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दृ​ष्टिहीनों के साथ भारत घूमने वाले जर्नलिस्ट के अनुभव:नजारे नहीं, एहसास... देखने वालों के लिए सफर ‘फिल्म’ है, पर अंधेरों के लिए ‘खुलती किताब’

‘हम में से ज्यादातर लोगों के लिए यात्रा का मतलब ‘नजारे देखना’ होता है। हम दर्शनीय स्थलों पर जाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और ऐसे होटल ढूंढ़ते हैं जहा‍ं से बाहर की खूबसूरती दिखे। लेकिन आपने कभी सोचा है कि दृष्टिहीन यात्री के लिए दुनिया कैसी होगी? इसी का जवाब खोजने के लिए मैं उत्तर भारत के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ की 10 दिनों की यात्रा पर निकला। यह मौका ब्रिटिश कंपनी ट्रैवलआइज ने दिया था, जो सामान्य लोगों को दृ​​​ष्टिहीनों के साथ सफर की पहल करती है। सूर्योदय के समय मैं ल्यूक के साथ ताजमहल में था। उसका हाथ मेरी बांह पर था और सफेद छड़ी से वह जमीन को टटोल रहा था। जैसे ही आगे बढ़े, पैरों के नीचे का अहसास बदल गया- खुरदरे बलुआ पत्थर से ठंडे, चिकने संगमरमर तक। मैंने उसका हाथ दीवारों पर रखा, जहां उसकी अंगुलियां नक्काशी व कीमती पत्थरों को महसूस कर रही थीं। ल्यूक ने 18 साल की उम्र में बीमारी के कारण दृष्टि खो दी थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा,‘मुझे कुछ बहुत भव्य और शानदार होने का अहसास हो रहा है।’ गुंबद के नीचे पर्यटकों की आवाजें मधुर गूंज में बदल गईं। ल्यूक ने सिर ऊपर उठाकर कहा,‘जैसे हम किसी बड़े स्पीकर के अंदर खड़े हों।’ उस पल मैंने भी आंखें बंद कीं और पहली बार उस शांति व गूंज को सुना, जिसे मैं अक्सर अनदेखा कर देता था। इस यात्रा का उद्देश्य दृश्य देखना नहीं, बल्कि ‘अनुभूति’ था। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में मेरा साथ डेनियल ने दिया। मसालों, डीजल की तेज गंध के बीच डेनियल ने बताया कि दृष्टिहीन आवाजों व हवा के बहाव से दुनिया का नक्शा बुनते हैं। जब एक इंद्रिय कम होती है, तो बाकी इंद्रियां उसकी भरपाई और तीव्रता से करने लगती हैं। यह अनुभव अद्भुत था, जहां अभाव ही दृष्टि बन गया। छोटी-छोटी चीजें शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं... सफर में मेरी अगली साथी सिएटल की कैंडी थीं। उन्हें नजारों से ज्यादा भारत को समझना पसंद था। मैंने उन्हें बताया कि सड़क किनारे नाई कैसे काम करते हैं, लोग फुटपाथ पर कैसे सोते हैं और दुकानों पर स्नैक्स कैसे सजे रहते हैं। इस दौरान मेरी अवलोकन क्षमता भी बढ़ी। मैंने घड़ी की दिशा से उन्हें थाली में रखे खाने की स्थिति समझाई। छोटी-छोटी चीजें अब शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं। रणथंभौर में बाघ नहीं दिखा, लेकिन कैंडी के लिए जंगल का अनुभव ही काफी था। बूंदी में आंखें बंद कर ऑटो की सवारी ने एहसास बदल दिया। इस पहल की शुरुआत अमर लतीफ ने की, जिन्होंने बताया- दृष्टिहीनों के लिए सफर किताब, और देखने वालों के लिए फिल्म जैसा होता है।

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जरूरत की खबर- गर्मियों में शरीर को कैसे रखें ठंडा:हीट स्ट्रोक से बचें, समर कूलिंग के 4 बेसिक रूल फॉलो करें, 9 गलतियां न करें

