'किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी', अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत से पहले ट्रंप की धमकी
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत शुरू होने वाली है. इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रस्तावित समझौते को ठुकरा देता है तो अमेरिका उसके पुलों और पावर प्लांट्स पर अटैक कर देगा. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया है.
'हमारे सीजफायर समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन है'
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने होर्मुज में गोलीबारी की, उन्होंने सीजफायर का 'पूर्ण उल्लंघन' किया है. इस हमले में फ्रांस और ब्रिटेन से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने का प्रयास किया गया. हालांकि अभी तक स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है. उन्होंने अपने पोसट में लिखा,'ईरान ने कल होर्मुज में गोलीबारी की है. यह हमारे सीजफायर समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन है. एक फ्रांसीसी जहाज और यूनाइडेट किंगडम के एक मालवाहक जहाज की ओर कई गोलियां चलाई गईं.' ट्रंप ने कहा कि ईरान की कार्रवाई कार्रवाई खुद उसके खिलाफ हो रही है. इससे अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकाबंदी को और मजबूती मिली है. उन्होंने कहा,'वे बिना जाने हमारी सहायता कर रहे हैं. होर्मुज के बंद होने से उन्हें ही रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है.' ट्रंप ने चेताया कि अगर ईरान न्यायसंगत और उचित समझौते को स्वीकार नहीं करता है तो अमेरिका पर काफी बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करने वाला है.
'अब वक्त है कि ईरान की किलिंग मशीन को खत्म कर दिया जाए'
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा,'अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का से कई जहाज माल लोड करने वाले हैं. यह सब IRGC के कारण हो रहा है. ये हमेशा से ताकतवर दिखना चाहता है. हम एक बहुत ही उचित और न्यायसंगत समझौता को पेश कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि वे इसे स्वीकार करेंगे. अगर उन्होंने ऐसा नहीं कि किया तो ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को तबाह कर दिया जाएगा. अब किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी. यह समझौता करना जरूरी है, उसे करना मेरे सम्मान की बात भी होगी. यह काम बीते 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों को कर लेना चाहिए था. अब वक्त है कि ईरान की किलिंग मशीन को खत्म कर दिया जाए. '
जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत की अगुवाई करेंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत को लेकर इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. उन्होंने पोस्ट में कहा कि उनके प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद आ रहे हैं. ये कल शाम तक पहुंचेंगे.' न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत की अगुवाई करेंगे. उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर सोमवार रात इस्लामाबाद आएंगे. आपको बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए काफी अहम समुद्री मार्ग है. यहां से 20 प्रतिशत तेल पूरी दुनिया को मिलता है.
Personal Loan Rules: कर्जदार की मृत्यु के बाद किसे चुकानी होगी EMI? क्या परिवार पर आएगी मुसीबत? जान लें नियम
Personal Loan Rules: जीवन में अचानक आने वाली वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन एक लोकप्रिय जरिया है. लेकिन कई बार अनहोनी होने पर कर्जदार की मृत्यु हो जाती है. ऐसी दुखद स्थिति में परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि अब बैंक के पैसे कौन चुकाएगा? क्या बैंक मृतक के घर की नीलामी करेगा या बच्चों को अपनी कमाई से किश्तें भरनी होंगी? पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड कर्ज की श्रेणी में आता है, जिसका मतलब है कि बैंक ने यह पैसा बिना किसी जमीन या सोने को गिरवी रखे दिया है. इसी कारण इसके वसूली के नियम अन्य लोन जैसे होम लोन या कार लोन से काफी अलग होते हैं.
