लोकसभा परिसीमन 2026: 18 घंटे का महा-मंथन, 850 सीटें और 426 पर बहुमत; क्या है मोदी सरकार के 3 नए बिल?
भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में 16 अप्रैल का दिन एक बड़े 'पावर शिफ्ट' के रूप में दर्ज होने जा रहा है। केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में तीन ऐसे ऐतिहासिक विधेयक पेश करने वाली है, जो न केवल लोकसभा की विधायी संरचना को बदल देंगे, बल्कि 2029 के चुनावों की पूरी तस्वीर बदल देंगे।
मुख्य एजेंडा 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पूरी तरह सक्रिय करना है। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के चुनावों में 270 से ज्यादा महिलाएं संसद पहुंचे, लेकिन इसके लिए लोकसभा सीटों की कुल संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जानी है। इसी लक्ष्य को साधने के लिए आज सदन में 18 घंटे की मैराथन बहस होने जा रही है।
सत्ता का नया समीकरण: 426 पर बनेगा बहुमत
सीटों की इस भारी बढ़ोतरी के बाद सत्ता हासिल करने का जादुई आंकड़ा भी पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में सरकार बनाने के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन लोकसभा की क्षमता 850 होने के बाद बहुमत के लिए 426 सीटों की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा, नए प्रावधानों के तहत करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह बदलाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय और जातीय राजनीति के संतुलन को भी पूरी तरह हिला देगा। विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी ने इसे 'चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल' और पिछड़ों-दलितों के अधिकारों की 'चोरी' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है।
तीन बिल, जो बदल देंगे विधानसभा से लोकसभा तक की तस्वीर
सरकार आज जो तीन विधेयक पेश करने जा रही है, वे 'नारी शक्ति' के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में सबसे बड़े कदम हैं:-
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: यह बिल लोकसभा की अधिकतम संख्या 850 करने का प्रावधान करता है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी।
- परिसीमन विधेयक, 2026: यह 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करेगा। यही वह बिल है जो तय करेगा कि किस राज्य में कितनी सीटें बढ़ेंगी।
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: यह दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में महिला आरक्षण और सीट समायोजन को लागू करेगा।
सीटों की गिनती का गणित: जनसंख्या बनेगी आधार?
प्रस्तावित बिल की धारा 8 परिसीमन आयोग को 'नवीनतम जनगणना' और सांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर सीटों का बंटवारा करने का अधिकार देती है। अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन के जरिए जनसंख्या अभिव्यक्ति को 2011 के आंकड़ों से जोड़ा जा रहा है।
इसका सीधा असर यह होगा कि जिन राज्यों की आबादी तेजी से बढ़ी है, जैसे यूपी, बिहार, राजस्थान, वहां सीटों की संख्या में भारी उछाल आएगा। यूपी में सीटें 80 से बढ़कर 140 तक पहुंच सकती हैं, जिससे उत्तर भारतीय राज्यों का दिल्ली की सत्ता पर दबदबा और भी बढ़ जाएगा।
दक्षिण भारत का आक्रोश: "अच्छे काम की सजा मिल रही है"
इस विधायी कायाकल्प के विरोध में दक्षिण के राज्य तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक एकजुट हो गए हैं। डीएमके सांसद पी. विल्सन ने इसे "राज्यों को दी गई संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन" बताया है। दक्षिण का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को सफलतापूर्वक लागू किया, लेकिन अब उसी जनसंख्या को आधार बनाकर उनकी राजनीतिक ताकत कम की जा रही है।
उनके अनुसार, 1971 की जनगणना के आधार पर जो 'फ्रीज' लगाया गया था, उसे हटाना दक्षिण भारत के हितों के खिलाफ एक बड़ी साजिश है।
सदन में 18 घंटे की बहस: कौन पेश करेगा कौन सा बिल?
लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इस चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है, जो शुक्रवार तक चल सकता है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो महत्वपूर्ण बिल पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा तीसरा विधेयक पेश करेंगे।
सदन में सत्ता पक्ष 'नारी शक्ति' के नाम पर विपक्ष को घेरने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष इसे 'सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश' बताकर मैराथन बहस के दौरान सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करेगा।
Nari Shakti Vandan Adhiniyam | नारी शक्ति का हुंकार: महिला आरक्षण के समर्थन में दिल्ली की सड़कों पर उतरीं भाजपा महिला कार्यकर्ता
महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में महत्वपूर्ण संशोधनों पर विचार करने के लिए बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले राजधानी दिल्ली का माहौल पूरी तरह 'नारी शक्ति' के रंग में रंगा नजर आया। बुधवार को दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में भाजपा महिला मोर्चा की सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल 'महिला बाइक रैली' निकालकर इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत किया।
सड़कों पर उत्साह और मानव श्रृंखला
संसद सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल बाइक रैली निकाली गई, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल में महिलाओं का उत्साह देखने लायक था। इस प्रदर्शन का उद्देश्य महिला आरक्षण को लेकर जन-जागरूकता फैलाना और केंद्र सरकार के इस कदम के प्रति अपना समर्थन जताना था।
इससे जुड़े प्रस्तावित संशोधनों के पारित होने के बाद 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय हो जाएगा। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि देश भर की महिलाएं ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ के प्रति जागरूक हैं और वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का आभार व्यक्त कर रही हैं।
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उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक स्वागतयोग्य कदम है। इसके अलावा, भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में पदयात्राएं भी निकालीं।
राजधानी के अन्य हिस्सों में भी पदयात्राएं
जश्न और जागरूकता का यह सिलसिला केवल कनॉट प्लेस तक सीमित नहीं रहा। भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस विधेयक के समर्थन में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में पदयात्राएं निकालीं। इन पदयात्राओं के जरिए लोगों को बताया गया कि कैसे यह संशोधन भविष्य में महिला नेतृत्व को सशक्त करेगा और नीति निर्धारण में उनकी भूमिका को निर्णायक बनाएगा।
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इस विशेष सत्र और प्रस्तावित संशोधनों पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, जो भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।
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