समुद्र में अमेरिकी नौसेना की सख्त गश्त, ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू; कई जहाज लौटे
नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। ओमान की खाड़ी के संवेदनशील हालात पर अमेरिकी नौसेना सक्रिय गश्त में लगी हुई है। नाकेबंदी का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसका असर ये हुआ कि शुरुआती 48 घंटों में कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा।
यूएस सेंट्रल कमांड का आधिकारिक एक्स अकाउंट में बताया गया कि अमेरिकी नौसेना के जहाज ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे हैं, जबकि सेंटकॉम ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी को लागू करना जारी रखे हुए है। अमेरिकी सेनाएं वहां मौजूद हैं, सतर्क हैं और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं।
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी के पहले 48 घंटों के दौरान, कोई भी जहाज अमेरिकी सेनाओं को पार नहीं कर पाया है। इसके अलावा, 9 जहाजों ने अमेरिकी सेनाओं के निर्देश का पालन करते हुए वापस मुड़कर किसी ईरानी बंदरगाह या तटीय क्षेत्र की ओर लौट गए हैं।
यूएस सेंट्रल कमांड ने अरब सागर में उड़ान संचालन करते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन का एक वीडियो आधिकारिक एक्स अकाउंट में जारी करते हुए लिखा, हजारों अमेरिकी सैनिक, जिनमें अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के 5,000 नाविक और मरीन शामिल हैं। ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने के मिशन को अंजाम दे रहे हैं।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को ट्रुथ पर बड़ा बयान देते हुए होर्मुज स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोलने की बात कही।
ट्रुथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने शी जिनपिंग की दोस्ती, ईरान को हथियार न मुहैया कराने, स्मार्ट तरीकों और लड़ाई से बेहतर विकल्प की ओर इशारा किया।
चीन के साथ मिलकर काम करने का संकेत देते हुए कहा, चीन बहुत खुश है कि मैं होर्मुज स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहा हूं। मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूं—और दुनिया के लिए भी। ऐसी हालत फिर कभी नहीं होगी।
इसके बाद उन्होंने ईरान को चीन के राजीनामे और जिनपिंग के गले लगने की बात कही, कहा कि वे ईरान को हथियार न भेजने पर राजी हो गए हैं। जब मैं कुछ हफ्तों में वहां पहुंचूंगा तो राष्ट्रपति शी मुझे कसकर गले लगा लेंगे। हम साथ मिलकर स्मार्ट तरीके से और बहुत अच्छे से काम कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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अगले हफ्ते वाशिंगटन जाएगा भारतीय डेलिगेशन, टैरिफ और ट्रेड डील पर लगेगी मुहर?
वैश्विक व्यापारिक समीकरणों के बदलते दौर में भारत और अमेरिका अपने आर्थिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करने की तैयारी में हैं. सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह भारत का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल अमेरिका रवाना होगा. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं व्यापारिक बाधाओं को कम करने और आपसी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस जमीन तलाश रही हैं.
मुख्य एजेंडा, नया 'टैरिफ स्ट्रक्चर' और ट्रेड डील
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नया टैरिफ स्ट्रक्चर है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच आयात शुल्क को लेकर कई दौर की चर्चाएं हुई हैं. भारत चाहता है कि उसके उत्पादों, विशेषकर स्टील, एल्युमीनियम और कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिले और उन पर लगने वाले अतिरिक्त करों में कटौती की जाए.
वहीं अमेरिका की मांग है कि अपने डेयरी उत्पादों, मेडिकल उपकरणों और आईटी सेवाओं के लिए भारतीय बाजार में आसान राह की तलाश में है.
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती
यह प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी वाणिज्य विभाग और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेगा. इस चर्चा का उद्देश्य न केवल वर्तमान विवादों को सुलझाना है, बल्कि भविष्य के लिए एक दीर्घकालिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की नींव रखना भी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश एक साझा टैरिफ ढांचे पर सहमत हो जाते हैं, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार का ग्राफ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकता है.
ग्लोबल सप्लाई चेन और 'फ्रेंड-शोरिंग'
मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों (जैसे मध्य पूर्व का संकट और चीन के साथ व्यापारिक तनाव) के बीच, अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में देख रहा है. इस बैठक में 'फ्रेंड-शोरिंग' (दोस्त देशों के साथ व्यापार को सीमित करना) के तहत महत्वपूर्ण तकनीकों और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है.
भारत के लिए क्यों है यह दौरा खास?
2026 में भारत जिस तरह से एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, अमेरिका के साथ एक अनुकूल व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए दरवाजे खोलेगा. यह न केवल भारतीय उद्योगों को वैश्विक मंच प्रदान करेगा, बल्कि घरेलू स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा.
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