तीन दिन भारत के दौरे पर रहेंगे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग, ये है पूरा शेड्यूल
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग तीन दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। राष्ट्रपति ली जे म्युंग और प्रथम महिला किम ही क्यूंग की भारत की राजकीय यात्रा 19 से 21 अप्रैल तक प्रस्तावित है।
इस यात्रा का उद्देश्य भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना और व्यापार-निवेश को बढ़ाना है। प्रमुख चर्चाओं में उन्नत तकनीकें, जहाज निर्माण और रक्षा सहयोग शामिल है।
भारत दौरे के कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति ली जे म्युंग 19 अप्रैल को शाम 4:35 बजे वायुसेना स्टेशन पालम (एएफएस पालम) पर आगमन करेंगे। उसी दिन शाम 06:50 बजे वे होटल ओबेरॉय में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से शिष्टाचार भेंट करेंगे।
अगले दिन 20 अप्रैल को कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 09:00 बजे राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह से होगी। इसके बाद राष्ट्रपति ली जे म्युंग 09:40 बजे राजघाट पर पुष्पांजलि कार्यक्रम में शामिल होंगे।
यहां से राष्ट्रपति ली जे म्युंग 11:30 बजे हैदराबाद हाउस पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। उसके बाद 01:05 बजे समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान और संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया जाएगा।
शाम 04:15 बजे भारत मंडपम में व्यापार मंच आयोजित होगा, जिसके लिए दूतावास की ओर से मान्यता की व्यवस्था की गई है।
उसी दिन शाम 07:00 बजे राष्ट्रपति ली जे म्युंग राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे।
इसके बाद अगले दिन 21 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे राजकीय यात्रा संपन्न करते हुए राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और प्रथम महिला किम ही-क्यूंग का प्रस्थान निर्धारित है।
ली के दौरे को देखते हुए (दोनों देश) शिपबिल्डिंग और मैरीटाइम इंडस्ट्रीज, फाइनेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), और रक्षा जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में आर्थिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेजी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच, दोनों देश एनर्जी सप्लाई चेन पर मिलकर काम करने को तत्पर हैं।
ली और मोदी तीसरी बार आमने-सामने बातचीत करेंगे। पिछले साल दोनों ग्रुप ऑफ सेवन और ग्रुप ऑफ 20 समिट में मिले थे। ली भारत के बाद मंगलवार को वियतनाम जाएंगे और बुधवार को वियतनाम के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव टो लैम से वार्ता करेंगे।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी निगरानी घटने से चीन की सक्रियता बढ़ी: रिपोर्ट
नेप्यीडॉ, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। दुनिया का अहम व्यापारिक मार्ग धीरे-धीरे चीन के प्रभाव में आता दिख रहा है, जबकि अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से बंटा हुआ है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
मेकोंग न्यूज में लिन मौंग की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में स्थित एंटेलोप रीफ को चीन एक कृत्रिम किले में बदल रहा है। यह इस बात का उदाहरण है कि जब निगरानी कमजोर पड़ती है तो क्या हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को दूसरी जगह भेज दिया है। इसी वजह से दक्षिण चीन सागर में निगरानी उड़ानों में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2025 के अंत की तुलना में है। इस स्थिति का फायदा उठाकर चीन ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है और एंटीलोप रीफ पर जमीन बनाने के लिए कोरल (मूंगा चट्टानों) की खुदाई तेज कर दी है।
मौंग के अनुसार, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट ही अब इस पूरे क्षेत्र में अमेरिका का एकमात्र प्रमुख कैरियर स्ट्राइक ग्रुप रह गया है, जो चीन को रोक सकता है। पहले जो यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन दक्षिण चीन सागर में तैनात थे, वे अब मध्य पूर्व के जल क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं।
मेकोंग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य वाणिज्यिक स्रोतों से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में चीन की योजनाओं का बड़ा पैमाना दिखता है। जो जगह पहले एक छोटा सा ठिकाना थी, अब वह एक बड़े भूभाग में बदल रही है, जिसका क्षेत्रफल छह वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा बताया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजीनियरों ने रीफ के किनारों को सीधा करके वहां रनवे बनाने की तैयारी की है, जिसकी लंबाई 2,700 मीटर से ज्यादा हो सकती है। यह इतना बड़ा होगा कि वहां लड़ाकू विमान, निगरानी विमान और भारी बमवर्षक विमान उतर सकेंगे। यह विस्तार अकेला मामला नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एंटेलोप रीफ का यह बदलाव दिखाता है कि चीन पश्चिमी पारासेल क्षेत्र पर नियंत्रण करना चाहता है। यह वही इलाका है जिससे होकर दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री व्यापार गुजरता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 के हेग ट्रिब्यूनल ने चीन के “नाइन-डैश लाइन” दावों को खारिज कर दिया था, फिर भी रिपोर्ट कहती है कि चीन अपनी इन गतिविधियों के जरिए इन दावों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह एक तरह की रणनीति है: इलाके पर कब्जा करना, पड़ोसी देशों को डराना और समुद्री कानूनों को फिर से अपने हिसाब से बदलना। अगर अमेरिका अपनी गश्त और मौजूदगी मजबूत नहीं रखता, तो यह विस्तार और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की ये कार्रवाई धीरे-धीरे “समुद्री क्षेत्र पर कब्जे” जैसी स्थिति बना रही है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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