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राजेश खन्ना से लेकर गोविंदा तक इन सितारों का डूबा था करियर, जानिए आखिर क्यों हुआ सुपरस्टार्स का डाउनफॉल?

Bollywood Superstars Downfall: बॉलीवुड में हर शुक्रवार सक्सेस और फेलियर की स्टोरी  बदलती है. आज जो एक्टर बॉक्स ऑफिस पर करता हुआ दिखाई दे रहा है, कल उसकी फिल्में लोगों को पसंद न आएं तो उसका स्टारडम खतरे में आ जाता है. बॉलीवुड में कई सुपरस्टार ने सक्सेस की ऊंचाई देखी और फिर करियर में डाउनफॉल भी देखा. राजेश खन्ना, गोविंदा, विवेक ओबेरॉय, इमरान खान और अक्षय कुमार की स्टोरी अलग हैं, लेकिन सभी के जर्नी में टाइम, लोगों की पसंद और करियर में लिए गए फैसलों का बड़ा असर हुआ. किसी स्टार का डाउनफॉल सिर्फ खराब फिल्मों ने नहीं होता है. कभी-कभी गलत स्क्रिप्ट, कॉन्ट्रोवर्सी, बदलती इमेज या टाइम के साथ को न बदल पाना भी वजह बन जाता है. आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं-

राजेश खन्ना का स्टारडम क्यों खत्म हुआ?

इस बात सब स्वीकार करते हैं कि राजेश खन्ना को बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार थे. 1969 से 1971 के दौर में उनकी लगातार सक्सेस फिल्मों ने ऐसा माहौल बनाया कि वे देश के सबसे पसंद किए जाने वाले एक्टर बन गए. 'अराधना', 'कटी पतंग', 'आनंद' और 'अमर प्रेम' जैसी फिल्मों ने उनकी पॉपुलैरिटी को नई ऊंचाई दी. उनके फैन की दीवानगी के किस्से आज भी याद किए जाते हैं. लेकिन 1970 के दशक के बीच में उनका डाउनफॉल शुरू हो चुका था. एक तरफ अमिताभ बच्चन का 'एंग्री यंग मैन' दौर शुरू हुआ, इसके साथ ही लोगों की पसंद भी बदलती रही.

राजेश की रोमांटिक इमेज के मुकाबले अमिताभ का गुस्से और स्ट्रवल वाला अंदाज उस टाइम की दौर से मेल खाता नजर आया. राजेश खन्ना के बारे में सेट पर देर से पहुंचने और अपने पसंद के लोगों संग काम करने जैसी बातें कही जाती रहीं. प्लॉप फिल्मों ने उनके करियर और इमेज को चोट पहुंचाई. उनका दौर बताता है कि सुपरस्टार कितना भी बड़ा हो, टाइम के साथ भी बदलना उतना ही जरूरी होता है. 

पॉलिटिक्स और गलत फैसलों का करियर पर पड़ा असर

90 के दशक में गोविंदा सुपरस्टार की कैटेगरी में आते थे. उस दौरान उनकी पॉपुलैरिटी किसी से कम नहीं थी. गोविंदा ने उस दौरान डेविड धवन के साथ 'कुली नंबर 1', 'हीरो नंबर 1', 'साजन चले ससुराल' और 'दीवाना मस्ताना' जैसी कई शानदार फिल्में की, जिससे उन्होंने लोगों को खूब एंटरटेन किया. इतना ही नहीं उनका डांस और कॉमिक टाइमिंग खास पहचान बन गई थी. लेकिन करियर के पीक पर उन्होंने पॉलिटिक्स में जाने का फैसला कर लिया था, 2004 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ा. जिससे उनकी फिल्मों से दूरी हो गई थी और जब उन्होंने वापसी की तो इंडस्ट्री की पसंद बदल चुकी थी.

