Ranchi Student Protest: रांची में तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा, JPSC के तीन सदस्यों का इस्तीफा, छात्रों का आर-पार का ऐलान
झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन 16वें दिन बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार शाम स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार की विशेष समिति और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब 5 घंटे तक चली तीसरे दौर की आधिकारिक वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।
वार्ता में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा मौजूद थे। सरकार का दावा है कि उसने 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द करने, एसीएफ परीक्षा रद्द करने और टीडीपीएल एजेंसी की जांच सहित छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान ली हैं, लेकिन छात्र JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
#WATCH | JPSC-JSCC aspirants' protest | Ranchi, Jharkhand: On the resignations of 3 JPSC members, a protestor, Manish Kumar, says, "Things are proceeding in the right direction. The government is under pressure. The resignation regarding the JPSC represents a victory of truth for… pic.twitter.com/aW2YVQkr59
— ANI (@ANI) August 9, 2026
JPSC के तीन सदस्यों ने एक साथ दिया इस्तीफा, सीआईडी पूछताछ से पहले आया फैसला
आंदोलन और पुलिस जांच के बढ़ते दबाव के बीच रविवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। आयोग के तीन सदस्यों—डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने एक साथ अपना त्यागपत्र राजभवन भेज दिया, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने तुरंत मंजूर कर लिया। दरअसल, भर्ती धांधली की जांच कर रही सीआईडी (CID) की टीम ने इन तीनों सदस्यों को पूछताछ के लिए समन भेजा था।
आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते पहले ही 22 जुलाई को अपने पद से हट चुके थे, जिससे अब JPSC का शीर्ष प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह खाली हो गया है और इसके पुनर्गठन का रास्ता साफ हो गया है।
CBI जांच पर वैधानिक रोड़ा, सरकार ने ED जांच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का दिया विकल्पवार्ता के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि JSSC-CGL परीक्षा का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में होने के कारण राज्य सरकार तुरंत सीबीआई जांच के आदेश देने में असमर्थ है। विकल्प के तौर पर सरकार ने वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपने, दोषियों को 90 दिनों में सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करने तथा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की देखरेख में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का लिखित प्रस्ताव रखा। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इन विकल्पों से संतुष्ट नहीं हुए और वार्ताओं का दौर समाप्त कर ठोस फैसले की मांग करने लगे।
आज विधानसभा मार्च पर अड़े हजारों छात्र, प्रशासन ने लागू की धारा 163
तीसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने अपनी आगे की रणनीति का ऐलान कर दिया है। मोराबादी मैदान और पुरानी विधानसभा परिसर में हजारों की संख्या में एकत्र अभ्यर्थियों ने सोमवार को नई विधानसभा की ओर मार्च करने का फैसला किया है। मंच पर छह छात्र कई दिनों से बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनकी स्थिति पर डॉक्टरों की टीम नजर रख रही है।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरे इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है और छात्रों से प्रदर्शन न करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि समस्याओं का हल लाठी या बंदूक के बजाय आपसी बातचीत से ही संभव है।
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