Hyderabad: 4 साल, 4 महीने और 4 दिन का अनोखा गणित; जानें हैदराबाद की वो रस्म जहां लड्डू खिलाकर शुरू की जाती है बच्चे की पढ़ाई
Hyderabad Bismillah Khani Tradition & History: हैदराबाद की सदियों पुरानी 'बिस्मिल्लाह खानी' या 'तख्ती की रस्म' आज भी आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हुई है. यह रस्म तब निभाई जाती है जब बच्चा ठीक 4 साल, 4 महीने और 4 दिन का होता है, जिसे शिक्षा की शुरुआत के लिए सबसे शुभ संयोग माना जाता है. परंपरा के अनुसार, बच्चे को पढ़ाई का बोझ महसूस कराने के बजाय उत्सव जैसा माहौल दिया जाता है, जहाँ उसे विशेष जड़ी-बूटियों और सूखे मेवों से बना लड्डू खिलाकर कलम और तख्ती थमाई जाती है. पुराने समय में इस मौके पर घर की बुजुर्ग महिलाएं ढोलक की थाप पर नसीहत भरे लोकगीत गाती थीं, जो बच्चे को जीवन के मूल्यों और बड़ों के सम्मान की सीख देते थे. हालांकि आज बड़े आयोजनों और दावतों का चलन बढ़ा है, लेकिन इस रस्म का मूल उद्देश्य आज भी वही है—बच्चे के मन से किताबों का डर निकालना और ज्ञान के सफर को मिठास के साथ शुरू करना. हैदराबाद की यह अनूठी गंगा-जमुनी तहजीब शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार के रूप में देखती है.
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