Motorola अपने नए स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Pro को भारत में लॉन्च करने जा रहा है। लॉन्च से पहले ही इस फोन के कई अहम फीचर्स सामने आ चुके हैं, जिससे टेक लवर्स के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डिवाइस 6500mAh की बड़ी बैटरी, 144Hz रिफ्रेश रेट वाले AMOLED डिस्प्ले और पावरफुल Dimensity 8500 चिपसेट के साथ आएगा। Flipkart लिस्टिंग के जरिए इसके डिजाइन और कुछ खास स्पेसिफिकेशन भी कन्फर्म हो चुके हैं, जो इसे मिड-रेंज सेगमेंट में एक मजबूत दावेदार बना सकते हैं।
Motorola Edge 70 Pro के स्पेसिफिकेशन Flipkart पेज के अनुसार, Motorola Edge 70 Pro में 6.8-इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जिसमें 1.5K रेजोल्यूशन, 144Hz तक रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलती है। डिस्प्ले को Gorilla Glass 7i से प्रोटेक्शन दिया गया है। यह फोन MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और IP68/69 रेटिंग के साथ आता है, जो इसे धूल और पानी से सुरक्षित बनाता है।
फोन में Dimensity 8500 Extreme चिपसेट दिया गया है, जिसके साथ 12GB तक LPDDR5x RAM मिलती है। इसमें 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 90W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह डिवाइस Android 16 पर आधारित Hello UX के साथ आता है। बेहतर कूलिंग के लिए इसमें 4600mm² का वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम दिया गया है।
Motorola Edge 70 Pro को 3 साल के OS अपडेट और 5 साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे। ऑडियो के लिए इसमें Dolby Atmos ट्यून किए गए ड्यूल स्पीकर्स दिए गए हैं। कैमरा की बात करें तो इसमें Sony LYT-710 सेंसर के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा मिलेगा, जबकि बाकी कैमरों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
लॉन्च डेट और संभावित कीमत मोटो ने अधिकारिक तौर पर कंफर्म किया है कि Motorola Edge 70 Pro भारत में 22 अप्रैल को लॉन्च किया जाएा। यह फोन तीन Pantone कलर ऑप्शन्स में उपलब्ध होगा। इनमें Lily White (मार्बल फिनिश), Tea (हरा रंग, साटन लक्स फिनिश) और Titan (नीला रंग, फैब्रिक फिनिश) शामिल है।
अभी इसकी कीमत का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन Edge 70 की लॉन्च कीमत ₹29,999 थी, इसलिए उम्मीद है कि Edge 70 Pro की कीमत ₹40,000 से कम हो सकती है।
संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है, जो भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस सत्र का मुख्य केंद्र संविधान (131वां संशोधन) बिल है। यह बिल न केवल लोकसभा की सीटों के ढांचे को बदलेगा, बल्कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण) के मार्ग में आने वाली सबसे बड़ी कानूनी और व्यावहारिक अड़चनों को भी दूर करेगा। इस कदम का मकसद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करके 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर बनी कानूनी अड़चन को दूर करना है।
कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर, सरकार 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है, बिना पुरुषों के पास मौजूद मौजूदा सीटों की संख्या कम किए; यह एक ऐसा कदम है जिसका मकसद अंदरूनी राजनीतिक टकराव को कम करना है। हालांकि, 850 सीटों तक प्रस्तावित विस्तार के साथ, राज्यों के बीच सीटों का बंटवारा 2026 के परिसीमन पर होने वाली बहस में सबसे विवादित मुद्दा बनकर उभरा है।
बिल के मसौदे में विस्तारित सदन का स्पष्ट बंटवारा प्रस्तावित है, जिसमें 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित की गई हैं। यह मौजूदा 530 राज्य सीटों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 13 सीटों से एक बड़ी बढ़ोतरी है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए, सरकार ने परिसीमन को 2026 की जनगणना के बाद होने वाली प्रक्रिया से अलग करने का प्रस्ताव दिया है, और इसके बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने का सुझाव दिया है।
केंद्र द्वारा समर्थित "आनुपातिक विस्तार" मॉडल के अनुसार, हर राज्य की मौजूदा सीटों में लगभग 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस आनुपातिक बढ़ोतरी का मकसद राज्यों के बीच मौजूदा राजनीतिक संतुलन को बनाए रखना और उत्तर-दक्षिण विभाजन को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को कम करना है, जिसने ऐतिहासिक रूप से परिसीमन की कवायदों में रुकावट डाली है।
महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन बिलों के बीच अहम जुड़ाव
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन और नवीनतम जनगणना से जोड़ता है। केंद्र अब परिसीमन और महिला विधायकों के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने, दोनों के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल करके आगे बढ़ने की योजना बना रहा है।
2023 के संस्करण के विपरीत, जो 2021 की जनगणना से जुड़ा हुआ था, नया बिल उस देरी को खत्म करना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि 2029 के आम चुनावों से ही सभी सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हों। इसमें यह प्रस्ताव है कि परिसीमन का काम उपलब्ध सबसे नई जनगणना के आधार पर किया जाए - इस मामले में, 2011 की जनगणना के आधार पर।
850 सीटों वाले मॉडल का एक मुख्य फ़ायदा यह है कि इसमें महिलाओं के लिए लगभग 283 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं, जबकि लगभग 567 सीटें सामान्य और अन्य श्रेणियों के लिए छोड़ी जा सकती हैं - जो कि लोकसभा की मौजूदा कुल सीटों की संख्या से भी ज़्यादा है।
यह बिल हर बार परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों को बारी-बारी से बदलने का भी प्रावधान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व समय के साथ अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में फैला रहे।
यह आरक्षण न केवल लोकसभा पर, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं के साथ-साथ दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं पर भी लागू होगा।
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