डेंगू से जूझ रहीं ‘बालिका वधू’ फेम अविका गौर, जानिए कैसे फैलता है ये वायरस और बचने का देसी जुगाड़
‘बालिका वधू’ फेम अविका गौर डेंगू से जूझ रही हैं और डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है. जानिए डेंगू मच्छर से कैसे फैलता है, शरीर पर इसका क्या असर होता है, किन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए और इससे बचाव के आसान तरीके क्या हैं.
PoK को लेकर पाकिस्तान सरकार में भय का माहौल, 99 प्रतिशत प्रदर्शनकारियों को बताया देशभक्त
गुलाम जम्मू-कश्मीर (PoK) को लेकर पाकिस्तान सरकार में भय माहौल है. यहां पर हालात बेकाबू हो रहे हैं. इस बीच पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने शनिवार को कहा कि पीओके में 99 प्रतिशत प्रदर्शनकारी देशभक्त हैं.
कार्रवाई को सही ठहराया था
उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि जल्द ही प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी'(JAAC) के सदस्यों से मुलाकात करने वाला है. यह कार्यकर्ता क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं. कुछ दिनों पहले तक पार्टी का कहना था कि प्रदर्शनकारियों के बीच प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान' लोग मौजूद थे, जो हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इस कार्रवाई को सही ठहराया था.
PoK में चुनाव के तीसरे चरण में से पहले शनिवार को एक रैली को संबोधित करते हुए सनाउल्लाह ने कहा, 'JAAC कमेटी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं.' सनाउल्लाह ने कहा,'जब दो-तिहाई बहुमत के साथ PML(N) की सरकार बनेगी तो वह 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेगी. उनका पहला काम इस मामले को सुलझाना है.'
बहुमत का आंकड़ा पार
अब तक हुए चुनाव में दो चरणों में सत्ता समर्थित PML(N) ने करीब 25 सीटें पर विजय प्राप्त की. यह PoK की तथाकथित विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर गया. बड़े पैमाने पर हिंसा और धांधली के बीच यह जीत मिली. PML(N) का मुकाबला सीधे PPP के संग था. यह संघीय संरकार में उसकी गठबंधन सहयोगी है. तीसरे और आखिरी चरण में, सोमवार को चार सीटों पर मतदान होगा. वहीं सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव अनिश्चित काल के लिए टाल दिए गए हैं.
शासन और चुनावी व्यवस्था में बदलाव
पीओके में हालात काफी तनावपूर्ण हैं. जून से विरोध-प्रदर्शन और झड़पें बढ़ चुकी हैं. प्रदर्शनकारी महंगाई, बिजली/आर्थिक मुद्दों, स्थानीय शासन और चुनावी व्यवस्था में बदलाव जैसी मांगें उठा रहे हैं. हिंसक झड़पों में बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं. अलग-अलग पक्षों के आंकड़ों में काफी अंतर है; हाल की रिपोर्ट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच गंभीर हिंसा का उल्लेख है. इंटरनेट और मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने की सूचना है. इस कारण स्वतंत्र रूप से जानकारी बाहर आने में समस्या हो रही है. संयुक्त राष्ट्र ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और जवाबदेही को लेकर चिंता व्यक्त की है.
कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से मतदान प्रभावित या स्थगित हुआ है और चुनाव के बहिष्कार का आह्वान भी किया गया. फिलहाल इसे भारत-पाकिस्तान के बीच सीधे सैन्य संघर्ष के रूप में नहीं कहा गया है. मुख्य संकट PoK के भीतर स्थानीय राजनीतिक और आर्थिक असंतोष तथा प्रशासन/सुरक्षाबलों में टकराव का है.
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