Stock Market: 21 अप्रैल को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
Sensex-Nifty Closes Flat Green: लगातार दूसरे कारोबारी दिन आज सेंसेक्स-निफ्टी ग्रीन जोन में बंद हुआ है। हालांकि एक कारोबारी दिन पहले इनमें आधे फीसदी से अधिक की तेजी आई थी तो आज इनमें फ्लैट बढ़त ही रही। चेक करें कि आज सेक्टरवाइज क्या रुझान रहा, किसने मार्केट को संभालने की कोशिश की और सेंसेक्स के टॉप गेनर-लूजर कौन रहे
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल कीमतों पर असर
वॉशिंगटन, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। वैश्विक तेल कीमतों में सोमवार को तेज उछाल आया। ऐसा तब देखा गया जब अमेरिका ने एक ईरानी कार्गो जहाज को कब्जे में ले लिया। इससे तनाव बढ़ने का डर पैदा हो गया और अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदों पर भी असर पड़ा है।
सीएनएन के लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.3 प्रतिशत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई तेल सात प्रतिशत चढ़कर 88.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
यह तेजी वीकेंड पर ओमान की खाड़ी में हुए तनाव के बाद आई, जहां अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी झंडे वाले जहाज पर फायरिंग की और उसे कब्जे में ले लिया। बताया जा रहा है कि वह जहाज नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बढ़ते तनाव की वजह से सोमवार तक तेल की कीमतें करीब पांच प्रतिशत तक उछल गईं, क्योंकि बाजार को सप्लाई में रुकावट का डर है।
इस घटना से अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे पहले से ही अस्थिर चल रहे ऊर्जा बाजार में और उतार-चढ़ाव आ सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
इस अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। कई जहाज रास्ता बदल रहे हैं या लौट रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को चेतावनी मिलने के बाद कम से कम 13 जहाज लौट गए, और रविवार को कोई भी तेल टैंकर इस रास्ते से नहीं गुजरा।
ईरान कभी इस रास्ते को खोल रहा है तो कभी रोक रहा है, जिससे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि फिलहाल इस रास्ते से गुजरना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हम इसे किसी न किसी तरीके से खोल सकते हैं, लेकिन सबसे अच्छा तरीका यही है कि टकराव खत्म हो और ईरान को पूरी तरह कमजोर और निरस्त्र किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट जारी रहती है, तो वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ेगा और तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। फरवरी के आखिर से ही कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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