CIBIL Score 800 के पार ले जाने का जादुई मंत्र, बैंक खुद चलकर देंगे आपको सस्ता लोन
CIBIL Score: आज के दौर में अगर आप घर खरीदने, गाड़ी लेने या अपना व्यापार बढ़ाने के लिए बैंक से मदद की उम्मीद रखते हैं, तो सिर्फ कागजात पूरे होना काफी नहीं है. बैंक के पास जाते ही सबसे पहले आपके व्यक्तित्व से पहले आपके क्रेडिट स्कोर की जांच की जाती है. यह तीन अंकों की एक संख्या होती है जो यह बताती है कि आप बीते समय में पैसों के मामले में कितने ईमानदार और अनुशासित रहे हैं. अगर आपका सिबिल स्कोर अच्छा है, तो बैंक आपके स्वागत के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन अगर यह खराब है, तो लाख कोशिशों के बाद भी लोन मिलना मुश्किल हो जाता है.
क्या होता है क्रेडिट स्कोर?
क्रेडिट स्कोर दरअसल आपकी वित्तीय कुंडली है. भारत में सिबिल जैसी संस्थाएं आपकी बैंकिंग गतिविधियों के आधार पर 300 से 900 के बीच एक स्कोर तय करती हैं. जब भी आप कोई छोटा या बड़ा लोन लेते हैं या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी जानकारी इन ब्यूरो के पास जाती है. यदि आप समय पर भुगतान करते हैं, तो आपका स्कोर बढ़ता है. आमतौर पर 750 से ऊपर के स्कोर को बहुत अच्छा माना जाता है. 600 से कम स्कोर वालों को बैंक जोखिम भरा ग्राहक मानते हैं और उन्हें कर्ज देने से कतराते हैं. वहीं 800 से ज्यादा का स्कोर आपको बैंक का सबसे खास और पसंदीदा ग्राहक बना देता है.
800 से अधिक स्कोर के बड़े फायदे
अगर आपने अपना क्रेडिट स्कोर 800 के पार पहुंचा दिया है, तो आप बाजार में मोलभाव करने की स्थिति में आ जाते हैं. बैंक आपको कम ब्याज दरों पर लोन देने का प्रस्ताव देते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि आपका पैसा डूबने का खतरा न के बराबर है. इसके अलावा, ऐसे ग्राहकों का लोन बहुत जल्दी अप्रूव हो जाता है और उन्हें कागजी कार्रवाई में भी ज्यादा समय नहीं गंवाना पड़ता. इतना ही नहीं, हाई क्रेडिट स्कोर वाले लोग ज्यादा बड़ी रकम का लोन भी आसानी से हासिल कर लेते हैं और उन्हें अपनी पसंद के अनुसार लोन चुकाने की अवधि चुनने की आजादी भी मिलती है.
समय पर भुगतान है सबसे बड़ा हथियार
क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाने का सबसे पहला और बुनियादी नियम है समय पर भुगतान करना. आपकी हर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान ड्यू डेट से पहले होना चाहिए. अगर आप एक दिन की भी देरी करते हैं, तो आपकी रिपोर्ट में निगेटिव मार्क लग जाता है. बैंक इसे आपकी लापरवाही मानता है और इससे आपका स्कोर तेजी से नीचे गिरता है. इसलिए हमेशा अपने बिलों के लिए ऑटो-पे का विकल्प चुनना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है ताकि भूलने की गुंजाइश ही न रहे.
क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल और लिमिट का ध्यान
बहुत से लोग सोचते हैं कि क्रेडिट कार्ड की पूरी लिमिट इस्तेमाल करना अच्छी बात है, लेकिन हकीकत इसके उलट है. वित्तीय जानकारों का मानना है कि आपको अपनी कुल लिमिट का केवल 30 प्रतिशत ही खर्च करना चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर आपके कार्ड की लिमिट एक लाख रुपये है, तो कोशिश करें कि आपका खर्च तीस हजार से ऊपर न जाए. इसे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो कहा जाता है. अगर आप बार-बार पूरी लिमिट खत्म करते हैं, तो बैंक को लगता है कि आप पूरी तरह से कर्ज पर निर्भर हैं, जिससे आपकी साख पर बुरा असर पड़ता है.
पुराने खातों की कितनी अहमियत?
अक्सर लोग नया क्रेडिट कार्ड मिलते ही पुराना कार्ड बंद कर देते हैं, जो एक बड़ी गलती है. आपके पुराने क्रेडिट कार्ड आपकी लंबी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाते हैं. जितना पुराना आपका खाता होगा, बैंक का भरोसा आप पर उतना ही गहरा होगा. इसके साथ ही, बार-बार अलग-अलग बैंकों में लोन या कार्ड के लिए आवेदन करने से बचें. जब आप बार-बार अप्लाई करते हैं, तो बैंक हर बार आपकी रिपोर्ट चेक करते हैं, जिसे 'हार्ड इंक्वायरी' कहा जाता है. ज्यादा इंक्वायरी होने से आपका स्कोर कम हो सकता है. समय-समय पर अपनी रिपोर्ट खुद चेक करते रहें ताकि किसी भी तकनीकी गलती को सुधारकर आप अपना स्कोर बरकरार रख सकें.