इसके अलावा गोविंदा पर शूटिंग में देरी से आने के भी आरोप लगते रहे. 2007 की 'पार्टनर' उनकी आखिरी बड़ी हिट थी. इसके बाद उन्होंने 'किल दिल', 'आ गया हीरो' और 'रंगीला राजा' जैसी फिल्मों से लीड हीरो के तौर पर कमबैक करने की कोशिश की. लेकिन उन्हें पहले जैसी पॉपुलैरिटी और सक्सेस नहीं मिली. कुछ बड़े प्रोजेक्ट ठुकराने के फैसले का भी उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा. उनका करियर दिखाता है कि स्टारडम के दौर में लिए गए गलत फैसले करियर को खत्म कर सकते हैं. 

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बदल दी विवेक ओबेरॉय के करियर की दिशा

एक्टर विवेक ओबेरॉय ने साल 2002 में फिल्म 'कंपनी' बॉलीवुड में कदम रखा था. इस मूवी से उन्हें बड़ी पहचान मिली थी और लोग उन्हें जानने लगे. इसके बाद 'साथिया' ने उनकी लव-बॉय वाली इमेज को लोगों ने खूब पसंद किया. उस समय उन्हें बॉलीवुड के बड़े सितारों में गिना जाने लगा था. लेकिन 2003 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी. दरअसल, उन्होंने ऐश्वर्या राय और सलमान खान विवाद के दौरान सलमान खान पर कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि सलमान खान ने उन्हें फोन पर धमकी दी. बताया जाता है कि इस विवाद का यह असर हुआ कि उन्हें मैन स्ट्रीम की बड़ी फिल्में मिलना बंद हो गई थी.

हालांकि 'युवा' और 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी फिल्मों से उन्हें तारीफ तो मिली लेकिन लीड एक्टर के तौर पर वह ज्यादा चल नहीं सके. इसके चलते उन्हें विलेन और सपोर्टिंग रोल करने पड़े. 'क्रिश 3' और 'इनसाइड एज' फिल्मों से उन्होंने अलग किस्म के रोल करना शुरू किया. ऐसे में समझा जा सकता है कि एक विवाद भी किसी एक्टर के करियर पर बड़ा असर डाल सकता है. 

इमरान खान को चॉकलेट बॉय की इमेज छोड़ना पड़ा भारी

आमिर खान के भांजे और एक्टर इमरान खान ने साल 2008 में आई फिल्म 'जाने तू या जाने ना'डेब्यू किया था. फिल्म की सक्सेस ने वह यंग जनरेशन के बीच काफी पॉपुलर हुए. इसके बाद 'आई हेट लव स्टोरीज', 'डेली बेली' और 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' जैसी फिल्मों ने उम्मीदें बढ़ाईं. लेकिन उनकी इमेज एक रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों से जुड़ गई. इसके बाद जब उन्होंने 'मटरू की बिजली का मंडोला' और 'वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा' फिल्म में अलग किस्म के रोल किए तो लोगों ने उन्हें पसंद नहीं किया. साल 2013 से 2015 के बीच उनके करियर बड़ा डाउनफॉल देखने को मिला था. 'गोरी तेरे प्यार में' और 'कट्टी बट्टी' बॉक्स ऑफिस अच्छा नहीं चल पाई थीं. उन्होंने  2015 की 'कट्टी बट्टी' फिल्मों से ब्रेक ले लिया था. इसके बाद वह करीब 11 साल बाद हैप्पी पटेल में दिखाई दिए. ये फिल्म भी उनके करियर को उड़ान नहीं दे सकी. 

