HUDCO का loan portfolio चालू वित्त वर्ष में 2 लाख करोड़ रुपये पार करेगा
नयी दिल्ली, नौ अगस्त सार्वजनिक क्षेत्र के अवसंरचना वित्तपोषण संस्थान हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) को मजबूत मांग के चलते चालू वित्त वर्ष में अपने ऋण पोर्टफोलियो के दो लाख करोड़ के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है। कंपनी की परिसंपत्तियों के विस्तार को वित्तपोषित करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में घरेलू और विदेशी बाजारों से कुल ₹75,000 करोड़ जुटाने की योजना है। हुडको के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) संजय कुलश्रेष्ठ ने पीटीआई-के साथ बातचीत में कहा कि इसमें से करीब ₹20,000 करोड़ रुपये की राशि पहली तिमाही में जुटाई जा चुकी है, जबकि शेष ₹55,000 करोड़ रुपये अगली तीन तिमाहियों में जुटाए जाएंगे।
घरेलू बाजार से धन जुटाने के तहत कंपनी ‘कैपिटल गेन’ बॉन्ड के जरिये ₹1,000 करोड़ तक जुटाने की योजना बना रही है। इसके अलावा धन जुटाने के लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) और अन्य माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने पिछले वर्ष हुडको को 54ईसी कैपिटल गेन बॉन्ड जारी करने की अनुमति दी थी।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में इन बॉन्ड के जरिये करीब ₹120 करोड़ जुटाए थे। ये बॉन्ड आयकर अधिनियम, 1961 के तहत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर में बचत का विकल्प प्रदान करते हैं। कंपनी के ऋण वितरण की बात करें, तो हुडको ने पूरे वित्त वर्ष में ₹65,000 करोड़ के कर्ज वितरण का लक्ष्य रखा है।
अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक ₹16,377 करोड़ का तिमाही ऋण वितरण किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के ₹12,812 करोड़ से 28 प्रतिशत अधिक है। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का ऋण पोर्टफोलियो दो लाख करोड़ से अधिक हो जाना चाहिए। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में यह ₹1.62 लाख करोड़ था।
El Nino से भारत समेत एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर महंगाई का खतरा: S&P Global
नयी दिल्ली, नौ अगस्त एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं... विशेषकर भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलिपीन बढ़ती कीमतों के बीच मौसम संबंधी आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, 2026 में शुरू हुआ अल नीनो इस क्षेत्र में कमजोर बारिश और जलवायु संबंधी व्यवधानों के जरिये आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव फिलहाल प्रबंधन के दायरे में रहने की उम्मीद है।
एसएंडपी ने कहा कि अल नीनो के प्रमुख प्रभाव में कृषि उत्पादन में कमी, खाद्य महंगाई में वृद्धि, जलविद्युत उत्पादन में गिरावट तथा वनों में आग और धुंध जैसी घटनाएं शामिल हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया दुनिया के उन क्षेत्रों में हैं, जहां अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। भारत के मामले में जुलाई, 2026 तक उपलब्ध पर्याप्त खाद्य और अनाज भंडार संभावित खाद्य आपूर्ति झटकों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा, फसल नुकसान को कम करने के लिए अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ जिला स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। एसएंडपी के मुताबिक, कई एशियाई देशों ने खाद्य भंडार बढ़ाने, आयात की बेहतर योजना बनाने और बाजार प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं। इसके साथ ही जलाशयों के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई ढांचे में निवेश से कम बारिश की अवधि में इन देशों की जुझारू क्षमता बढ़ी है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने पिछले महीने कहा था कि मजबूत अल नीनो परिस्थितियां विकसित हो रही हैं और अगस्त से अक्टूबर के बीच इनके और मजबूत होने की संभावना है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और मौसम की गंभीर घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। एसएंडपी ने कहा कि कृषि पर अधिक निर्भर अर्थव्यवस्थाएं और खाद्य पदार्थों के लिए अधिक आयात या कृषि उत्पादन पर निर्भर उपभोक्ता अल नीनो के गंभीर प्रभाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होंगे।
हालांकि, क्षेत्र में कृषि की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है, जिससे कुछ हद तक जोखिम कम हुआ है। इसके बाद कम जलविद्युत उत्पादन को सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव माना गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि अल नीनो की परिस्थितियों के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और असमान बारिश कृषि क्षेत्र के परिदृश्य तथा ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
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