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गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने जिम्बाब्वे प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, एसटीईएम शिक्षा में सहयोग पर चर्चा

पणजी, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने जिम्बाब्वे सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य एसटीईएम शिक्षा, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और भविष्य की शिक्षा के लिए वैश्विक साझेदारियां मजबूत करना था।

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा के लिए यह गर्व का क्षण है कि गोवा का एक उद्यम, क्यूरियस माइंड इन्फोटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। यह कंपनी गोवा के एसटीईएम इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है और रोबोटिक्स और एआई शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के कारण जिम्बाब्वे सरकार द्वारा भी सराहा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ये घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि गोवा अब नवाचार, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। हमारी सरकार छात्रों को 21वीं सदी के आधुनिक कौशलों से सशक्त बनाने और एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे।

डॉ. सावंत ने आगे कहा कि ऐसी साझेदारियां ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेंगी। इससे एसटीईएम शिक्षा की उत्कृष्टता के वैश्विक मानचित्र पर गोवा की स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने जिम्बाब्वे प्रतिनिधिमंडल के साथ भविष्य में और गहरे सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

यह बैठक गोवा सरकार की ‘एजुकेशन फॉर फ्यूचर’ और ‘स्किल डेवलपमेंट’ नीतियों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि गोवा अब केवल पर्यटन का नहीं, बल्कि नवाचार और आधुनिक शिक्षा का भी हब बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

जिम्बाब्वे प्रतिनिधिमंडल ने गोवा के एसटीईएम इकोसिस्टम की सराहना की और भविष्य में दोनों पक्षों के बीच छात्रों, शिक्षकों और स्टार्टअप्स के आदान-प्रदान पर सहमति जताई।

--आईएएनएस

एससीएच

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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“महिला आरक्षण बिल भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’..” अखिलेश यादव का बड़ा बयान, लगाए गंभीर आरोप

लोकसभा में गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से तीन अहम बिल (महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026) पेश किए गए हैं। जिसको लेकर सदन में कई दलों के सांसदों ने अपना चर्चा में भाग लिया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में संबोधित कर सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से बिल के लिए समर्थन मांगा है। वहीं सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने भी महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है लेकिन भाजपाई चालबाजी के खिलाफ है। इतना ही नहीं उन्होंंनें सरकार पर आधी आबादी में मुस्लिम महिलाओं को नहीं गिनने का आरोप लगाते हुए कहा, हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़े और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का असली लक्ष्य वोट हासिल करना और सत्ता में बने रहना है, इसलिए ये विधेयक लाए गए हैं।

अखिलेश यादव का भाजपा पर महिला आरक्षण बिल के दुरुपयोग का आरोप

अखिलेश यादव ने आगे कहा, भाजपा तथाकथित महिला आरक्षण बिल का इस्तेमाल महिलाओं को सिर्फ नारों में बदलने के बहाने के तौर पर कर रही है, क्योंकि महिलाएं पहले ही महिला असुरक्षा, महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा और अपराध में बेतहाशा बढ़ोतरी, महंगाई, बेरोजगारी, बीमारी और अशिक्षा के कारण भाजपा से दूर हो चुकी हैं। भाजपा सदस्यों और उनके साथियों की पिछड़ी, छोटी सोच और दुनिया को देखने का नजरिया नए जमाने की महिला शक्ति को मंजूर नहीं है, जो महिलाओं की आजादी के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने कहा, यह बिल भी महिलाओं के हक छीनने के लिए एक छिपे हुए रूप में आया है। इस बिल के बारे में हमारे सवाल और शक विरोध नहीं हैं बल्कि, वे महिलाओं के हक की रक्षा और उन्हें मजबूत बनाने के लिए खींची जा रही सकारात्मक ‘लक्ष्मण रेखा’ हैं।

महिला आरक्षण बिल को लेकर सपा सांसद का तीखा आरोप

सपा सांसद ने कहा, महिला आरक्षण बिल ‘पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक’ समुदायों की सभी महिलाओं के खिलाफ है क्योंकि यह महिलाओं को आपस में बांटने की साजिश है। यह महिलाओं को अधिकार देने के बारे में नहीं है, बल्कि आज उनकी ताकत को बांटने और बहुत कमजोर करने और कल उनका हक छीनने की एक धोखेबाजी वाली योजना है।

