इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होंगे ट्रंप: रिपोर्ट
यरूशलम, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायली मीडिया ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने के लिए इजरायल नहीं जाएंगे।
इजरायली न्यूज मीडिया आउटलेट वाईनेट ने बताया कि ट्रंप स्वतंत्रता दिवस पर न तो इजरायल आएंगे और न ही इजरायल पुरस्कार समारोह में ऑनलाइन शामिल होंगे।
दिसंबर में, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की थी कि दशकों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए, देश ट्रंप को इजरायल पुरस्कार से सम्मानित करेगा – जो देश का सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान है।
29 दिसंबर को फ्लोरिडा में एक न्यूज कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ खड़े होकर नेतन्याहू ने बड़ा ऐलान किया था। कहा, हमने एक परंपरा को तोड़ने, या एक नई परंपरा बनाने का फैसला किया है, और वह है इजरायल पुरस्कार देना; जो हमने अपने लगभग 80 साल के इतिहास में कभी किसी गैर-इजरायली को नहीं दिया है, और इस साल हम इसे राष्ट्रपति ट्रंप को देने जा रहे हैं।
ट्रंप को यह पुरस्कार इजरायल की उनकी अगली यात्रा के दौरान दिया जाना तय है।
वाईनेट ने मंगलवार को बताया कि इस कार्यक्रम में गायिका नोआ किरेल की भागीदारी भी टाल दी गई है, उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के सम्मान में गाना था, और संभवतः ट्रंप की पोतियां भी उनके साथ प्रस्तुति देने वाली थीं।
वाईनेट ने बताया, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा नहीं की है कि ट्रंप इजरायल नहीं आएंगे, लेकिन यरुशलम पहले ही यह समझ चुका है कि ईरान के साथ संघर्ष विराम की समय-सीमा और उसके 21 अप्रैल को समाप्त होने को देखते हुए, उनके आने की संभावना लगभग शून्य है, क्योंकि यह समारोह 22 अप्रैल को होना है। इजरायल पुरस्कार समारोह के दौरान, वीडियो में ट्रंप की जीत का जिक्र होगा, लेकिन जैसा कि बताया गया है, पुरस्कार देने का कार्यक्रम एक अलग समारोह के लिए टाल दिया जाएगा, जो बाद में जब वे इजरायल आएंगे, तब उनके सम्मान में आयोजित किया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि, हालांकि, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिले इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लेंगे, क्योंकि उनके आगमन पर सहमति ईरान के साथ संघर्ष विराम से पहले ही बन गई थी, और उम्मीद है कि मिले 18 अप्रैल को इजरायल पहुंचेंगे।
--आईएएनएस
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"लाठी नहीं, मिर्ची पाउडर ले चलो'...," नोएडा में उग्र प्रदर्शन के बीच वायरल हो रहा है इंस्टाग्राम चैट
देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में हिंसक प्रदर्शन का आज दूसरा दिन है. मंगलवार को भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में श्रमिकों ने जमकर बवाल काटा और तोड़फोड़ की. इस बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट वायरल हुआ है जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है. इस वायरल पोस्ट में एक इंस्टाग्राम चैट का स्क्रीनशॉट है, जिसमें श्रमिक आपस में बातचीत कर रहे हैं. इस चैट में प्रदर्शन को उग्र बनाने के लिए एक खौफनाक प्लानिंग की गई है.
मिर्ची पाउडर वाली वायरल चैट का सच
सोशल मीडिया पर जो चैट वायरल हो रही है, उसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि प्रदर्शन के दौरान लाठी-डंडा ले जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि ज्यादा से ज्यादा मात्रा में मिर्ची पाउडर साथ रखें. चैट में लिखा है, "भाई लाठी उठी कुछ नहीं मिर्च पाउडर ले चलो बस बात खत्म. सब भाईयों-बहनों से अपील है कि मिर्ची पाउडर ले चले ज्यादा से ज्यादा संख्या में." इतना ही नहीं, इस चैट के साथ दो ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रहे हैं. इन क्लिप्स से अंदाजा लगाया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी किसी बड़ी हिंसा की तैयारी में हैं. चैट में यह भी साफ किया गया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी.
पुलिस कमिश्नर का बयान और सुरक्षा के इंतजाम
इस वायरल पोस्ट के सामने आने के बाद नोएडा पुलिस एक्टिव हो गई है और मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि सोमवार को नोएडा के करीब 83 अलग-अलग लोकेशंस पर लगभग 42 हजार श्रमिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे. पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, हालात को काबू में करने के लिए सिर्फ दो जगहों पर ही पुलिस बल का इस्तेमाल करना पड़ा. फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वायरल चैट में कितनी सच्चाई है और इसे किसने सर्कुलेट किया है.
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शांतिपूर्ण आंदोलन से हिंसा तक का सफर
बता दें कि पिछले कुछ दिनों से नोएडा में श्रमिक अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन 13 अप्रैल को यह आंदोलन अचानक हिंसक हो गया. उग्र भीड़ ने नोएडा के कई हिस्सों में जमकर तांडव मचाया और इस दौरान कवर कर रहे कई पत्रकारों को भी अपना निशाना बनाया. भीड़ की हिंसा को देखते हुए पूरे इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है और संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जा रही है.
क्या हैं श्रमिकों की मेन डिमांड्स?
श्रमिकों के इस उग्र प्रदर्शन के पीछे उनकी कुछ बड़ी मांगें जुड़ी हुई हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मिनिमम सैलरी बढ़ाकर 26 हजार रुपये प्रति महीना की जाए. इसके अलावा उनकी डिमांड है कि अगर वे कंपनी में ओवर टाइम करते हैं, तो उन्हें उसकी दोगुनी पेमेंट मिलनी चाहिए. श्रमिकों ने यह भी मांग रखी है कि उन्हें हफ्ते में एक दिन का विकली ऑफ यानी छुट्टी दी जाए और उनकी सैलरी सीधे बैंक अकाउंट में भेजी जाए। इन मांगों को लेकर श्रमिक अब पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.
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