अक्षय कुमार पर साल में कई फिल्में करने पर उठे सवाल

अक्षय कुमार का डाउनफॉल बाकी स्टार से थोड़ा अलग है क्योंकि उनका स्टारडम खत्म नहीं हुआ. हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा भी दौर आया. जब लगातार फिल्मों के कमजोर परफॉर्म की वजह से उन पर सवाल उठने लगे थे. एक तरफ अक्षय कुमार साल में कई-कई फिल्में ला रहे थे और दूसरी तरफ उनकी फिल्में उम्मीद की मुताबिक नहीं चल रही थीं. जिससे उनके करियर पर संकट मंडराने लगा. अक्षय ने 'राउडी राठौर', 'एयरलिफ्ट', 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' और 'मिशन मंगल' जैसी फिल्मों से बड़ी पहचान बनाई. लेकिन कोराना के बाद 'बच्चन पांडे', 'सम्राट पृथ्वीराज', 'रक्षा बंधन', 'राम सेतु', 'सेल्फी', 'मिशन रानीगंज', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'सरफिरा' खास प्रदर्शन नहीं कर पाई. जिससे उनके करियर पर खतरा मंडराना लगा था. 

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एआई और बायोटेक्नोलॉजी से प्रेरित औद्योगिक क्रांति में भारत अहम भूमिका निभाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में एक बड़ी ताकत बनने के लिए तैयार है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित होगी।

उन्होंने कहा कि बॉयोई3 पॉलिसी, नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहलों के जरिए देश ने उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया के शुरुआती देशों में अपनी जगह बना ली है।

टेक्नोलॉजी डेवलपर्स, इंडस्ट्री लीडर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स की मौजूदगी में एक मीडिया कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने एक खास बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी, बॉयोई3 (इकोनॉमी, रोजगार और पर्यावरण के लिए बायोटेक्नोलॉजी) बनाने वाले शुरुआती देशों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है, साथ ही नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहल भी शुरू की हैं।

सिंह ने कहा, अगली औद्योगिक क्रांति, जो बायोटेक्नोलॉजी और एआई पर आधारित होगी, उसमें भारत एक अहम भूमिका निभाएगा। पिछली इंडस्ट्रियल क्रांति आईटी पर आधारित थी और भारत उसमें देर से शामिल हुआ था।

मंत्री ने कहा, भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक खास बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी है, यानी बॉयोई3।

मंत्री ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी धीरे-धीरे बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे नए और अहम सेक्टर की ओर बढ़ रही है और भारत इस बदलाव में सबसे आगे रहने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछली इंडस्ट्रियल क्रांति मुख्य रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित थी, जिसमें भारत ग्लोबल बदलाव में बाद के चरण में शामिल हुआ था, लेकिन अब देश इनोवेशन की अगली लहर को आकार देने वाले शुरुआती देशों में शामिल है।

भारत की तेजी से होती टेक्नोलॉजिकल तरक्की का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि देश की स्पेस इकोनॉमी, जो कभी बहुत छोटी थी, अब बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर की हो गई है और अगले आठ से नौ सालों में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने इस ग्रोथ का श्रेय पॉलिसी में किए गए सुधारों को दिया, खासकर 2020 में स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोलने के फैसले को।

सिंह ने कहा, भारत की टेक्नोलॉजिकल यात्रा में बड़ा बदलाव आया है और देश अब कई क्षेत्रों में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम कर रहा है।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Shubman Gill फिट, Yashasvi Jaiswal का जलवा, Sri Lanka के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले टीम इंडिया का दमदार प्रदर्शन

कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ अभ्यास मुकाबले में भारतीय टीम ने 207 रन के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया है। शुभमन गिल ने उंगली की चोट से उबरने का संकेत देते हुए 44 रन की तेज पारी खेली, जबकि यशस्वी जायसवाल ने 61 रन बनाकर अपनी तैयारी का मजबूत प्रदर्शन किया है। मुकाबले का सबसे मजेदार अंत मोहम्मद सिराज ने किया, जिन्होंने लगातार तीन छक्के लगाकर भारत को जीत दिलाई है।

