IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स की टीम ने अब तक अच्छा खेल दिखाया है. शुरुआती 4 मैचों में लगातार जीत दर्ज करने के बाद टीम को सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों हार का सामना करना पड़ा. मगर, एक हार मिलते ही रियान पराग की कप्तानी कटघरे में आ गई है. पूर्व भारतीय क्रिकेट एस श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए रियान के फैसलों पर सवाल खड़े किए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने तो ये तक कह दिया है कि वह दिखावे के लिए हैं. बता दें, रियान पराग ने IPL 2026 में अब तक 5 मैच खेले हैं, जिसमें 136.11 की स्ट्राइक रेट और 12.25 के निराशाजनक औसत से 49 रन बनाए हैं.
दिखावे के लिए है रियान पराग
भारत के पूर्व कप्तान क्रिस श्रीकांत ने राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग की आलोचना की और आईपीएल में उनके प्रदर्शन और काबिलियत पर सवाल उठाए हैं. श्रीकांत की यह टिप्पणी राजस्थान रॉयल्स की इस सीजन की पहली हार के बाद आई है.
एस श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "वह सिर्फ दिखावे के लिए वहां है. हमेशा की तरह, उन्होंने बल्ले से कुछ नहीं किया और मैच के बाद पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में भाषण दिया. वह सिर्फ दिखावे के लिए है और कुछ नहीं करता. वह जडेजा को एक ओवर भी नहीं फेंकता और फिर यह कहकर सफाई देता है कि बाएं हाथ का बल्लेबाज खेल रहा था. क्या ऐसा कोई नियम है कि बाएं हाथ का स्पिनर बाएं हाथ के बल्लेबाज को गेंदबाजी नहीं कर सकता? यह बेतुका है."
स्पिनर्स ने डुबाई लुटिया
एस श्रीकांत ने गेंदबाजी की भी आलोचना करते हुए बताया कि कैसे तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा और रवि बिश्नोई की संयुक्त गेंदबाजी ने जमकर रन लुटाए और प्रभावी रूप से मैच को हाथ से निकाल दिया. SRH के साथ खेले गए मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स को निराशाजनक तरीके से सीजन की पहली हार का सामना करना पड़ा था.
श्रीकांत ने कहा, "तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा और रवि बिश्नोई के बीच खेले गए 11 ओवरों में 142 रन बने. यहीं से मैच खत्म हो गया. संदीप शर्मा जहां भी गेंदबाजी कर रहे थे, बल्लेबाजों ने उनकी जमकर धुनाई की और देशपांडे पूरी तरह से नाकाम रहे. अचानक, रेलरोड को भी अपने गेंदबाजी संयोजन के बारे में सोचना शुरू करना होगा. अगर वे इसी तरह गेंदबाजी करते रहे, तो उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ेगा."
राजस्थान रॉयल्स प्वॉइंट्स टेबल में टॉप पर है काबिज
रियान पराग की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स की टीम आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रही है. IPL 2026 के प्वॉइंट्स टेबल में राजस्थान रॉयल्स की टीम नंबर-1 पर काबिज है. फ्रेंचाइजी ने अब तक 5 मैच खेले हैं, जिसमें लगातार 4 मैच जीते और फिर पांचवें मैच में हैदराबाद से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस तरह 8 अंक और +0.889 नेट रन रेट के साथ पहले पायदान पर बनी हुई है.
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संसद में पेश किए जाने वाले नए विधायी प्रस्तावों के तहत जम्मू-कश्मीर से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक बदलावों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रस्तावित परिसीमन विधेयक 2026, संघ शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 और संविधान के 131वें संशोधन विधेयक के माध्यम से न केवल निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की रूपरेखा तय की जा रही है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया जा रहा है।
परिसीमन विधेयक 2026 में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी प्रावधान के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर जब भी पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त होगा, तब चुनाव आयोग को वहां के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने का अधिकार होगा। यह व्यवस्था भारत के उस स्थायी रुख को मजबूत करती है कि पूरा जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है। हम आपको बता दें कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर विधानसभा की निर्वाचित सदस्य संख्या 90 है। हालांकि, इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की 24 सीटें शामिल नहीं हैं, जिन्हें रिक्त रखा गया है और कुल सदस्य संख्या की गणना में नहीं जोड़ा जाता। प्रस्तावित संशोधन के तहत इस स्थिति में बदलाव लाने की तैयारी की जा रही है।
संघ शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 के माध्यम से परिसीमन आयोग को यह अधिकार दिया जाएगा कि वह जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का पुनर्निर्धारण करे। यह भी स्पष्ट किया गया है कि संशोधित संख्या 114 सीटों से कम नहीं होगी। यह कदम जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में उस प्रावधान को समाप्त करता है, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों को परिसीमन प्रक्रिया से बाहर रखा गया था।
इस विधेयक में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। वर्तमान में उपराज्यपाल को विधानसभा में दो महिलाओं को नामित करने का अधिकार है, जिसे बढ़ाकर तीन करने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह वृद्धि तभी लागू होगी जब नए परिसीमन के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन पूरा हो जाएगा। विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में यह भी बताया गया है कि संघ शासित प्रदेश शासन अधिनियम 1963, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शासन अधिनियम 1991 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की वर्तमान व्यवस्थाएं जनसंख्या, परिसीमन और आरक्षण से जुड़े मौजूदा संवैधानिक ढांचे पर आधारित हैं। अब प्रस्तावित संशोधनों के तहत इन व्यवस्थाओं को नए संवैधानिक ढांचे के अनुरूप बनाया जा रहा है।
नए प्रावधानों के अनुसार, जनसंख्या की परिभाषा, सीटों का आवंटन और संसदीय तथा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन उस जनगणना के आधार पर किया जाएगा, जिसे संसद द्वारा निर्धारित किया जाएगा। साथ ही, परिसीमन का कार्य परिसीमन आयोग द्वारा ही किया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था इस संशोधित ढांचे के अनुरूप संचालित हो।
देखा जाये तो ये प्रस्तावित विधेयक जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक संरचना में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। इनसे न केवल प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत के संवैधानिक ढांचे को भी अधिक समन्वित और आधुनिक बनाया जा सकेगा।
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