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ट्रंप की घेराबंदी से मिडिल ईस्ट में हड़कंप, सऊदी अरब ने दी चेतावनी
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने मिडिल ईस्ट के तेल और गैस उत्पादक देशों के बीच सालों से बने तालमेल को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. अमेरिका के करीबी दोस्त सऊदी अरब को अब यह चिंता सता रही है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की बंदरगाहों को ब्लॉक करने का फैसला हालात को और भी ज्यादा बिगाड़ सकता है. सऊदी अरब को डर है कि अगर ईरान पर दबाव बढ़ा, तो वह जवाबी कार्रवाई में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को बंद कर सकता है.
सऊदी अरब ने अमेरिका से की बातचीत की अपील
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर दबाव बना रहा है कि वे ईरान की घेराबंदी को खत्म करें और बातचीत के रास्ते पर वापस लौटें. अरब अधिकारियों का कहना है कि रियाद को इस बात का डर है कि ट्रंप के इस कदम से तेहरान भड़क सकता है और वह दूसरे जरूरी शिपिंग रूट्स को भी निशाना बना सकता है. अमेरिका का मकसद ईरान की पहले से खराब इकोनॉमी पर और दबाव डालना है, लेकिन इसका असर अब पड़ोसी देशों पर भी दिखने लगा है.
रेड सी और बाब अल-मंडेब पर मंडराया खतरा
सऊदी अरब ने अमेरिका को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि ईरान जवाबी कार्रवाई के तौर पर 'बाब अल-मंडेब' को बंद कर सकता है. यह रेड सी का वह रास्ता है जो सऊदी अरब के बचे हुए तेल एक्सपोर्ट के लिए बहुत जरूरी है. पिछले छह हफ्तों से चल रही जंग में ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह न सिर्फ समुद्री रास्तों को सील कर सकता है, बल्कि क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर भी हमला करने की ताकत रखता है. इससे खाड़ी देशों की लंबी अवधि की तेल और गैस की स्ट्रैटेजी पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
हूतियों के जरिए दबाव बना रहा है ईरान
सऊदी अरब ने बड़ी मुश्किल से अपने तेल एक्सपोर्ट को दोबारा सात मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाया था, लेकिन अब इस पर फिर से संकट है. बाब अल-मंडेब के पास के तटीय इलाके पर ईरान के सहयोगी हूतियों का कब्जा है. हूतियों ने गाजा जंग के दौरान भी इस रास्ते को काफी प्रभावित किया था. अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि ईरान हूतियों पर इस बात का दबाव बना रहा है कि वे फिर से इस समुद्री रास्ते को बंद कर दें. एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि अगर ईरान चाहेगा, तो हूती इस काम को अंजाम देने की पूरी क्षमता रखते हैं.
ईरान की सीधी धमकी और इकोनॉमी पर असर
ईरान की न्यूज एजेंसी तसनीम ने भी यह साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी जारी रखी, तो वह रेड सी के गेटवे को बंद कर सकता है. ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर विलायती ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनके लिए बाब अल-मंडेब वैसा ही है जैसा हॉरमुज. अगर अमेरिका ने गलती की, तो ग्लोबल एनर्जी और ट्रेड का फ्लो एक इशारे पर रुक सकता है. ईरान की सेना ने यह भी कहा है कि अगर उनके पोर्ट सुरक्षित नहीं हैं, तो खाड़ी का कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा.
ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में उछाल
इस युद्ध ने यह दिखा दिया है कि मिडिल ईस्ट का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर कितना कमजोर है. हॉरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 पर्सेंट तेल और एलएनजी गुजरता है. ईरान की नाकेबंदी की वजह से करीब 13 मिलियन बैरल प्रतिदिन का तेल एक्सपोर्ट रुक गया है. इसकी वजह से इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि वे खाड़ी के सहयोगियों के संपर्क में हैं और ट्रंप चाहते हैं कि हॉरमुज का रास्ता खुला रहे, ताकि ऊर्जा की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे.
खाड़ी देशों के बीच बढ़ता तनाव
इस जंग ने ईरान और उसके पड़ोसी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन के बीच के रिश्तों को पूरी तरह से बदल दिया है. ये देश पहले ईरान के साथ सीधा टकराव टालते थे क्योंकि उन्हें पता था कि युद्ध से उनकी इकोनॉमी बर्बाद हो जाएगी. लेकिन अब वह आपसी समझ पूरी तरह खत्म हो चुकी है. पहली बार इतिहास में ईरान ने हॉरमुज के रास्ते को बंद किया है, जिसने ग्लोबल इकोनॉमी को बड़ा झटका दिया है. खाड़ी देश अब इस जंग को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि युद्ध के बाद हॉरमुज पर ईरान का एकतरफा कंट्रोल बना रहे. इसी वजह से अब बातचीत शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं.
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