UP News: डीएम ऑफिस के बाहर कफन ओढ़कर लेट गया बुजुर्ग, बोला- साहब मुझे जिंदा कर दो; लगाई न्याय की गुहार
UP News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है. यहां के सिस्टम की एक ऐसी चूक उजागर हुई है, जहां एक व्यक्ति पिछले 14 सालों से खुद के जिंदा होने के सबूत दे रहा है, लेकिन राजस्व विभाग के दस्तावेजों में उसे आज भी मृत माना जा रहा है. मामला इतना गंभीर हो गया कि थक-हारकर बुजुर्ग व्यक्ति को कफन ओढ़कर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने लेटना पड़ा. जैसे ही लोगों ने एक जीवित व्यक्ति को कफन में लिपटे हुए डीएम के चैंबर के बाहर देखा, पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया.
क्या है पूरा मामला?
यह अनोखी और दुखद घटना लालगंज थाना क्षेत्र के बानपुर गांव की है. यहां रहने वाले इशहाक अली नाम के बुजुर्ग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं. उनकी समस्या यह है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने 14 साल पहले ही उन्हें फाइलों में मृत घोषित कर दिया था. इस कागजी मौत का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि उनकी पुश्तैनी जमीन, जो लगभग 0.770 हेक्टेयर थी, उसे किसी और के नाम दर्ज कर दिया गया. बुजुर्ग का आरोप है कि तत्कालीन राजस्व निरीक्षक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें मृत दिखाया और उनकी जमीन गांव की ही एक महिला के नाम चढ़ा दी.
जिंदा हूं मैं!
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) April 17, 2026
बस्ती के इशहाक अली आज कफ़न ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचे और खुद को जिंदा दिखाकर अफसरों की आँखें खोलने की कोशिश की है.
इशहाक अली सरकारी अस्पताल के कर्मचारी थे. 31 दिसंबर 2019 को उनका रिटायरमेंट हुआ लेकिन इससे ठीक 7 साल पहले राजस्व अभिलेखों में वह मर गए.
लेखपाल ने उनकी… pic.twitter.com/7CtBBolzYh
पेंशन मिल रही है पर फाइल कहती है कि मौत हो गई
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इशहाक अली संतकबीर नगर के नाथनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीपर के पद पर तैनात थे. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 31 दिसंबर 2019 को अपनी सेवा पूरी की और विभाग ने उन्हें सम्मान के साथ रिटायर किया. ताज्जुब की बात यह है कि राजस्व विभाग के अनुसार उनकी मौत 2 दिसंबर 2012 को ही हो चुकी थी. इसका मतलब यह हुआ कि साल 2012 से 2019 के बीच, जब राजस्व विभाग उन्हें मृत मान रहा था, तब स्वास्थ्य विभाग उन्हें हर महीने नियमित वेतन दे रहा था. रिटायरमेंट के बाद अब सरकार उन्हें हर महीने पेंशन भी दे रही है.
कलेक्टर दफ्तर में हाई वोल्टेज ड्रामा
अपनी व्यथा सुनाते हुए इशहाक अली ने कहा कि बैंक उन्हें पैसे दे रहा है, स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें वेतन और पेंशन दी, लेकिन राजस्व विभाग की फाइलें उन्हें मुर्दा बता रही हैं. अपनी इसी बेबसी को दिखाने के लिए वह कफन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए. वहां मौजूद अधिकारियों और जनता के बीच वह जमीन पर लेट गए और रोते हुए कहा कि साहब, मैं जिंदा हूं और आपके सामने खड़ा हूं, मुझे सरकारी कागजों में भी जिंदा कर दीजिए. इस नजारे को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया. बुजुर्ग की हालत देखकर आनन-फानन में बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे.
प्रशासन ने दिया कड़ी कार्रवाई का भरोसा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद उपजिलाधिकारी सदर शत्रुघ्न पाठक ने मामले को संज्ञान में लिया. उन्होंने बुजुर्ग से बात की और उनके पास मौजूद दस्तावेजों की जांच की. एसडीएम ने माना कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें प्रथम दृष्टया भारी लापरवाही नजर आ रही है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि एक व्यक्ति जो साक्षात सामने खड़ा है और जिसके पास सरकारी विभाग से रिटायरमेंट और पेंशन के पुख्ता सबूत हैं, उसे मृत दिखाना अपराध है. प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि जिस भी कर्मचारी या अधिकारी ने गलत तरीके से बुजुर्ग को मृत घोषित किया है, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
जल्द मिलेगा बुजुर्ग को न्याय
जिला प्रशासन ने इशहाक अली को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को सुधारा जाएगा और उनकी जमीन वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निचले स्तर पर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों की लापरवाही से आम जनता को कितनी बड़ी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. फिलहाल, बुजुर्ग को उम्मीद जगी है कि अब शायद उन्हें 14 साल पुराने इस कागजी जाल से आजादी मिल जाएगी और वह समाज में एक जीवित व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान और संपत्ति वापस पा सकेंगे.
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