क्या कोई आर्मी चीफ दुनिया की ताकतवर महिलाओं को शादी के प्रस्ताव भेज सकता है और फिर किसी दूसरे देश से सबसे खूबसूरत दुल्हन की मांग कर सकता है? यह सुनने में भले ही अजीब सा लगे लेकिन यह कहानी मोहोजी कानेगाबा की जो अपने बयानों के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहते हैं। बता दें हाल ही में उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को शादी का प्रपोजल भेजा और इसके बाद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मिलानिया ट्रंप को भी प्रपोज कर दिया था। यह घटनाएं ही काफी चर्चा में रही थी और इसके बाद उन्होंने कहा है कि उसने सभी को चौंका कर रख दिया है। मोहोजी कानेगाबा ने तुर्की से मांग की है कि उन्हें $ बिलियन डॉलर के साथ सबसे सुंदर तुर्की लड़की शादी करनी है। यह बयान ना केवल असामान्य था बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी ज्यादा प्रतिक्रियाएं सामने आ चुकी है। और अब सवाल यह उठता है कि उन्होंने खासतौर पर तुर्की की दुल्हन की मांग ही क्यों की है?
इसका कोई आधिकारिक कारण तो नहीं है लेकिन कुछ संभावित वजह समझ आती हैं। दरअसल तुर्की की महिलाएं अपनी खूबसूरती, स्टाइल और व्यक्तित्व के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं। तुर्की की टीवी शो और फिल्मों ने भी इस छवि को मजबूत कर दिया है। संभव है कि इसी वैश्विक छवि के कारण उन्होंने तुर्की का जिक्र किया हो। इसके अलावा कई विश्लेषक इसे एक तरह का पब्लिसिटी स्टंट भी कह सकते हैं जिससे वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बने रहना चाहते हैं। अगर उनके पुराने बयानों पर नजर डालते हैं तो यह पहली बार नहीं है कि जब उन्होंने इसी तरह की बातें की हो। मुहूजी पहले भी सोशल मीडिया पर महिलाओं को लेकर काफी तौर पर खुले तौर पर अपनी पसंद और क्रश जाहिर कर चुके हैं। दरअसल जॉर्जिया मेलोनी को लेकर उनका शादी का प्रस्ताव और मिलानिया ट्रंप को प्रपोज करने की इसी पैटर्न का हिस्सा माना जा रहा है। इस एक आर्मी चीफ के पद पर रहते हुए इस तरह के बयान देना आमतौर पर असामान्य और विवाद होता है। लेकिन उनके इन बयानों पर दुनिया भर में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को भी मिल रही हैं। कुछ लोग इसे मजाक या व्यक्तिगत शैली मानते हैं। जबकि कई इसे गैर पेशेवर और कूटनीतिक दृष्टि से अनुचित मान रहे हैं।
यहां तक की इस तरह के बयानों से टर्की और युगांडा के संबंधों पर भी सवाल उठने लगे हैं। और पूरी घटना को देखें तो यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि एक पैटर्न बन चुका है। पहले एक प्रधानमंत्री को शादी का प्रस्ताव, फिर एक पूर्व फर्स्ट लेडी को प्रपोज करना और अब एक देश से सबसे खूबसूरत दुल्हन मांगना। यह दिखाता है कि मोहूजी काइनरगाबा अपने बयानों से लगातार सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं और अब देखना यह दिलचस्प होगा कि उनका अगला बयान किस दिशा में जाता है।
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इस्लामाबाद की बंद कमरों वाली बातचीत टूटी और दुनिया की सांसे अटक गई। जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हुई हर किसी को लगा कि अब वेस्ट एशिया में बारूद फटेगा। लेकिन ठीक उसी वक्त ईरान ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है। ईरान ने साफ कह दिया कि अगर दुनिया में कहीं शांति की चाबी है तो वह भारत के पास है। हैरानी की बात देखिए। एक तरफ महाशक्तियां युद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं और दूसरी तरफ ईरान के राजदूत सैयद रजा मोसेब मोतलाद मुंबई में बैठकर भारत की तारीफों के कसीदे पढ़ रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका पर तंज कसते हुए उसे तनाव की सबसे बड़ी वजह बताया। लेकिन साथ ही भारत, रूस और चीन को वो त्रिमूर्ति करार दिया जो तीसरे विश्व युद्ध को रोक सकती है। ईरान ने भारत को सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक ताकत बताया है। अब सवाल उठता है कि क्या भारत सिर्फ तमाशबीन नहीं बल्कि इस खेल का सबसे बड़ा और निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है। दरअसल जब अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल हुई, तो ईरान ने खुलेआम कह दिया कि भारत ने अपने हितों को जोखिम में डालकर भी स्थिरता का साथ दिया है। भारत ने ना तो अमेरिकी हमलों का अंधा समर्थन किया और ना ही युद्ध की आग में घी डाला।
भारत की इसी न्यूट्रल पॉलिसी और संतुलित व्यवहार का नतीजा है कि आज ईरान जैसा देश भी भारत के सामने उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। मजे की बात तो यह है कि ईरान ने सिर्फ जुबानी जमा खर्च नहीं किया बल्कि उसने भारत के जहाजों को होरमुज स्टेट से सुरक्षित निकलने देकर यह साबित कर दिया कि वह भारत की कितनी इज्जत करता है। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिस्कियन और रूस के राष्ट्रपति पुतिन फोन पर कूटनीतिक समाधान की खिचड़ी पका रहे हैं तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया की नजरें दिल्ली पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या भारत आगे बढ़कर शांति का सबसे बड़ा चेहरा बनेगा या फिर रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका को युद्ध के मैदान से पीछे हटने पर मजबूर कर देगा। कूटनीति की बिसात बिछ चुकी है और ईरान ने अपना मोहरा चल दिया है। अब देखना यह होगा कि भारत का अगला कदम क्या होगा क्योंकि ईरान ने तो साफ कर दिया है कि दुनिया को जंग से बचाना है तो भारत को आगे आना ही होगा।
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