दक्षिण कोरिया में भीषण गर्मी ने बिगाड़ा रसोई का बजट, 152 प्रतिशत बढ़े पालक के दाम
South Korea Extreme Heat: दक्षिण कोरिया में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब खाद्य सामग्रियों की कीमतों पर भी पड़ने लगा है. गर्म मौसम के कारण सब्जियों, मछलियों और पशुधन की आपूर्ति घटी है, जिससे कई कृषि उत्पादों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं. योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि कोरिया एग्रो-फिशरीज एंड फूड ट्रेड कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक एक महीने में 100 ग्राम पालक की खुदरा कीमत में 152.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसी अवधि में 10 खीरे की कीमत 54.8 प्रतिशत और 100 ग्राम हरी लेट्यूस की कीमत 41.7 प्रतिशत बढ़ गई.
मछली पालन क्षेत्र पर पड़ रहा भीषण गर्मी का असर
सरकार ने कीमतों में इस उछाल के लिए लंबे समय से जारी गर्मी को प्रमुख कारण बताया है. कृषि मंत्रालय के अनुसार, पालक, खीरा और तोरी जैसी सब्जियां अपेक्षाकृत ठंडे तापमान में बेहतर उगती हैं और गर्मियों में तापमान बढ़ने तथा आपूर्ति घटने के साथ इनके दाम तेजी से बढ़ सकते हैं. भीषण गर्मी का असर पशुधन और मछली पालन क्षेत्र पर भी पड़ा है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार तक गर्मी के कारण 9,01,602 पशुओं की मौत हो चुकी थी. इनमें करीब 95 प्रतिशत मुर्गियां और बत्तख जैसे पक्षी थे.
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पानी के कारण 8,64,497 मछलियों की मौत
समुद्र के बढ़ते तापमान से एक्वा फार्म भी प्रभावित हुए हैं. शुक्रवार तक गर्म पानी के कारण 8,64,497 मछलियों के मरने की सूचना मिली. इसका असर मछलियों की कीमतों पर भी पड़ा है। 27 जुलाई से 1 अगस्त के बीच फ्लाउंडर की औसत नीलामी कीमत 22,300 वॉन (करीब 15.84 डॉलर) प्रति किलोग्राम रही, जो एक सप्ताह पहले की तुलना में 2.29 प्रतिशत अधिक थी. पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसकी कीमत में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र का तापमान जमीन की तुलना में धीरे-धीरे कम होता है. इसलिए गर्मी का पूरा असर आने वाले महीनों में दिखाई दे सकता है.
सितंबर के महीने में देखने को मिलता है गर्म पानी का ज्यादा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर में गर्म पानी का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है, जिससे फ्लाउंडर और रॉकफिश जैसी मछलियों की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है. गर्मी से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच दक्षिण कोरियाई सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है. इनमें ब्रॉयलर मुर्गियों के आयात में बढ़ोतरी और डिस्काउंट स्टोरों में मछली उत्पादों पर विशेष प्रचार अभियान शामिल हैं. दक्षिण कोरिया में पिछले सप्ताह भीषण गर्मी के दौरान दिन के समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. हालांकि, रविवार को गर्मी में कुछ कमी आने का अनुमान है और अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.
INPUT-IANS
भारतीय कार इंडस्ट्री का आकार वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट्स तक पहुंचने की उम्मीद : आरसी भार्गव
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय कार इंडस्ट्री का आकार वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़कर 61 से 63 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकता है। इस दौरान छोटी गाड़ियों की बाजार हिस्सेदारी बीते पांच वर्षों में हुई वृद्धि के मुकाबले तेजी से बढ़ेगी। यह बयान मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने रविवार को दिया।
भार्गव ने कहा कि जीएसटी सुधारों ने न सिर्फ ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई सेक्टर को भी नई रफ्तार दी है और हम अगले पांच सालों में कार मार्केट की संभावित ग्रोथ का जितना हो सके, उतना सटीक अनुमान लगाने की प्रक्रिया में हैं।
मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी एनुअल इंटीग्रेटेड रिपोर्ट 2025-26 जारी की है। इसमें बताया गया है कि कैसे छोटी कारों के सेगमेंट में वापसी, कंपनी के एसयूवी पोर्टफोलियो का मजबूत होना, मल्टी-पावरट्रेन स्ट्रैटेजी, क्षमता बढ़ाने पर फोकस और जबरदस्त निर्यात प्रदर्शन ने ग्रोथ के लिए नई रफ्तार पैदा की है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24.22 लाख गाड़ियों की अब तक की सबसे ज्यादा सालाना बिक्री और 4.47 लाख गाड़ियों के निर्यात का रिकॉर्ड बनाया।
भार्गव के बयान के अनुसार, लगातार तीसरे साल 20 लाख गाड़ियों की बिक्री का आंकड़ा छूने के बाद, उम्मीद से पहले ही गाड़ियों की बिक्री का अगला दस लाख का माइलस्टोन हासिल करने को लेकर आशावादी है।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, हिसाशी ताकेउची ने कहा, हमने अपनी क्षमता बढ़ाने की योजनाओं में तेजी लाई। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान, हमने 5,00,000 यूनिट की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी।
ताकेउची ने बताया, ग्राहकों की उम्मीदें तेजी से बदल रही हैं। कंपनी अपने एसयूवी पोर्टफोलियो को और मजबूत करने के लिए अगले 5 से 6 सालों में 7 एसयूवी लॉन्च करने की योजना बना रही है।
जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के पास इस सफर में सार्थक योगदान देने की जिम्मेदारी और मौका दोनों हैं।
उन्होंने कहा, मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, रोज़गार पैदा करने, स्किल डेवलपमेंट और सस्टेनेबल मोबिलिटी के जरिए मारुति सुजुकी भारत की आकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। गाड़ियों की बिक्री का अगला दस लाख का आंकड़ा महज संख्या का माइलस्टोन नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा है।
--आईएएनएस
एबीएस
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