कानूनी वारिस की जिम्मेदारी और बैंक के अधिकार
बैकिंग नियमों और भारतीय कानून के अनुसार, पर्सनल लोन की जिम्मेदारी पूरी तरह से उस व्यक्ति की होती है जिसने इसे लिया है. अगर उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक उसके कानूनी वारिसों जैसे पत्नी, बच्चों या माता-पिता को कर्ज चुकाने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं कर सकता. बैंक यह दावा नहीं कर सकता कि पिता का कर्ज पुत्र को अपनी आय से भरना होगा. हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान रखने वाली है. अगर मृतक अपने पीछे कोई संपत्ति, बैंक बैलेंस या निवेश छोड़ गया है और वह संपत्ति उसके वारिसों को मिल रही है, तो बैंक उस संपत्ति पर अपना दावा पेश कर सकता है. लेकिन बैंक केवल उतनी ही रकम वसूल सकता है जितनी उस संपत्ति की बाजार में कीमत है. अगर संपत्ति कम है और कर्ज ज्यादा, तो परिवार को अतिरिक्त पैसा देने की जरूरत नहीं होती.
सह-आवेदक और गारंटर पर क्या असर पड़ता है?
पर्सनल लोन लेते समय अगर कोई सह-आवेदक या को-एप्लीकेंट शामिल था, तो नियम बदल जाते हैं. ऐसी स्थिति में मुख्य कर्जदार की मृत्यु के बाद लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी उस दूसरे व्यक्ति पर आ जाती है. बैंक सीधे तौर पर सह-आवेदक से बकाया राशि की मांग करता है. इसी तरह, यदि किसी व्यक्ति ने लोन के लिए गारंटी दी थी, तो बैंक गारंटर को नोटिस भेज सकता है. चूंकि गारंटर ने लोन के समय यह जिम्मेदारी ली थी कि मुख्य व्यक्ति के न होने या डिफॉल्ट करने पर वह पैसा भरेगा, इसलिए उसे यह कर्ज चुकाना पड़ सकता है. को-एप्लीकेंट होना बैंक के साथ कर्ज को साझा करने का वादा है, जिसे अनहोनी के बाद अकेले निभाना पड़ता है.
लोन इंश्योरेंस: संकट के समय में बड़ा सहारा
आजकल ज्यादातर बैंक और वित्तीय संस्थान पर्सनल लोन देते समय कर्ज का बीमा यानी लोन इंश्योरेंस करवाने की सलाह देते हैं. यह बीमा ऐसी ही आकस्मिक स्थितियों के लिए बना होता है. अगर कर्जदार ने लोन का बीमा करवाया था और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो परिवार को घबराने की जरूरत नहीं होती. ऐसी स्थिति में परिवार को बैंक को सूचित करना होता है और मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ बीमा क्लेम फाइल करना होता है. इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी बाकी बची हुई पूरी राशि का भुगतान बैंक को कर देती है. इससे परिवार पर कर्ज का कोई बोझ नहीं आता और बैंक अपना खाता बंद कर देता है. इसलिए लोन लेते समय बीमा करवाना हमेशा एक समझदारी भरा फैसला माना जाता है.
जब कोई रास्ता न बचे तो क्या करता है बैंक?
यदि मृतक के पास न तो कोई संपत्ति है, न ही कोई बीमा था और न ही कोई सह-आवेदक, तो बैंक के पास वसूली का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचता. ऐसी स्थिति में बैंक बकाया राशि को 'बैड डेट' मान लेता है और उसे अपने बट्टे खाते में डाल देता है. बैंक अक्सर मृतक के परिवार से संपर्क करते हैं और मानवीय आधार पर कोई छोटा सेटलमेंट करने का प्रस्ताव देते हैं. परिवार चाहे तो अपनी मर्जी से कुछ पैसा देकर मामला खत्म कर सकता है, लेकिन उन पर कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता. बैंक अपनी कागजी कार्यवाही पूरी करने के लिए कानूनी नोटिस जरूर भेज सकता है, लेकिन वह जबरन वसूली या डराने-धमकाने का हक नहीं रखता. अंततः, सही जानकारी ही परिवार को ऐसे समय में मानसिक तनाव से बचा सकती है.
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