छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का “मिट्टी सत्याग्रह” जारी, उमंग सिंघार ने सरकार पर उठाए सवाल
छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा “मिट्टी सत्याग्रह” अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है जिसमें आदिवासी, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन, जंगल और नदी छीनी जा रही है और उन्हें लाभ कम नुकसान ज्यादा हो रहा है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कहा कि “केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में छतरपुर में उभरा जनाक्रोश सरकार की संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है। नदी में उतरकर ‘मिट्टी सत्याग्रह’ कर रहे विस्थापित आदिवासी, महिलाएं और बच्चे दूसरी ओर भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं की बिगड़ती तबीयत, यह दृश्य बेहद पीड़ादायक है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का मिट्टी सत्याग्रह
छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधान बांध निर्माण के खिलाफ विस्थापित आदिवासियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। हजारों की संख्या में आदिवासी, महिलाएं, बच्चे और किसान केन नदी में उतरकर “मिट्टी सत्याग्रह” कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी केन नदी में उतरकर शरीर पर मिट्टी लगाकर विरोध जता रहे हैं और “जल, जंगल और जमीन” बचाने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई महिलाएं भूख हड़ताल पर बैठी हैं, जिनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
लगातार 9-10 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक न तो प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल हुई है और न ही विस्थापितों की मांगों पर कोई निर्णायक समाधान निकल पाया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में धारा 163 लागू कर दी है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।
उमंग सिंघार ने सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस आंदोलन को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छतरपुर में उभरा यह जनाक्रोश सरकार की संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने कहा कि नदी में उतरकर “मिट्टी सत्याग्रह” कर रहे विस्थापित आदिवासी, महिलाएं और बच्चे तथा भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं की बिगड़ती हालत बेहद पीड़ादायक है। कांग्रेस नेता ने कहा कि “पहले भी महिलाएं छोटे बच्चों के साथ प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर न्याय मांग चुकी हैं। लगातार आंदोलन जारी है, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। क्या यही भाजपा सरकार का विकास मॉडल है, जहां अपने ही लोगों को जल, जंगल और जमीन के लिए सड़कों और नदियों में उतरना पड़ रहा है।” इसी के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल संज्ञान लेने, विस्थापित आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा करने और मानवीय संवेदनाओं के साथ शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।
भोपाल में राह चलते किन्नर पर हमला! 2 इलाकों में मारपीट, किन्नरों ने दी चेतावनी
भोपाल जैसे बड़े शहर में अगर कोई व्यक्ति सड़क पर सुरक्षित नहीं है, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि सिस्टम पर सवाल है। हाल ही में किन्नर पर हमला भोपाल की सड़कों पर हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर दिया है। यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत को भी चुनौती देती है।
भोपाल किन्नर हमला मामले ने शहर में असुरक्षा का माहौल बना दिया है। एक ही व्यक्ति पर दो बार हमला होना यह दिखाता है कि बदमाशों के हौसले कितने बुलंद हैं और कानून का डर कितना कम हो गया है।
क्या है पूरा मामला
भोपाल में किन्नर पर हमला दो अलग-अलग इलाकों में हुआ है। पहली घटना 9 अप्रैल को सुल्तानिया अस्पताल के पास हुई, जहां एक अज्ञात बाइक सवार ने किन्नर सिमी पर चाकू से हमला कर दिया। यह हमला अचानक हुआ, जिससे पीड़ित को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
दूसरी घटना ऐशबाग इलाके में सामने आई, जहां फिर से किन्नर के साथ मारपीट और धारदार हथियार से हमला किया गया। इन दोनों घटनाओं ने भोपाल किन्नर हमला मामले को और गंभीर बना दिया है।
आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से दूर
इन दोनों घटनाओं के बावजूद आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। किन्नर सिमी ने खुद बताया कि उनके साथ दो बार हमला हो चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
भोपाल किन्नर हमला केस में यह सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर पुलिस कब तक आरोपियों को पकड़ पाएगी। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद अगर अपराधी खुले घूम रहे हैं, तो यह आम लोगों के लिए भी खतरे की घंटी है। इस तरह के मामलों में तेजी से कार्रवाई होना बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में सुरक्षा का भरोसा बना रहे।
किन्नर समाज में बढ़ा आक्रोश
इन घटनाओं के बाद किन्नर समाज में काफी गुस्सा देखने को मिल रहा है। समाज के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
भोपाल किन्नर हमला मामले ने एक पूरे समुदाय को प्रभावित किया है। यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे समाज के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया है। इस घटना ने किन्नर समाज के अंदर डर के साथ-साथ एकजुटता भी बढ़ा दी है। वे अब अपने अधिकार और सुरक्षा के लिए आवाज उठाने को तैयार हैं।
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