मेटा को भारतीय कानूनों का करना होगा पालन, केवल उनकी वैश्विक नीतियां पर्याप्त नहीं : सरकारी सूत्र
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। मेटा के प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों और नियमों का पालन करते हुए काम करना होगा और कंपनी के साथ हाल की बातचीत का मकसद यह पक्का करना था कि उसकी नीतियां और कंटेंट मॉडरेशन के तरीके देश के कानूनी ढांचे के मुताबिक हों, न कि सिर्फ कंपनी के ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुसार। यह बयान सरकारी सूत्रों ने रविवार को दिया।
सरकारी सूत्रों ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह कहना तथ्यों के हिसाब से गलत होगा कि केंद्र ने मेटा को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में पूरी तरह से बदलाव करने का निर्देश दिया है।
इसके बजाय, चल रही बातचीत का मकसद यह पक्का करना रहा है कि कंपनी की कंटेंट पॉलिसी, नियमों को लागू करने के तरीके और प्लेटफॉर्म गवर्नेंस भारतीय कानूनी जरूरतों के मुताबिक हों।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की एक मुख्य चिंता यह है कि देश के बाहर काम करने वाली टीमों को भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की कम समझ है।
अधिकारियों का कहना है कि कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े फैसलों को ज्यादा असरदार और सटीक बनाने के लिए मेटा को बेहतर स्थानीय जानकारी की जरूरत है, जिसमें भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक बारीकियों की बेहतर समझ शामिल है।
सरकार ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) पर भी कड़ा रुख अपनाया है और फिर से कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट के लिए कोई जगह नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि सीएसएएम का होना लागू नियमों का गंभीर उल्लंघन है और उम्मीद है कि मेटा ऐसे मटीरियल का पता लगाने और उसे हटाने के लिए ज्यादा मजबूत और सक्रिय सुरक्षा उपाय लागू करेगा।
अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत होगी।
बातचीत में डीपफेक कंटेंट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। सरकारी सूत्रों ने कहा कि अधिकृत या वेरिफाइड अकाउंट से पब्लिश किए गए कंटेंट को ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए गलती से डीपफेक नहीं माना जाना चाहिए।
ऐसे मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए, अधिकारियों ने ह्यूमन-इन-द-लूप रिव्यू प्रोसेस की वकालत की, ताकि यह पक्का किया जा सके कि कंटेंट को हटाने का फैसला लेने से पहले उसकी ठीक से जांच हो।
सरकार ने सिंथेटिक रूप से बनाए गए कंटेंट के बारे में भी चिंता जताई, जो डीपफेक के तौर पर पहचाने और हटाए जाने के बाद भी प्लेटफॉर्म पर दोबारा दिखाई देता है।
सूत्रों ने बताया कि मेटा से उन उपायों के बारे में बताने को कहा गया है जो वह ऐसे कंटेंट को हटाए जाने के बाद दोबारा आने और दोबारा शेयर होने से रोकने के लिए अपना रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस
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Anchor Investors कौन होते हैं? IPO में क्यों है इनकी अहम भूमिका?
क्या आपने कभी Share Market में निवेश किया है? अगर हां, तो आप जानते होंगे कि जब कोई कंपनी IPO (Initial Public Offering) लाती है, तो निवेशकों में उसके शेयर खरीदने को लेकर काफी उत्साह होता है. ऐसे में क्या आपने कभी IPO से जुड़ी खबरों में एंकर इन्वेस्टर्स (Anchor Investors) शब्द के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो यह आर्टिकल बताएगा कि एंकर इन्वेस्टर्स कौन होते हैं और IPO में उनकी भूमिका को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है.
Anchor Investors कौन होते हैं?
आसान शब्दों में कहें तो, एंकर निवेशक आम तौर पर बड़े पैमाने के निवेशक होते हैं. इनमें म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनियां, बैंक, पेंशन फंड और दूसरे बड़े निवेशक शामिल हो सकते हैं. IPO के पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने से पहले ही इन निवेशकों को शेयरों का एक हिस्सा अलॉट कर दिया जाता है. इसका मकसद IPO में बड़े और अनुभवी निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना होता है.
Anchor Investors को शेयर कब मिलते हैं?
जब कोई कंपनी IPO लाती है, तो आम जनता के लिए IPO खुलने से पहले एंकर इन्वेस्टर्स के लिए एक अलग बिडिंग प्रोसेस होता है. आम इन्वेस्टर्स के लिए IPO तभी खुलता है जब एंकर इन्वेस्टर्स को शेयर अलॉट कर दिए जाते हैं. इससे मार्केट को यह संकेत मिलता है कि बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने भी कंपनी में दिलचस्पी दिखाई है.
IPO में Anchor Investors क्यों महत्वपूर्ण होते हैं?
IPO में एंकर इन्वेस्टर्स की भागीदारी को एक अच्छा संकेत माना जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि एंकर इन्वेस्टर्स आमतौर पर बड़े और अनुभवी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स होते हैं, जो कंपनी और उसके बिजनेस को अच्छी तरह समझने और परखने के बाद ही निवेश करते हैं. नतीजतन, उनकी भागीदारी से कंपनी में दूसरे इन्वेस्टर्स का भरोसा बढ़ सकता है. हालांकि, किसी IPO को केवल एंकर इन्वेस्टर्स की मौजूदगी के आधार पर नहीं आंकना चाहिए. बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू, मुनाफा,कर्ज, वैल्यूएशन, ग्रोथ की संभावना और IPO के मकसद जैसे पहलुओं को भी परखना जरूरी है. इसके अलावा, कंपनी के DRHP और RHP में दी गई जानकारी को देखने-समझने के बाद निवेश का सही फैसला लेना आसान हो जाता है.
Anchor Investors से कंपनी को क्या फायदा होता है?
इसका मुख्य फायदा यह है कि एंकर इन्वेस्टर्स के ज़रिए, कंपनी IPO खुलने से पहले ही अपने कुछ शेयरों के लिए निवेश हासिल कर लेती है. साथ ही, इससे बाजार में IPO के प्रति इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी और भरोसा बढ़ता है और बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की भागीदारी भी बढ़ती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि एंकर इन्वेस्टर्स आम इन्वेस्टर्स से अलग होते हैं. जहां रिटेल इन्वेस्टर्स IPO खुलने के बाद शेयरों के लिए अप्लाई करते हैं, वहीं एंकर इन्वेस्टर्स को IPO खुलने से पहले ही शेयर हासिल करने का मौका मिल जाता है.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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