चीन में प्राइमरी हेल्थ केयर डिलीवरी सिस्टम को मजबूत करने के लिए बन रही है योजना
बीजिंग, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन एक बड़ी जनसंख्या वाला देश है, इसके बावजूद चीन में आम लोगों को अच्छी और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं। हालांकि इसमें सुधार की गुंजाइश नजर आती है, खासतौर पर शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में अंतर दिखता है।
इसके मद्देनजर चीन एक ऐसा हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम बनाने में तेजी लाने की योजना बना रहा है, जिसका फोकस उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी आम और पुरानी बीमारियों को मैनेज करने के लिए प्राथमिक स्तर की मेडिकल क्षमता को मजबूत करने पर होगा।
इस कदम की जानकारी पिछले दिनों चीनी राज्य परिषद के जनरल कार्यालय द्वारा जारी एक दस्तावेज में दी गई, जिसका उद्देश्य घर के पास सुविधाजनक, उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल सेवाओं की नागरिकों की मांग को पूरा करना है।
बताया जा रहा है कि संबंधित योजना के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर मोहल्ले में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हो, ताकि प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवा कवरेज में मौजूद किसी तरह की कमी को खत्म किया जा सके। इससे पता चलता है कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन लगातार देश की स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर सुधारने पर ध्यान दे रहा है।
बता दें कि आम तौर पर चीन में तीन श्रेणी के अस्पताल मौजूद हैं। इस नई योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि सेकेंडरी स्तर के हॉस्पिटल, आम बीमारियों का इलाज करने की अपनी क्षमता को मजबूत करेंगे, साथ ही पुनर्वास, नर्सिंग, देखभाल और इंटीग्रेटेड मेडिकल के साथ-साथ बुज़ुर्गों की देखभाल जैसी सेवाओं का स्तर भी बढ़ाएंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के उप निदेशक चंग च के अनुसार वर्तमान में चीन में 1.1 मिलियन से ज्यादा स्वास्थ्य संस्थान हैं, और 90 फीसदी से अधिक लोग महज 15 मिनट के अंदर सबसे पास के मेडिकल सेवा प्रदाता के पास पहुंच सकते हैं।
बताया जाता है कि वर्ष 2025 तक पूरे चीन में प्राथमिक स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों की संख्या 5.56 अरब तक पहुंच गई, जो कि कुल विजिट का 52.6 प्रतिशत है। इससे पता चलता है कि चीन में बीमार लोग बड़ी आसानी से अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच सकते हैं।
इसके साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थान अब बुजुर्गों, बच्चों और पुरानी बीमारियों वाले मरीजों जैसे खास समूहों को हर साल 1 अरब से ज्यादा बार सर्विस प्रदान करते हैं। वहीं देश में पिछले कुछ वर्षों से इस दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं। सिर्फ साल 2025 में ही 3,70,000 से ज्यादा होम हॉस्पिटल बेड तैयार किए गए, जबकि पुरानी बीमारी वाले मरीजों के लिए 190 मिलियन लंबे समय के लिए प्रिस्क्रिप्शन भी जारी किए गए।
इस तरह लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार जारी है, क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार अपने नागरिकों को अच्छा स्वास्थ्य बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ लोग बखूबी उठा रहे हैं। जाहिर है कि सरकार के प्रयासों के चलते आम लोग अपने स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति जागरूक हो गए हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
आईएमएफ और बाहरी फंडिंग में देरी से बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर अनिश्चितता बढ़ी
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश को इस महीने की शुरुआत में हुए आईएमएफ-वर्ल्ड बैंक स्प्रिंग मीटिंग में अपने अटके हुए आईएमएफ प्रोग्राम पर कोई खास प्रगति नहीं मिली। साथ ही यह भी भरोसा नहीं मिला कि वर्ल्ड बैंक, एडीबी, एआईआईबी और जापान से मिलने वाला 3.2 अरब डॉलर का बजट सपोर्ट सरकार की तय समयसीमा में मिल पाएगा।
ढाका के बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के एक आर्टिकल के मुताबिक, ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव पहले से ही ग्लोबल ऊर्जा और माल ढुलाई के बाजारों को परेशान कर रहा है, यह अनिश्चितता और भी मुश्किल पैदा कर रही है।
फिर भी बांग्लादेश सरकार का रुख शांत बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि आईएमएफ प्रोग्राम खत्म नहीं हुआ है और आने वाले महीनों में बातचीत पूरी होते ही बाहरी फंडिंग मिल जाएगी।
इस समय बांग्लादेश की आर्थिक हालत थोड़ी तंग है। सरकार ने 9.3 ट्रिलियन टका का रिकॉर्ड बजट बनाया है, जो काफी बड़े रेवेन्यू टारगेट पर टिका है। इससे घाटा जीडीपी के मुकाबले कम दिखता है, लेकिन असल में दबाव बना हुआ है। मतलब साफ है, सुधारों को अभी टालने की कोशिश हो रही है, जबकि दुनिया की हालत और मुश्किल होती जा रही है।
मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आयात बिल और सब्सिडी का खर्च बढ़ रहा है। सऊदी अरब और कतर से यूरिया की सप्लाई में रुकावट से खाद महंगी हो रही है और खेती पर असर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र से आने-जाने वाले जहाजों पर युद्ध जोखिम का खर्च बढ़ने से माल ढुलाई भी महंगी हो रही है। इन सबका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा है, जो पहले से ही दबाव में है।
सबसे अहम बात यह है कि ये समस्याएं थोड़े समय की नहीं हैं। भले ही हालात जल्दी सामान्य हो जाएं, लेकिन कीमतों, सप्लाई चेन और जोखिम के असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं। यानी यह एक ऐसा झटका है जो धीरे-धीरे और ज्यादा असर दिखाएगा। और यह ऐसे समय में आ रहा है जब बांग्लादेश की नीतियों पर भरोसा कमजोर पड़ने लगा है।
असल समस्या यह है कि अब दबाव सिर्फ बाहर से नहीं आ रहा। एक तरफ वैश्विक हालात खराब हो रहे हैं, दूसरी तरफ देश के अंदर नीतियों में धीमापन है। दोनों तरफ से दबाव बढ़ रहा है और सरकार के पास विकल्प कम होते जा रहे हैं।
ऐसी स्थिति में आईएमएफ प्रोग्राम का अटका होना सिर्फ पैसों का मामला नहीं है। अगर आईएमएफ का प्रोग्राम चालू नहीं रहता, तो बांग्लादेश की विश्वसनीयता भी कम हो जाती है। इससे दूसरे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से कर्ज लेना और मुश्किल हो सकता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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