मैच के आखिरी दिन सबसे ज्यादा नजर भारतीय कप्तान शुभमन गिल पर थी। गिल को दौरे से पहले हाथ में चोट लगी थी और इसी वजह से उन्होंने अभ्यास मैच की पहली पारी में बल्लेबाजी नहीं की थी। हालांकि, दूसरी पारी में उन्होंने पूरी तरह फिट नजर आते हुए 54 गेंदों पर 44 रन बनाए हैं। उनकी पारी में सात चौके शामिल रहे हैं।

भारत के स्पिन गेंदबाजी प्रशिक्षक सैराज बहुतुले ने मुकाबले के बाद कहा कि गिल अब पूरी तरह ठीक हैं और टीम प्रबंधन ने पहली पारी में उन्हें बल्लेबाजी नहीं कराने का फैसला केवल सावधानी के तौर पर लिया था। उन्होंने गिल की दूसरी पारी को शानदार बताया और कहा कि वह आगामी टेस्ट मुकाबले के लिए तैयार हैं।

भारत की पारी की शुरुआत गिल और यशस्वी जायसवाल ने की। दोनों ने पहले आठ ओवर में ही टीम का स्कोर 50 रन तक पहुंचा दिया। इस दौरान दोनों बल्लेबाजों ने कुल 10 चौके लगाए। जायसवाल ने श्रीलंका के गेंदबाज रमेश मेंडिस के खिलाफ शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और स्वीप शॉट के जरिए दबाव बनाया। उन्होंने 46 गेंदों में 61 रन बनाए, जिसमें नौ चौके और दो छक्के शामिल रहे हैं।

गिल और जायसवाल ने मिलकर 105 रन की साझेदारी की। इसके बाद टीम प्रबंधन ने जायसवाल को रिटायर्ड आउट कर वापस बुला लिया और ऋषभ पंत बल्लेबाजी के लिए आए। गिल भी जल्द ही कैच आउट हो गए। पंत ने शुरुआत में काफी गेंदें बिना रन के खेलीं, लेकिन बाद में छक्का लगाकर खाता खोला। उन्होंने ध्रुव जुरेल के साथ मिलकर 45 रन जोड़े हैं।

इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट एकादश ने दूसरी पारी में भारत के सामने 207 रन का लक्ष्य रखा था। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत में ही दबाव बनाया। मोहम्मद सिराज ने नई गेंद से शानदार गेंदबाजी की और निशान फर्नांडो तथा रविंदु रासंथा को परेशान किया। प्रसिद्ध कृष्णा ने भी पसिंदु सूरियाबंडारा को बोल्ड कर श्रीलंका क्रिकेट एकादश को शुरुआती झटके दिए हैं।

निशान फर्नांडो ने हालांकि शानदार बल्लेबाजी करते हुए पवन रत्नायके और अंजला बंडारा के साथ उपयोगी साझेदारियां कीं। उन्होंने 73 गेंदों में 63 रन बनाए और बाद में रिटायर्ड आउट हुए। बंडारा ने भी 35 रन बनाए, लेकिन रवींद्र जडेजा के गेंद पर यशस्वी जायसवाल ने स्लिप में उनका कैच पकड़ लिया है।

रवींद्र जडेजा और मानव सुथार को भी रिटायर्ड आउट किया गया। मानव सुथार आगामी टेस्ट में भारत के तीसरे स्पिनर के विकल्प के लिए अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, लक्ष्य के करीब पहुंचते समय थोड़ी परेशानी जरूर दिखाई दी, लेकिन मोहम्मद सिराज ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए लगातार तीन छक्के लगाकर मैच खत्म कर दिया है।

गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट 15 अगस्त से शुरू होना है। ऐसे में यह अभ्यास मुकाबला खिलाड़ियों की फिटनेस और परिस्थितियों को समझने के लिहाज से अहम था। शुभमन गिल की फिटनेस और यशस्वी जायसवाल की फॉर्म से भारतीय टीम प्रबंधन को टेस्ट श्रृंखला से पहले राहत मिली है।
Sun, 09 Aug 2026 22:28:57 +0530

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