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Noida Traffic Advisory: दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर मजदूर आंदोलन के चलते लगा लंबा जमा, इन रास्तों से बचकर निकलें

Noida Traffic Advisory: दिल्ली और नोएडा के बीच आवाजाही करने वाले हजारों लोगों के लिए सोमवार की सुबह मुश्किलों से भरी रही. प्राइवेट फैक्ट्रियों के मजदूरों के विरोध प्रदर्शन ने प्रमुख मार्गों को जाम कर दिया, जिससे दिल्ली-नोएडा लिंक रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक लगभग ठप हो गया. तीन दिनों से जारी यह आंदोलन अब और उग्र रूप लेता दिख रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए हैं.

पुलिस की एडवाइजरी: इन रास्तों से बचें

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने साफ कहा है कि चिल्ला बॉर्डर से नोएडा जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे इस मार्ग से बचें और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें.

यात्रियों के लिए डीएनडी फ्लाइवे, सराय काले खां और NH-24 जैसे मार्गों को बेहतर विकल्प बताया गया है. इसके बावजूद भारी ट्रैफिक दबाव के कारण इन रास्तों पर भी जाम की स्थिति बनी हुई है.

मजदूरों की मांग: लिखित आश्वासन जरूरी

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से कम वेतन और खराब कार्य परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. एक मजदूर के अनुसार, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन हमें मात्र 14,000 रुपये के आसपास वेतन मिलता है.”

श्रमिकों की मुख्य मांगों में ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और समय पर वेतन शामिल हैं. हालांकि प्रशासन ने इन मांगों को लागू करने का मौखिक आश्वासन दिया है, लेकिन मजदूर तब तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं जब तक उन्हें लिखित गारंटी नहीं मिल जाती.

प्रशासन के प्रयास और हालात की चुनौती

गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं. जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे हर महीने की 10 तारीख तक वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें और ओवरटाइम का डबल भुगतान करें. साथ ही अवैध कटौतियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और वे सड़कों से हटने को तैयार नहीं हैं.

हिंसा और बढ़ती चिंता

प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हालात बिगड़ते भी दिखे. नोएडा के सेक्टर 1 और ब्लॉक 84 के आसपास कथित तौर पर कुछ वाहनों में आग लगा दी गई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई. इस घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है.

आम लोगों पर असर

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर आम यात्रियों पर पड़ा है. ऑफिस जाने वाले लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे. एक महिला यात्री ने बताया कि वह सुबह 7:30 बजे घर से निकली, लेकिन एक घंटे से अधिक समय तक रास्ता नहीं मिल पाया. सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस स्थिति को “बेकाबू” बताते हुए प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है.

कब मिलेगा समाधान?

फिलहाल प्रशासन और पुलिस हालात को सामान्य करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन जब तक मजदूरों की मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह समस्या बनी रह सकती है. दिल्ली-नोएडा जैसे व्यस्त कॉरिडोर में इस तरह का आंदोलन न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि पूरे शहरी जीवन को प्रभावित करता है, जिससे यह मुद्दा और भी गंभीर बन जाता है.

यह भी पढ़ें - Noida Traffic Advisory: नोएडा के इन इलाकों में आज लागू रहेगा डायवर्जन, ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

 

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दालों और तिलहनों के मुद्दे पर झूठा नैरेटिव बना रहे तमिलनाडु सीएम स्टालिन: वित्त मंत्री सीतारमण

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आलोचना की और उन पर एक झूठा नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया। यह नैरेटिव केंद्र सरकार की उस सलाह के बारे में था, जिसमें राज्यों से किसानों को ज्यादा दालें और तिलहन उगाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया था।

वित्त मंत्री ने बताया कि राज्यों को भेजा गया यह संदेश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करने का एक न्योता है। ज्यादातर राज्य सरकारों ने इस बात को समझा और सहकारी संघवाद की भावना के साथ इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ सीएम स्टालिन ने ही इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की।

सीतारमण ने कहा कि केंद्र-विरोधी बयानबाजी में समय बर्बाद करने के बजाय सीएम स्टालिन को तमिलनाडु के लोगों को यह समझाना चाहिए कि वे दालों और तिलहनों के मामले में हमें आत्मनिर्भर बनाने के बजाय विदेशी ताकतों को अवसर क्यों सौंप रहे हैं। जब जरूरी खाद्य पदार्थ आयात पर निर्भर होते हैं, तो घरेलू खाद्य सुरक्षा बाहरी झटकों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाती है। भारत जैसे विशाल देश के लिए यह स्थिति टिकाऊ नहीं है। दालों और तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना न केवल एक आर्थिक जरूरत है, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता भी है।

स्टालिन की चुनौती के जवाब में वित्त मंत्री ने राज्यों को भेजा गया पत्र सार्वजनिक कर दिया। इस पत्र में बताया गया है कि चूंकि देश में धान और चावल का अतिरिक्त भंडार मौजूद है, इसलिए राज्यों को किसानों को तिलहन और दालें उगाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिनकी अभी कमी है। पत्र में यह भी बताया गया है कि इससे किसानों को ज्यादा आय कमाने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सच्ची खाद्य संप्रभुता तभी संभव है, जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करें और पानी की ज्यादा खपत वाली अतिरिक्त फसलों की जगह उन जरूरी फसलों को बढ़ावा दें, जिनकी भारत को असल में जरूरत है। सीतारमण ने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक, निरंतर और सकारात्मक जुड़ाव की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन वही करते दिख रहे हैं जिसमें वे और उनकी पार्टी माहिर हैं, केंद्र और राज्यों के बीच दरार डालना, झूठे नैरेटिव गढ़ना और खुद को किसानों तथा अन्य तमिल लोगों के रक्षक के रूप में पेश करना।

वित्त मंत्री ने कहा कि क्या उन्हें यह नहीं पता कि पाम ऑयल का भारी आयात इसलिए हो रहा है, क्योंकि खाद्य तेल की हमारी मांग की पूर्ति तिलहन की आपूर्ति से पूरी तरह नहीं हो पा रही है? दालों के मामले में भी यही स्थिति है। किसान उन फसलों के लिए बेहतर दाम पा सकते हैं, जिनमें आपूर्ति और मांग के बीच अंतर (गैप) होता है। स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री स्टालिन के मन में किसानों के हितों की कोई चिंता नहीं है।

सीतारमण ने बताया कि दालों, तिलहनों और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत दोहरे लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है: प्रोटीन से भरपूर फसलों तक बेहतर पहुंच के जरिए पोषण सुरक्षा और खाने के तेल के आयात बिल को कम करके आर्थिक स्थिरता।

--आईएएनएस

एमएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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