Soybean Oil और पाम तेल बीते सप्ताह सस्ते हुए, सरसों और बिनौला की कीमतों में उछाल
नयी दिल्ली, नौ अगस्त लागत से कम दाम पर बिकवाली की वजह से बीते सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम में गिरावट आई। इसके अलावा सुस्त कामकाज के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में भी मामूली गिरावट रही। दूसरी ओर, आवक कम रहने और आगामी त्योहारों की मांग के बीच सरसों तेल-तिलहन तथा नगण्य उपलब्धता के बीच ब्रांडेड कंपनियों की औद्योगिक मांग के कारण बिनौला तेल के दाम में बीते सप्ताह मामूली तेजी रही।
बाजार सूत्रों ने कहा कि आयातक बैंकों में अपना कर्ज (ऋण साख-पत्र या एलसी) घुमाते रहने के लिए माल की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली कर रहे हैं। विदेशों में तेजी रहने के बावजूद लागत से नीचे दाम पर बिकवाली से बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन में गिरावट रही। ठीक यही हाल पाम-पामोलीन का भी है जिसमें बीते सप्ताह गिरावट देखने को मिली।
उन्होंने कहा कि फिलहाल सोयाबीन की मांग है जो बाकी खाद्य तेलों के मुकाबले सस्ता है। खाद्य तेलों की अपनी लगभग आधी जरूरत के लिए आयात पर निर्भर इस देश में खाद्य तेल लागत से नीचे दाम पर बिके यह किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। इस ओर ध्यान दिये जाने की जरुरत है क्योंकि इसमें बैंकों का और किसानों का ही नुकसान है।
कामकाज कुछ कमजोर रहने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में भी बीते सप्ताह मामूली गिरावट रही। दूसरी ओर, कम आवक और त्योहारी मांग होने के बीच बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन में मामूली सुधार आया। नगण्य उपलब्धता और बड़ी ब्रांडेड कंपनियों की त्योहारी मांग के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम में भी सुधार देखने को मिला।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 50 रुपये के सुधार के साथ 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों तेल दादरी 50 रुपये के सुधार के साथ 16,775 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल भी क्रमश: 10-10 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,730-2,830 रुपये और 2,730-2,880 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
वहीं, समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 225-225 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 7,300-7,350 रुपये और 7,150-7,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 75 रुपये की गिरावट के साथ 15,725 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 75 रुपये की गिरावट के साथ 15,575 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 200 रुपये की गिरावट के साथ 12,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम 50 रुपये की गिरावट के साथ 7,350-7,925 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 150 रुपये की गिरावट के साथ 17,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 20 रुपये की गिरावट के साथ 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम भी 100 रुपये की गिरावट के साथ 13,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पामोलीन दिल्ली 125 रुपये की गिरावट के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल 175 रुपये की गिरावट के साथ 14,400 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। ब्रांडेड कंपनियों की औद्योगिक मांग बढ़ने के बीच बिनौला तेल का दाम 100 रुपये के सुधार के साथ 16,900 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
FPI Buying: अगस्त के पहले सप्ताह में खरीदे ₹12,921 करोड़ के शेयर, बना रहा आकर्षण
नयी दिल्ली, नौ अगस्त भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया है। बेहतर होती वृहद आर्थिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से एफपीआई के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।
अगस्त का यह आंकड़ा जुलाई में किए गए ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद आया है। इसके पहले लगातार चार माह तक एफपीआई बिकवाल रहे थे। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की निकासी की थी।
इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद वर्ष 2026 में विदेशी निवेशक अब भी भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में दर्ज ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में एफपीआई का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की नरम कीमतें और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बेहतर वृद्धि और मुद्रास्फीति संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। निवेश मंच ट्रैक के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा द्वितीयक बाजार के जरिये हुआ है, जो यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, एफपीआई की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे वाहन, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है।
समीक्षाधीन अवधि के दौरान एफपीआई ने बॉन्ड बाजार में सामान्य मार्ग के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।
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