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MP Board 2026: कक्षा 10वीं-12वीं छात्रों के लिए अपडेट, 7 मई से द्वितीय परीक्षा, 22 अप्रैल तक कर सकते हैं आवेदन, जानें सारी डिटेल्स

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) की कक्षा 10वीं और 12वीं की मुख्य परीक्षाओं में जो छात्र अनुपस्थित ,अनुत्तीर्ण या असफल रहे हैं या जो अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं या अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं वे मई 2026 में होने वाली ‘द्वितीय परीक्षा’ या पूरक परीक्षा (Second Examination) में शामिल हो सकते हैं। इच्छुक परीक्षार्थी 22 अप्रैल रात 12 बजे तक mponline पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

ध्यान रहे प्रथम परीक्षा में लिए गए विषयों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र अप्रैल अंत या मई के पहले हफ्ते में जारी किए जा सकते हैं। कक्षा 12वीं में केवल एक विषय में फेल होने वाले छात्र सप्लीमेंट्री के पात्र होते हैं, जबकि कक्षा 10वीं में दो विषयों तक फेल होने वाले छात्र इसमें शामिल हो सकते हैं। ‘

7 मई से परीक्षा, एक पाली में होगी

  • मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) के जारी कार्यक्रम के अनुसार, कक्षा 10वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षाएं 7 से 19 मई तक और 12वीं की परीक्षाएं 7 से 25 मई तक आयोजित की जाएंगी।
  • ​परीक्षा का समय सुबह 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। छात्रों को परीक्षा केंद्र पर सुबह 08:30 बजे तक रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।
  • इस परीक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत आयोजित किया जा रहा है। परीक्षार्थियों की प्रायोगिक परीक्षाएं आवंटित केन्द्रों पर 7 से 25 मई के मध्य संचालित की जाएगी।
  • प्रैक्टिकल विषयों में केवल उसी भाग की परीक्षा देनी होगी जिसमें छात्र फेल हुआ है। लेकिन किसी भी छात्र को विषय बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि 15अप्रैल 2026 को कक्षा 10वीं-12वीं के नतीजे जारी किए गए थे। इस वर्ष कक्षा 10वीं का कुल परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा, जो 2025 के 76.22 प्रतिशत से 2.80 प्रतिशत कम है। 10वीं में 7,87,595 नियमित परीक्षार्थियों में से 5,78,328 छात्र सफल हुए। वहीं 2,89,693 अनुत्तीर्ण हुए। वहीं, 12वीं में इस वर्ष रिजल्ट 76.01 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्ष 74.48 प्रतिशत से 1.53 प्रतिशत अधिक है। 12वीं में 6,13,318 नियमित परीक्षार्थियों में से 4,66,406 छात्र सफल और 1,99,608 असफल रहे।

पास होने के लिए 33% मार्क्स जरूरी

एमपी बोर्ड में कक्षा 10वीं में छात्रों को पास होने के लिए प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत नंबर लाने अनिवार्य है। अगर एक या दो सब्जेक्ट में न्यूनतम पास प्रतिशत से कम अंक आते हैं, तो विद्यार्थी फेल माना जाएगा। जो छात्र एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण होंगे, उनके लिए मई महीने में होने वाली द्वितीय परीक्षाएं में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

MP BOARD: 12TH SECOND EXAM TIME TABLE

  • 7 मई: बायोटेक्नोलॉजी, गायन वादन, तबला पखावज
  • 8 मई: हिंदी
  • 9 मई: रसायन, इतिहास, व्यवसाय अध्ययन, एलिमेंट ऑफ साइंस एंड मैथेमेटिक्स, ड्राइंग एवं पेंटिंग, गृह प्रबंध पोषण व वस्त्र विज्ञान
  • 11 मई: एनएसक्यूएफ के विषय, शारीरिक शिक्षा, एआई
  • 12 मई: भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, एनिमल हस्बैंडरी, विज्ञान के तत्व, भारतीय कला का इतिहास
  • 13 मई : भूगोल, क्रॉप प्रोडक्शन, स्टिल लाइफ एंड डिजाइन, विज्ञान एवं स्वास्थ्य
  • 14 मई : कृषि, होम साइंस, एकाउंटेंसी
  • 15 मई : संस्कृत
  • 16 मई : अंग्रेजी
  • 18 मई: बायोलॉजी
  • 19 मई: ड्राइंग एंड डिजाइन
  • 20 मई: समाजशास्त्र
  • 21 मई: गणित, मनोविज्ञान
  • 22 मई: इंफारमेटिक प्रैक्टिसेस
  • 23 मई: उर्दू, मराठी
  • 25 मई: राजनीति शास्त्र

