इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता होने के आरोपों की जांच आवश्यक है। न्यायालय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देते हुए यह भी कहा कि उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह या तो स्वयं जांच करे या मामले को जांच के लिए किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दे। यह टिप्पणी भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें उन्होंने लखनऊ की विशेष सांसद/विधायक अदालत द्वारा 28 जनवरी को पारित आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने कांग्रेस नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
इससे पहले, उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की एक विशेष अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ जारी एक मानहानि मामले की शुक्रवार को सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें भविष्य में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने की हिदायत दी। राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 311 के तहत एक प्रार्थना पत्र पर बहस होनी थी लेकिन वादी पक्ष के वकील ने एक बार फिर स्थगन की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।
शुक्ला ने बताया कि वादी पक्ष पिछले कई तारीखों से लगातार स्थगन की मांग कर रहा है, जिससे मामले की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है और इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर अगली तिथि पर वादी पक्ष बहस के लिए उपस्थित नहीं होता तो उनके विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 22 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले, 28 मार्च को सांसद-विधायक (एमपी-एमएलए) अदालत में हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया। वादी के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने बताया था कि अदालत में राहुल गांधी की आवाज के नमूने की जांच के लिए अनुरोध किया गया। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 सहपठित धारा 91 के तहत एक अर्जी दी है।
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