उन्होंने आगे कहा कि आजादी से पहले देश का बंटवारा करने में भाजपा के पुराने सोच वाले लोगों ने अंडरग्राउंड भूमिका निभाई, और फिर उनके साथियों ने आज़ादी के बाद भी नफरत के नाम पर समाज के भाईचारे, शांति और सद्भाव को बांटने के ‘बुरे काम’ जारी रखे। अब ये बुरे लोग, अपनी महिला-विरोधी सामंती सोच से प्रेरित होकर, देश की ‘आधी आबादी’– मतलब महिलाओं– की ताकत को बांटने और हमेशा के लिए दबाने की साज़िश कर रहे हैं, ताकि आज की जागरूक महिलाओं की विरोध करने की क्षमता टूट जाए, कम हो जाए और मिट जाए।

महिला आरक्षण बिल भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’- अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को भाजपा की बांटने वाली राजनीति का ‘काला कागज’ करार दिया है। जिन्होंने अपने संगठनों में महिलाओं को इज्जत और सम्मान नहीं दिया, वे उन्हें राजनीति में क्या जगह देंगे? अगर हम पिछड़े वर्गों की आबादी को कम से कम सिर्फ़ 66% मानें, तो ‘उस आबादी का आधा हिस्सा- मतलब औरतें-33% होंगी। क्योंकि कोई भी उनके अधिकारों की बात नहीं कर रहा है, इसका मतलब है कि यह बिल 33% औरतों को अधिकार देने के लिए नहीं, बल्कि उनसे उनके अधिकार छीनने के लिए लाया जा रहा है। यह भाजपा और उनकी हावी, औरत विरोधी सामंती सोच की साज़िश है, जिसके खिलाफ हम विरोध करते रहेंगे। भले ही इसमें ‘सालों या सदियां’ लग जाएं। असल में, वे 33% औरतों को आरक्षण नहीं दे रहे हैं, बल्कि 33% औरतों से रिज़र्वेशन छीन रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, हम बिल के खिलाफ नहीं हैं, सिर्फ उनके शोषण करने वाले तरीके के खिलाफ हैं, जिसका इरादा गलत है। अगर कुछ करने के पीछे कोई सच्चा इरादा है, तो शक की कोई गुंजाइश नहीं है। असल में, यह हार की घबराहट में उठाया गया जल्दबाजी का कदम है, जिसके पीछे कोई तैयारी नहीं है। इस बिल को लेकर हमारे बीच गुस्सा इसलिए है क्योंकि इसका प्रोसेस ही गलत है। इस बिल में कमी इसलिए है, क्योंकि भाजपा की नज़र में इसका मतलब सिर्फ़ वोट है।

सपा सांसद का संशोधन प्रक्रिया और लोकतंत्र पर साजिश का दावा

सपा सांसद ने कहा, असल में महिला आरक्षण बिल की बुनियाद ही बेबुनियाद है। अगर आरक्षण का आधार कुल सीटों का 1/3 (एक-तिहाई) है, तो इसका मतलब है कि यह मैथ का मामला है, और मैथ का आधार नंबर, आंकड़े हैं- कोई आसमानी बातें नहीं। और ऐसे मामलों में, नंबर का आधार आबादी है, जिसका आधार जनगणना है। जब 2011 के पुराने डेटा को महिलाओं की आबादी का आधार बनाया जाएगा, तो महिला आरक्षण की बुनियाद ही गलत हो जाएगी। जब मिट्टी में ही कमी होगी, तो असली फसल कैसे उग सकती है? जब गिनती ही गलत है, तो आरक्षण सही कैसे हो सकता है?

अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने भाजपा पर संशोधन के नाम पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, असल में भाजपा वालों का जनगणना कराने से बचने का इरादा है, क्योंकि अगर जनगणना हुई, तो उन्हें जाति-आधारित डेटा और जाति-आधारित आरक्षण भी देना होगा। यह भाजपा की एक बहुत बड़ी साज़िश है, जिसमें जनगणना के आधार पर सीमांकन को खारिज करके पिछड़ी, दलित, अल्पसंख्यक और आदिवासी महिलाओं के हक लूटे जा रहे हैं। ‘सो-कॉल्ड विमेंस रिज़र्वेशन बिल’ महिलाओं और डेमोक्रेसी के खिलाफ़ कुछ लोगों का एक सीक्रेट प्लान है, जो तब तक मंज़ूर नहीं होगा जब तक इस प्रोसेस में सुधार नहीं किए जाते।

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