MP Board Result 2026: 10वीं-12वीं रिजल्ट आज 11 बजे जारी, Direct Link से चेक करें अपना स्कोर
MP Board Results 2026: लाखों छात्रों का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है। एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आज सुबह 11 बजे जारी होगा। छात्र Direct Link के जरिए बिना किसी परेशानी के अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। छात्र ऑनलाइन, ऐप और SMS से भी तुरंत अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद कार्यक्रम में शामिल होकर परिणामों की घोषणा करेंगे।
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा विद्यार्थियों की सुविधा के लिए विभिन्न वेबसाइटों पर परिणाम देखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट मोबाइल ऐप, डिजिलॉकर के माध्यम से भी अपना परीक्षा परिणाम आसानी से देख सकेंगे।
इस बार 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे। 12वीं बोर्ड की परीक्षा में करीब 7 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। छात्रों के लिए 3856 परीक्षा केंद्र भी बनाए गए थे।
कैसे चेक करें MP Board Result 2026
कक्षा 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम विद्यार्थी और अभिभावक मोबाइल पर भी देख सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को Google Play Store पर जाकर MPBSE MOBILE App अथवा MP Mobile App Download करना होगा। फिर Know Your Result आप्शन का चयन कर विद्यार्थी को अपना अनुक्रमांक (Roll Number) और आवेदन क्रमांक (Application Number) डालकर (submit) करना होगा। इसके अलावा विद्यार्थी Digilocker के माध्यम से अपना परीक्षा परिणाम देख सकेंगे।
रिजल्ट चेक करने के लिए ये लिंक भी उपयोगी
10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम ओनलाइन देखने के लिए छात्र और उनके परिजन इन वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।
https://mpbse.mponline.gov.in
https://www.digilocker.gov.in/web/dashboard/issuers
mpresults.nic.in
इन वेबसाइट पर होम पेज पर 10वीं और 12वीं परीक्षा परिणाम के लिए अलग - अलग लिंक दी गई है। जिस कक्षा का रिजल्ट देखना हो उस लिंक पर क्लिक करके अपना रोल नंबर अप्लिकेशन फॉर्म नंबर डालें।
स्क्रीन पर रिजल्ट शो होगा और इस रिजल्ट को आप पीडीएफ के रूप डाउनलोड कर सकते हैं।
SMS से रिजल्ट कैसे देखें
एमपी बोर्ड की क्लास 10वीं और 12वीं का रिजल्ट आप बिना इन्टरनेट के भी देख सकते हैं। इसके लिए आपको मोबाईल नंबर के मेसेज बॉक्स में जाकर एक मेसेज टाइप करना होगा। अगर 10वीं का रिजल्ट देखना है तो 'MPBSE10' लिखकर अपना रोल नंबर टाइप करें और इसे 56263 पर भेज दें। इसी तरह 12वीं का रिजल्ट देखने के लिए 'MPBSE12' लिखें और अपना रोल नंबर डालकर 56263 पर भेज दें। इसके बाद आपका रिजल्ट आपके इनबॉक्स में भेज दिया जाएगा।
पिछले साल कैसा था 10वीं का रिजल्ट
साल 2025 में एमपी बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में सिंगरौली की प्रज्ञा जायसवाल ने टॉप किया था। उनके 500 में से 500 अंक आए थे। 2025 में 10वीं क्लास में 76.22 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए थे, जो 2024 की तुलना में 58.10 प्रतिशत से अधिक था।
12वीं में किसने किया था टॉप
12वीं कक्षा में साल 2025 का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 74.48 प्रतिशत था। सतना के प्रियाल द्विवेदी (मैथ - साइंस) ने 98.40 प्रतिशत लेकर पूरे स्टेट में टॉप किया था। इसके अलावा 2024 का उत्तीर्ण प्रतिशत 64.48%, 2023 का 55.28% और 2022 का 72.72% था।
टॉपर्स को क्या मिलेगा
हर साल की तरह इस साल भी टॉप करने वाले छात्रों के लिए एमपी सरकार अपना खजाना खोल देगी। 12वीं टॉपर्स को 25 हजार रुपए और स्कूटी दी जाएगी। सीएम द्वारा टॉपर्स का भी सम्मान किया जाएगा।
बोर्ड परीक्षा में पासिंग मार्क्स कितने
10वीं हो या 12वीं दोनों की कशाओं में पासिंग मार्क्स 33 प्रतिशत है। छात्रों को परीक्षा पास करने के लिए इतने नंबर तो लाने ही होंगे। अगर कोई छात्र दो से अधिक विषयों में 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल रहता है तो उसे फेल माना जाएगा। ऐसे छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।
सबरीमाला केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:महिलाओं की एंट्री के लिए दलीलें रखी जाएंगी; विरोध में सरकार, कहा- कई देवी मंदिरों में पुरुष बैन
केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धर्मस्थलों पर भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चौथे दिन सुनवाई होगी। 14 अप्रैल से 16 अप्रैल के दौरान सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री के समर्थन में दलीलें रखी जाएंगी। इससे पहले 7 से 9 अप्रैल तक सुनवाई के दौरान महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने कहा था कि मंदिरों और मठों में एंट्री का अधिकार सभी लोगों को होना चाहिए। किसी एक संप्रदाय को बाहर रखना हिंदू धर्म पर नकारात्मक असर डालेगा। इससे समाज बंटेगा। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए बैन हटा दिया। इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं के आधार पर 7 महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न तय किए गए हैं, जिन पर अब बहस हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में 3 सुनवाई में अब तक क्या हुआ 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर 2018 का फैसला गलत तरीके से लिया गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अपमान करना नहीं है। भारत में उन्हें पूजा जाता है। हमें इस बात पर ऐतराज है कि मंदिर की इस परंपरा को ‘अस्पृश्यता’ (छुआछूत या अनुच्छेद 17) कहा गया। छुआछूत जाति के आधार पर होती थी, यह मामला उससे अलग है। जैसे हम मस्जिद, मजार या गुरुद्वारे में जाते समय सिर ढंकते हैं, वैसे ही सबरीमाला की भी एक अनोखी परंपरा है, जिसका सम्मान होना चाहिए। ये धार्मिक आस्था और संप्रदाय की स्वायत्तता का मुद्दा है, जो न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है। पूरी खबर पढ़ें… 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर 7 सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस 'धार्मिक संप्रदाय या समूह' की किसी प्रथा को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दे सकता है। पूरी खबर पढ़ें… 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र हुआ। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों में सिर्फ खास समुदाय की एंट्री और बाहरी लोगों की मनाही से समाज बंटेगा। यह हिंदु धर्म के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मान लीजिए (सबरीमाला केस को छोड़कर), अगर यह कहा जाए कि सिर्फ गौड़ सारस्वत लोग ही एक मंदिर में आएं या कांची मठ के लोग सिर्फ कांची ही जाएं, दूसरे मठ (जैसे शृंगेरी) न जाएं तो यह ठीक नहीं होगा। बल्कि जितने ज्यादा लोग अलग-अलग मंदिरों और मठों में जाएंगे, उतना ही धर्म मजबूत बनेगा। पूरी खबर पढ़ें… सबरीमाला मामले पर सुनवाई करने वाले 9 जजों के नाम सबरीमाला सहित 5 मामले, जिन पर SC फैसला करेगा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं। दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: एडवोकेट सुनीता तिवारी ने 2017 में इसके खिलाफ याचिका दायर की और कहा कि यह प्रथा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है और यह नाबालिग बच्चियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है?
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