इजराइल की पुलिस और सेना ने कूड़ा उठाने वाले जिस ट्रक को घेर रखा है वह दुनिया को तो चौंका ही देगा लेकिन भारत को हिला देगा क्योंकि इस ट्रक में जो मिला है उसे रोका ना गया तो इजराइल और भारत दोनों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। पहली नजर में यह कूड़ा उठाने वाला ट्रक ही लग रहा है। आपको सबसे पहले बताते हैं कि इस ट्रक में क्या मिला है। दरअसल इजराइल के सुरक्षा बलों ने कूड़ा उठाने वाले इस ट्रक को रूटीन चेकिंग के दौरान सामरिया क्रॉसिंग पर रोका। सामरिया क्रॉसिंग इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चौकी है जो उत्तरी वेस्ट बैंक क्षेत्र में स्थित है। वेस्ट बैंक गाज़ा से भी पेचीदा जगह है। यह इलाका तीन हिस्सों में बटा है। एरिया ए, एरिया बी और एरिया सी। एरिया ए और बी दोनों में फिलिस्तीनी रहते हैं। यह वेस्ट बैंक का 40 फ़ीसदी हिस्सा है। एरिया ए की सुरक्षा पूरी तरह से फिलिस्तीनी अथॉरिटी के हाथ में है। जबकि एरिया बी की निगरानी फिलिस्तीनी और इजरायली अथॉरिटीज मिलकर करती हैं।
इसके अलावा एरिया सी पूरी तरह इजराइल का है। एरिया सी वेस्ट बैंक का 60 फ़ीसदी हिस्सा है। यह बताना इसलिए जरूरी था क्योंकि फिलिस्तीनी बार-बार अपने इलाके छोड़कर इजराइल में घुसने की कोशिश करते हैं। यह घुसपैठ ज्यादातर सामरिया क्रॉसिंग से ही होती है। यहीं पर यह ट्रक पकड़ा गया है। इस कूड़ा उठाने वाले ट्रक को खोला गया तो इसमें 68 फिलिस्तीनी निकले जो इजराइल में बस घुसने ही वाले थे। अगर यह फिलिस्तीनी इजराइल के इलाकों में घुस जाते तो बहुत बड़ी घटना को अंजाम दे सकते थे। देखिए कैसे 68 फिलिस्तीनी इस ट्रक में भरे पड़े हैं। कई इजराइलियों का कहना है कि कूड़ा ट्रक के ऊपर नहीं बल्कि ट्रक के अंदर छिपा था।
बहरहाल सामरिया क्रॉसिंग पर जो हुआ है वह भारत के लिए क्यों खतरा है। दरअसल इसी तरह से भारत में भी बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए घुसते हैं। लेकिन यहां पर भारत की स्थिति इजराइल से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि बांग्लादेशी और रोहिंग्या भारत में एक वोट बैंक बन जाते हैं। उन्हें राजनीतिक हितों के लिए पाला जाता है। जरूरत पड़ने पर इनसे पत्थरबाजी कराई जाती है। फर्जी कागज बनाकर यह भारत का ही हिस्सा बन जाते हैं। मूल आबादी को भागने पर मजबूर कर देते हैं। इलाके की पूरी डेमोग्राफी बदल देते हैं। पश्चिम बंगाल और असम में ऐसे कई इलाके हैं जो बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की वजह से पूरी तरह से मुस्लिम मेजॉरिटी इलाके बन गए हैं।
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Agriculture News : अलवर जिले के किसान अब खेती में पारंपरिक तरीकों की ओर लौटते नजर आ रहे हैं. बढ़ती लागत और रासायनिक खाद के कम प्रभाव के बीच किसान देसी और ऑर्गेनिक विकल्प अपना रहे हैं. खास बात यह है कि अब बकरी की मिंगनी से तैयार खाद खेतों में डाली जा रही है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है. खैरथल क्षेत्र के किसान सोनू जैसे कई किसान इस तरीके को अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं. उद्यान विभाग के अनुसार, बकरी की मिंगनी में मौजूद पोषक तत्व और प्राकृतिक गुण मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ फसलों को रोगों से भी बचाते हैं. यही वजह है कि अब किसान रासायनिक खाद से दूरी बनाकर देसी खाद को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे खेती ज्यादा टिकाऊ और मुनाफेदार बन रही है.
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