिलाने का अवसर है। तेजी से बदलते पर्यावरण और बढ़ते जलवायु संकट के बीच इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और प्रदूषित महासागरों के बीच विश्व पृथ्वी दिवस और भी खास हो जाता है।
पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है और इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस बार का विषय “हमारी शक्ति हमारा ग्रह” है, जो बताता है कि हमारे पास इस प्लैनेट को बचाने और बेहतर बनाने की ताकत है। पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी ने हमें कई खतरे की चेतावनी दी है। पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी ने कई गंभीर संकेत दिए हैं। कहीं रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखने को मिली, तो कहीं बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं ने लोगों को प्रभावित किया।
ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और महासागर प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, जैव विविधता में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यह सभी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि क्लाइमेट चेंज अब भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट बन चुका है।
इस साल की थीम “हमारी शक्ति हमारा ग्रह” हमें याद दिलाती है कि सरकारें, कंपनियां, समुदाय और आम व्यक्ति हर कोई मिलकर बदलाव ला सकता है। हालांकि, पृथ्वी दिवस केवल समस्याओं को उजागर करने का दिन नहीं है, बल्कि समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का अवसर भी है। इस साल की थीम इस बात पर जोर देती है कि हर व्यक्ति अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से बड़ा बदलाव ला सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे पहले अपनी जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। प्लास्टिक के उपयोग को कम करना, फिर से इस्तेमाल किए जाने वाली चीजों को अपनाना और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना ऐसे कदम हैं, जो पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा, पेड़ लगाना, जल स्रोतों की रक्षा करना और स्थानीय सफाई अभियानों में भाग लेना भी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, पर्यावरण के मुद्दों के बारे में खुद को अवगत कराने के साथ ही दूसरों को जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है। स्कूल, कॉलेज या सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक करना चाहिए। जलवायु अनुकूल नीतियों का समर्थन करना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे समाधानों को बढ़ावा देना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। पृथ्वी किसी एक देश, एक पीढ़ी या एक समुदाय की नहीं है।
जानकारी और जागरूकता भी इस दिशा में अहम भूमिका निभाती है। लोगों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के बारे में समझना चाहिए और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकों को अपनाने से भी प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
पृथ्वी दिवस यह भी याद दिलाता है कि यह ग्रह किसी एक देश या पीढ़ी का नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा धरोहर है। अमेजन के वर्षावनों से लेकर आर्कटिक के ग्लेशियरों और समुद्र तटों तक, हर क्षेत्र का संरक्षण जरूरी है। इंसानों के छोटे-छोटे फैसले भी पृथ्वी पर बड़ा असर डालते हैं।
इस मौके पर लोग कई तरह की गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। जैसे पौधे लगाना, अपने आसपास सफाई अभियान चलाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना या सोशल मीडिया के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाना। स्कूलों और संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
रिपोर्ट: 2025 की बाढ़ से पाकिस्तान में 33 लाख नौकरियां प्रभावित
इस्लामाबाद, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने अपनी ताजा आकलन रिपोर्ट में कहा है कि 2025 में आई बाढ़ के कारण पाकिस्तान में करीब 33 लाख (3.3 मिलियन) नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
आईएलओ के अनुसार, पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के 14 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रोजगार और आजीविका के नुकसान का आकलन किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि रोजगार पर सबसे ज्यादा असर पंजाब के बाढ़ प्रभावित जिलों में पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल रोजगार नुकसान का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण इलाकों में दर्ज किया गया, जहां कृषि क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। इसके बाद सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों पर असर पड़ा।
यह आकलन संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तकनीकी नेतृत्व में किया गया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र, एशियाई विकास बैंक, यूरोपीय संघ और विश्व बैंक का भी सहयोग रहा।
आईएलओ ने कहा कि प्रांतीय स्तर पर मुआवजा योजनाओं के जरिए तत्काल राहत और पुनर्वास की जरूरतों को कुछ हद तक पूरा किया गया है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में आजीविका बहाल करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ‘कैश-फॉर-वर्क’ कार्यक्रम, कौशल प्रशिक्षण और सब्सिडी वाले ऋण जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि प्रभावित परिवार छोटे स्तर पर कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकें।
इस आकलन पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के विदेश एवं मानव संसाधन विकास मंत्री सालिक हुसैन ने कहा कि बाढ़ से विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूरों, छोटे किसानों, स्वरोजगार करने वालों और ग्रामीण क्षेत्रों के कमजोर वर्गों को भारी नुकसान हुआ है।
वहीं पाकिस्तान में आईएलओ के कंट्री डायरेक्टर गीर टोंस्टोल ने कहा कि बाढ़ ने पहले से ही कमजोर समुदायों की आर्थिक स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने जोर दिया कि समय पर ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जो रोजगार, आय की बहाली और जलवायु जनित आपदाओं के प्रति दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करें।
आईएलओ ने 2022 की बाढ़ के बाद तैयार की गई ‘वर्क क्राइसिस रिस्पॉन्स स्ट्रेटजी’ को फिर से लागू करने की भी जरूरत बताई, ताकि भविष्य में आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी और समन्वित हो सके।
--आईएएनएस
डीएससी
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