बच्चों के पाचन स्वास्थ्य की न करें अनदेखी, इन आम संकेतों पर दें ध्यान
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। बच्चों की सेहत का ध्यान रखना आज के व्यस्त जीवन में और भी जरूरी हो गया है। बचपन में छोटी-छोटी लापरवाही भी उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। सही खान-पान, नियमित खेलकूद और समय पर टीकाकरण के साथ-साथ बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है।
नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन माता-पिता अक्सर इनके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। अगर समय पर इन संकेतों को पहचाना जाए तो गंभीर परेशानी से बचा जा सकता है।
बच्चों में आम पाचन समस्याएं और उनके संकेत की बात करें तो इसमें कब्ज से लेकर कमजोरी तक शामिल है, जिन्हें आम तौर पर इग्नोर कर दिया जाता है। हालांकि, समय के साथ आगे चलकर यही बड़ी समस्या की वजह भी न जाता है। बच्चों का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याएं भी जल्दी बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के हर छोटे बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। सही समय पर पहचान और उपचार से बच्चे स्वस्थ और खुशहाल रह सकते हैं।
इन संकेतों में पहला है कब्ज, बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोता-चिल्लाता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है। दूसरा है दस्त, बच्चे को बार-बार पतला मल आना। इससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चा सुस्त पड़ जाता है और कमजोर दिखने लगता है।
बच्चे के पेट में जलन और एसिडिटी भी एक बड़ा संकेत है। बच्चा बार-बार पेट में जलन की शिकायत करता है, उसे उल्टी आती है या खट्टी डकारें आने लगती हैं। भोजन असहजता या फूड इनटॉलेरेंस भी शामिल है, जैसे दूध, गेहूं या किसी विशेष खाने से पेट फूलना, दर्द होना या चकत्ते पड़ना। कृमि संक्रमण अस्वच्छता के कारण होने वाली यह समस्या बच्चों में बहुत आम है। बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम लगती है, वजन नहीं बढ़ता और कभी-कभी नींद में दांत पीसता है।
शिशु रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य को लेकर माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए। अगर बच्चा बार-बार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज की शिकायत करे तो इसे सामान्य न समझें। ऐसे में बच्चे के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। घरेलू नुस्खों से जल्द आराम न मिले तो ज्यादा देर करने की बजाय तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। बच्चे को साफ-सुथरा रखें, उबला पानी पिलाएं और संतुलित आहार दें। साथ ही नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 69,000 रुपए करने की मांग, एनसी-जेसीएम ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (एनसी-जेसीएम) ने 8वें वेतन आयोग को भेजे गए अपने साझा ज्ञापन में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि, एक महीने के वेतन के बराबर ग्रेच्युटी और अन्य लाभों का प्रस्ताव रखा है।
एनसी-जेसीएम, केंद्र सरकार (नियोक्ता) और केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बातचीत के लिए सर्वोच्च संस्था है। एडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में बताया गया कि इस संस्था ने 8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर 3.833 रखने का प्रस्ताव दिया है। इससे 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए से बढ़कर 69,000 रुपए हो सकता है।
वेतन आयोग में, जीवन निर्वाह लागत और मुद्रास्फीति जैसे कारकों के आधार पर वेतन में संशोधन करने के लिए फिटमेंट फैक्टर एक गुणक है, जिसे मौजूदा मूल वेतन पर लागू करके नए वेतन की गणना की जाती है।
एनसी-जेसीएम ने 6 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, पदोन्नति पर दो वेतन वृद्धि (कम से कम 10,000 रुपए के लाभ के अधीन) आदि का भी प्रस्ताव रखा।
अगर यह बदलाव अमल में लाया जाता है तो इसका असर सीधे केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेशनर्स पर पड़ेगा।
फिटमेंट फैक्टर लागू होने से सभी स्तरों पर वेतन वृद्धि एक समान होती है। उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन संशोधन में 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का उपयोग किया गया था। 6वें वेतन आयोग के तहत प्रवेश स्तर का मूल वेतन 7,000 रुपए था, जिसे इस फैक्टर से गुणा करने पर 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए हो गया।
वेतन मैट्रिक्स में कुल 18 स्तर हैं, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के लिए उच्च स्तर शामिल हैं। कर्मचारियों को मूल वेतन के साथ-साथ एचआरए, भविष्य निधि और अन्य लाभ भी मिलते हैं।
राष्ट्रीय डाक संगठनों के संघ ने सरकार से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता को मूल वेतन में विलय करने और उसी तिथि से अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया है।
वेतन वृद्धि सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी, जिसके विश्लेषकों के अनुसार 2.5 से अधिक होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ कर्मचारी समूहों ने 3.15 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, हालांकि आधिकारिक निर्णय में एक वर्ष से अधिक का समय लग सकता है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मार्च में संसद को बताया था कि 8वां वेतन आयोग केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य लाभों पर अपनी सिफारिशें देगा। उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग नवंबर 2025 से 18 महीनों के भीतर यह कार्य पूरा कर लेगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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