जियो का IPO मई में आने की उम्मीद:ड्राफ्ट पेपर्स जल्द फाइल करेगी कंपनी, ये देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा
रिलायंस जियो IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर्स मई में फाइल कर सकती है। पहले रिलायंस का लक्ष्य मार्च के अंत तक पेपर्स फाइल करने का था। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण बाजार में आई गिरावट की वजह से इस टाइमलाइन को आगे बढ़ा दिया गया। यह देश का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। वैल्यूएशन में हुंडई को पीछे छोड़ेगी जियो इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने पिछले साल नवंबर में जियो की वैल्यूएशन करीब 180 बिलियन डॉलर यानी करीब 16 लाख करोड़ रुपए आंकी थी। हालांकि, अब कुछ बैंकर्स इसकी वैल्यूएशन 240 बिलियन डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपए तक बता रहे हैं। इस वैल्यूएशन के हिसाब से 2.5% हिस्सा बेचने पर भी जियो हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ को पीछे छोड़ देगी। विदेशी निवेशकों को मिल सकता है निकलने का मौका पिछले 6 सालों में रिलायंस जियो ने केकेआर (KKR), सिल्वर लेक और गूगल जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टर्स से फंड जुटाया है। माना जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं। 19 बैंकों को सौंपी गई IPO मैनेज करने की जिम्मेदारी रिलायंस ने पिछले महीने ही IPO की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू कर दी थीं। इसके लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, गोल्डमैन सैक्स, जेएम फाइनेंशियल, HSBC, बैंक ऑफ अमेरिका और सिटीग्रुप जैसे 19 बड़े बैंकों को एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया गया है। हालांकि, IPO के स्ट्रक्चर और सटीक समय को लेकर अभी चर्चा जारी है और इसमें बदलाव संभव है। मस्क की स्टारलिंक से मुकाबला और AI पर फोकस जियो सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सर्विसेज में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए एनवीडिया के साथ पार्टनरशिप की है। बाजार में जियो की सीधी टक्कर इलॉन मस्क की स्टारलिंक से होने वाली है, जो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली है। क्या होता है DRHP? यह एक कच्चा डॉक्यूमेंट होता है जो कंपनी सेबी को जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, प्रमोटर्स और वित्तीय सेहत की पूरी जानकारी होती है। सेबी की मंजूरी के बाद ही IPO आता है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 505 अंक चढ़कर 78,494 पर बंद: निफ्टी में भी 157 अंकों की तेजी, 24,354 पर पहुंचा; FMCG शेयरों में खरीदारी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन आज यानी शुक्रवार 17 अप्रैल को सेंसेक्स 505 अंक (0.65%) की तेजी के साथ 78,494 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 157 अंकों (0.65%) की तेजी रही, ये 24,354 पर पहुंच गया। आज के कारोबार में FMCG,मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी रही, जबकि आईटी शेयरों में बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…
फूड एप से 12 ऑर्डर पर ₹900 एक्स्ट्रा खर्च हो:जोमैटो, स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस 3 साल में 9 गुना बढ़ी, यहां दाम भी 15% तक ज्यादा
ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है। 2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। ऑनलाइन मेन्यू के दाम भी ऑफलाइन से 10-15% ज्यादा होते हैं। मंथली खर्च पर बढ़ रहा 2 से 5 हजार का बोझ असली समस्या यह है कि हर खर्च छोटा लगता है। 249 रुपए का लंच, 199 रुपए का सब्सक्रिप्शन, लेकिन ये सब मिलकर परिवार के बजट पर हर महीने 2000-5000 रुपए का बोझ बढ़ा देते हैं। चुनौतीपूर्ण हालात में यह बिजनेस बढ़ता है। कोविड महामारी की सबसे कमजोर तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में जहां SP 500 कंपनियों की बिक्री 1.9% घटी, वहीं सब्सक्रिप्शन बिजनेस 9.5% बढ़े थे। नेटफ्लिक्स की आय 16%, एपल सर्विसेज की 36% और स्पॉटिफाई की 26% बढ़ी थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सब्सक्रिप्शन मॉडल दो दशकों का सबसे लचीला और मजबूत बिजनेस आर्किटेक्चर है। यहां सीधे ग्राहकों की जेब से पैसा आता है। आलस और मुश्किल प्रोसेस से बढ़ रहे पेड ग्राहक मैकिंजी की रिपोर्ट कहती है कि लोग सब्सक्रिप्शन तभी बंद करते हैं जब उसके दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। लेकिन ज्यादातर लोग इसे कैंसिल क्यों नहीं करते? इसकी सबसे बड़ी वजह है 'जड़ता' (Inertia) यानी कुछ न करने की आदत। फ्रीमियम मॉडल (जहाँ शुरुआत में सर्विस फ्री मिलती है) वाली कंपनियां 5 साल में करीब 95-100% ग्राहकों को अपने साथ जोड़े रखने में सफल रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि 95% ग्राहक उनकी सर्विस से बहुत खुश हैं। असल में, सब्सक्रिप्शन बंद करने के लिए ग्राहक को खुद से मेहनत और प्रोसेस करना पड़ता है, जबकि उसे चालू रखने के लिए उसे कुछ भी नहीं करना पड़ता। इसी आलस या प्रोसेस की जटिलता की वजह से लोग पैसे देते रहते हैं। फूड डिलीवरी, OTT की रफ्तार तेज 1. फूड डिलीवरी: तीन साल में तीन गुना हुआ बाजार 2023 में भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी बाजार 69,000 करोड़ रुपए का था। ईएमआर एंड मार्क का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक यह 2.25 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। 2. OTT: 60 करोड़ से ऊपर निकले स्ट्रीमिंग ऑडियंस आईबीईएफ के मुताबिक 2023 में OTT का पेड सब्सक्रिप्शन 8,200 करोड़ रुपए का था। इस साल यह 11,191 करोड़ तक पहुंच सकता है। बीते साल स्ट्रीमिंग ऑडियंस 60.1 करोड़ थे। ईरान जंग का असर: 10% तक और महंगाई के लिए तैयार रहें मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अभी सीमित है। लेकिन कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। यह अब भी 96 डॉलर पर है। अगर जंग लंबा खिंचा तो कई सेक्टरों में 10% से ज्यादा महंगाई देखने को मिल सकती है। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म मेवनार्क के मुताबिक, घर के बजट में कम से कम 10% बढ़ने के लिए अभी से तैयार रहें।
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