शरीर को हेल्दी फंक्शनिंग के लिए खास टेम्परेचर 37°C की जरूरत होती है। गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए पसीना निकालता है। लगातार पसीना आने पर पानी के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। टेम्परेचर बहुत ज्यादा होने पर शरीर के कूलिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। इससे थकान, चक्कर और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं होती है। कुछ बेसिक समर रूल्स फॉलो करके हम प्राकृतिक तरीके से बॉडी कूलिंग सिस्टम को सपोर्ट कर सकते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- बाहर का तापमान बढ़ना शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है? ऐसे में शरीर को भीतर से ठंडा रखना क्यों जरूरी है? जवाब- जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है या उमस बढ़ जाती है, तो शरीर का कूलिंग सिस्टम सही से काम नहीं कर पाता । इससे शरीर की हीट बाहर नहीं निकल पाती और बॉडी ओवरहीट होने लगती है। इससे शरीर को कई नुकसान होते हैं- यानी शरीर अपनी हीट को बाहर नहीं निकाल पाता और अंदर ही गर्म होता जाता है, जिससे पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है। इंटरनल मेडेसिन कंसल्टेंट डॉक्टर रोहित शर्मा ने बताया कि शरीर को भीतर से ठंडा रखना क्यों जरूरी है- सवाल- गर्मियों के मौसम में शरीर को भीतर से ठंडा रखने के प्राकृतिक तरीके क्या हैं? जवाब- इस मौसम में हाइड्रेशन, सही खानपान, लाइफस्टाइल और ड्रेसिंग हैबिट्स पर ध्यान देना जरूरी है। इन छोटे-छोटे बदलावों से शरीर का तापमान कंट्रोल में रहता है। सभी प्राकृतिक तरीकों के बारे में बात करते हैं- हाइड्रेशन इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस ग्राफिक में देखिए इसके लिए क्या करना चाहिए- फूड हैबिट्स गर्मियों में कौन-से फूड्स खाने चाहिए, ग्राफिक में देखिए- कूलिंग ड्रिंक्स ग्राफिक में देखिए क्या पीना चाहिए और क्या नहीं- लाइफस्टाइल ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करना चाहिए- ड्रेसिंग इस मौसम में कैसे कपड़े पहनने चाहिए, ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में किन लोगों को शरीर को ठंडा रखने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? जवाब- गर्मियों में कुछ लोगों को शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है, क्योंकि उन्हें हीट स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन का जोखिम ज्यादा होता है। जैसे- सवाल- कौन सी गलत आदतें शरीर की गर्मी बढ़ा देती हैं? जवाब- लाइफस्टाइल और खानपान से जुड़ी गलत आदतें शरीर के कूलिंग सिस्टम को कमजोर कर देती हैं। इन आदतों से डिहाइड्रेशन, थकान और ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है- सवाल- ऊपर शरीर को ठंडा रखने के जो प्राकृतिक तरीके बताए गए हैं, क्या उन्हें फॉलो करने से गर्मी से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क भी कम होता है? जवाब– हां, सही हाइड्रेशन, कूलिंग फूड्स, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और गर्मी से जुड़ी कई समस्याओं का जोखिम कम हो जाता है। गर्मियों में होने वाली समस्याएं और उनसे बचाव इस तरह समझें- हीट स्ट्रोक- शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। बचाव- तेज धूप से बचें और शरीर को ठंडा व हाइड्रेटेड रखें। हीट एक्जॉशन- ज्यादा पसीना, कमजोरी और चक्कर आते हैं। बचाव- समय-समय पर आराम करें और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें। डिहाइड्रेशन- शरीर में पानी की कमी हो जाती है। बचाव- दिनभर नियमित अंतराल पर पानी और फ्लूइड्स लेते रहें। हीट क्रैम्प्स- ज्यादा गर्मी और पसीने के वजह से मांसपेशियों में ऐंठन होती है। बचाव- नारियल पानी, छाछ या नमक-चीनी का घोल लें। सनबर्न- स्किन तेज धूप में जलकर लाल हो जाती है। बचाव- धूप में निकलते समय सनस्क्रीन और कवरिंग का इस्तेमाल करें। घमौरियां- पसीने से स्किन पर दाने और खुजली होती है। बचाव- ढीले कॉटन कपड़े पहनें और स्किन को सूखा रखें। फूड पॉइजनिंग- गर्मी के कारण बैक्टीरिया (जैसे स्टैफिलोकोकस, सलमोनेला, ई.कोलाई) तेजी से बढ़ते हैं और खाना जल्दी खराब हो जाता है। ऐसा खाना खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार आदि लक्षण होते हैं। बचाव- हमेशा ताजा और साफ खाना खाएं। लो ब्लड प्रेशर- ज्यादा पसीने से BP लो हो सकता है। बचाव- पानी और नमक का संतुलन बनाए रखें। चक्कर, थकान और कमजोरी- शरीर में पानी और एनर्जी की कमी से ये समस्या होती है। बचाव- फल, पानी और हल्का भोजन नियमित लेते रहें। मसल्स पेन- इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से मांसपेशियों में दर्द होता है। बचाव- पर्याप्त हाइड्रेशन और मिनरल्स लें। आंखों में जलन- धूप और लू के कारण आंखों में इरिटेशन होता है। बचाव- सनग्लासेस पहनें और आंखों को ठंडक दें। ……………………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मी में 5 कारणों से बढ़ता डिहाइड्रेशन:ये संकेत दिखें तो इग्नोर न करें, पूरी गर्मियां फॉलो करें 10 जरूरी नियम गर्मियों में पसीना ज्यादा आता है। इसलिए शरीर की पानी की जरूरत बढ़ जाती है। अगर पानी की ये अतिरिक्त जरूरत पूरी न की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी। इसका सीधा प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें…

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SRH vs CSK: अभिषेक ने ठोके लगातार 7 चौके-छक्के, कर दी सूर्यवंशी की बराबरी, फिर ले डूबी सैमसन की समझदारी

अभिषेक शर्मा पिछले मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पहली ही गेंद पर खाता खोले बिना आउट हो गए थे. मगर इस बार SRH के स्टार ओपनर ने इसकी कसर चेन्नई के गेंदबाजों की धुनाई करके पूरी की. Sat, 18 Apr 2026 20:38:37 +0530

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