MP BOARD: 10TH SECOND EXAM TIME TABLE

  • 7 मई: हिंदी
  • 8 मई: मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, चित्रकला, गायन, वादन, तबला, पखावज, कंप्यूटर
  • 9 मई: उर्दू
  • 11 मई: गणित (स्टैंडर्ड व बेसिक)
  • 12 मई: एनएसक्यूएफ के विषय
  • 13 मई: संस्कृत
  • 14 मई: सामाजिक विज्ञान
  • 16 मई विज्ञान
  • 19 मई: अंग्रेजी

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बैतूल में ई-अटेंडेंस से बढ़ी परेशानी: 375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, व्यवस्था पर सवाल

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षक इन दिनों एक अजीब दुविधा से गुजर रहे हैं। उन्हें तय करना पड़ रहा है कि बच्चों को पढ़ाएं या फिर मोबाइल में नेटवर्क ढूंढकर ई-अटेंडेंस लगाएं। नेटवर्क की कमी और तकनीकी समस्याओं के कारण 375 शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है, जिससे पूरे जिले में आक्रोश का माहौल बन गया है।

ई-अटेंडेंस का नियम और जमीनी सच्चाई

सरकार ने पारदर्शिता और समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू किया। इसके तहत हर शिक्षक को ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर रोजाना अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होती है। यह सिस्टम शहरों में तो आसानी से काम कर सकता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग है। बैतूल जैसे जिले में, जहां कई गांव अब भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं, वहां यह डिजिटल सिस्टम शिक्षकों के लिए परेशानी बन गया है।

नेटवर्क की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या

बैतूल ई-अटेंडेंस विवाद की सबसे बड़ी वजह खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी है। कई ग्रामीण स्कूल ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां मोबाइल नेटवर्क बेहद कमजोर है या बिल्कुल नहीं आता। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें हाजिरी लगाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। कई बार तो वे पहाड़ियों पर चढ़कर सिग्नल पकड़ने की कोशिश करते हैं। इसके बावजूद लोकेशन और सेल्फी मैच न होने के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती, जिससे उनकी सैलरी रोक दी जाती है।

2-3 घंटे में लगती है एक हाजिरी, पढ़ाई पर असर

बैतूल में ई-अटेंडेंस की समस्या सिर्फ नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वर भी बड़ी बाधा बन रहा है। सुबह के समय सर्वर इतना स्लो हो जाता है कि एक हाजिरी दर्ज करने में 2 से 3 घंटे तक लग जाते हैं। इसका सीधा असर स्कूल की पढ़ाई पर पड़ रहा है। जहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं, वहीं उन्हें अपना समय मोबाइल और इंटरनेट में खर्च करना पड़ रहा है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

375 शिक्षकों की सैलरी रुकी, बढ़ा आक्रोश

सबसे गंभीर बात यह है कि ई-अटेंडेंस न लगने के कारण 375 शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई है। इस कार्रवाई से शिक्षकों में डर और नाराजगी दोनों बढ़ गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब समस्या तकनीकी है, तो इसकी सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। वहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पढ़ाएं या नेटवर्क ढूंढें?

इस पूरे मामले में शिक्षकों का सबसे बड़ा सवाल यही है, “हम बच्चों को पढ़ाएं या नेटवर्क ढूंढें?” यह सवाल सिर्फ बैतूल का नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीण इलाकों का है जहां डिजिटल सिस्टम लागू तो कर दिया गया है, लेकिन उसकी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे रोज घंटों कोशिश करते हैं, फिर भी हाजिरी नहीं लगती। इसके बावजूद सैलरी रोकना गलत है।

नियम जरूरी, समाधान की तलाश जारी

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुसार ई-अटेंडेंस अनिवार्य है। प्रशासन भी इस समस्या से पूरी तरह अनजान नहीं है। अधिकारियों ने माना है कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है।

उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी है कि जहां नेटवर्क मिले, वहां जाकर हाजिरी लगाएं। साथ ही इस समस्या को शासन तक पहुंचाया गया है और समाधान के लिए मार्गदर्शन मांगा गया है।

 

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