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अमेरिका में खसरे के मामले पिछले 35 सालों में सर्वाधिक स्तर पर, माता-पिता बच्चों को लगवाएं टीके : एनआईएच प्रमुख

वॉशिंगटन, 10 अगस्त (आईएएनएस)। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के डायरेक्टर डॉ. जे भट्टाचार्य ने रविवार को अमेरिकी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्टैंडर्ड टीके लगवाएं, जिनमें खसरे से बचाव का टीका भी शामिल है, क्योंकि अमेरिका में पिछले 35 सालों में खसरे के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

भट्टाचार्य, जो कुछ समय के लिए सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का नेतृत्व करने में भी मदद कर रहे हैं, ने कहा कि बच्चों को रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण ही है।

भट्टाचार्य ने सीबीएस न्यूज के प्रोग्राम फेस द नेशन में कहा, अपने बच्चों को खसरे से बचाने का सबसे अच्छा तरीका खसरे का टीका लगवाना है।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के लिए स्टैंडर्ड टीके लगवाने चाहिए, जिनमें खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) से बचाव वाले टीके शामिल हैं।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि माता-पिता के लिए - ज्यादातर बच्चों के मामले में, खासकर खसरे, डीटीपी और बचपन के सभी स्टैंडर्ड टीकों के लिए - यह बहुत जरूरी है कि वे अपने बच्चों को टीका लगवाएं।

भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने खुद अपने बच्चों को टीके लगवाए हैं। उन्होंने परिवारों से बच्चों को स्कूल भेजने का भी आग्रह किया और कहा कि संक्रमण के डर से उन्हें क्लासरूम से दूर नहीं रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, अगर आप अपने बच्चों को उन बीमारियों से बचाना चाहते हैं जिन्हें रोका जा सकता है, तो उन्हें टीका लगवाएं। किसी भी स्थिति में, बच्चों को स्कूल भेजना बेहतर है क्योंकि इसी तरह आप उन्हें स्वस्थ रख सकते हैं।

सीबीएस एंकर मार्गरेट ब्रेनन ने कहा कि खसरे के मामले पिछले 35 सालों में सबसे ज्यादा स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि केवल 10 राज्य ही 95 प्रतिशत टीकाकरण के उस स्तर तक पहुंचे हैं जिसे बीमारी के लगातार फैलने को रोकने के लिए जरूरी माना जाता है।

भट्टाचार्य ने कहा कि साउथ कैरोलिना, टेक्सास, एरिजोना और यूटा में बीमारी के फैलने की समस्या को सुलझा लिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया में मामले तेजी से कम हो रहे हैं, जबकि पेंसिल्वेनिया में कुछ खास समुदायों पर अभी भी ज्यादा खतरा बना हुआ है।

एनआईएच डायरेक्टर ने टीकाकरण की घटती दरों को आंशिक रूप से कोविड-19 महामारी के बाद पब्लिक हेल्थ अधिकारियों पर लोगों का भरोसा कम होने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता भरोसा फिर से कायम करना है।

भट्टाचार्य ने उन खबरों पर भी बात की जिनमें कहा गया था कि व्हाइट हाउस टीकों और ऑटिज्म पर एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी खास बातों के बारे में पता नहीं है और उन्हें लगता है कि ऑर्डर अभी पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने ब्रेनन से कहा, मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में क्या है और आपको भी नहीं पता। भट्टाचार्य ने कहा कि एनआईएच से मदद पाने वाले रिसर्चर ऑटिज्म के मामलों में बढ़ोतरी की कई संभावित वजहों की जांच कर रहे थे। ऑटिज्म डेटा साइंस इनिशिएटिव में शामिल एक दर्जन से ज्यादा टीमों के शुरुआती नतीजे कुछ हफ्तों में आने की उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, हमें नहीं पता - अगर आप एक साइंटिस्ट के तौर पर मुझसे पूछें कि क्या मुझे पता है कि ऑटिज्म के मामलों में यह बढ़ोतरी क्यों हुई है? तो मैं कहूंगा कि मुझे इस सवाल का जवाब नहीं पता।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की आशंका 65% तक है। नवंबर में मिडटर्म के लिए वोटिंग होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती... महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर​ फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ट्रम्प पर महाभियोग का खतरा बढ़ेगा अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में मजबूत होते हैं तो वे ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस के पास टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े कानूनों पर बड़ा अधिकार है। वह ट्रम्प के फैसलों पर कानून बनाकर रोक लगा सकती है और वीजा नीति को भी चुनौती दे सकती है। ईरान युद्ध में भी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई और युद्ध के लिए फंडिंग पर ट्रम्प पर दबाव बना सकती है। यानी कांग्रेस का बहुमत गया तो ट्रम्प की मनमानी पर लगाम लग सकती है।

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