लता दीदी के सेक्रेटरी से भागकर शादी की, तलाक लिया:खुद अंग्रेजी गानों, फिल्मों की शौकीन थीं आशा भोसले; जानें प्रोफाइल
बॉलिवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। 1960-70 के दशक की इंडियन पॉप और कैबरे आर्टिस्ट कही जाने वाली आशा ने 8 दशक के करियर में 12,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। भारतीय संगीत जगत में अगर किसी आवाज ने हर दौर, हर जॉनर और हर इमोशन को जिया है, तो वो हैं आशा भोसले। उन्होंने म्यूजिक इंटस्ट्री में अपनी अलग छाप छोड़ी है। कैबरे से गजल तक, डिस्को से क्लासिकल तक, ऐसा कुछ नहीं जो उनसे अनछुआ रह गया हो। उनके सबसे पॉपुलर गानों में 'उड़े जब-जब जुल्फें तेरी', 'दम मारो दम', 'पिया तू अब तो आजा', 'चुरा लिया है तुमने', 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती' शामिल है। बॉलिवुड प्लेबैक सिंगर आशा भोसले का जन्म म्यूजिक और थिएटर में अपनी पैठ जमा चुके परिवार में हुआ। पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी स्टेज एक्टर और हिंदुस्तानी क्लासिकल सिंगर थे। मां गृहिणी और परिवार में और 4 भाई-बहन थे। सबसे बड़ी बहन लता मंगेशकर थीं। सिंगर्स को मिमिक कर गाना सीखा आशा 9 साल की थी जब तंग हाल में पिता का देहांत हो गया। गुजर-बसर करने के लिए परिवार पहले पुणे से कोल्हापुर फिर मुंबई आ गया। तब घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए सिर्फ 13 साल की उम्र में बड़ी बहन लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना शुरू कर दिया। जल्द आशा भी उनके साथ हो लीं। गाने की कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं हुई थी, पर पिता से मिली विरासत ने उन्हें हमेशा क्लासिकल म्यूजिक के करीब रखा था। बचपन में अक्सर गानें सुनकर खुद की आवाज में उसे गाने की कोशिश करतीं। सिंगर्स को मिमिक कर उन्हें कॉपी करतीं। इसकी वजह से उनकी आवाज में वो लचीलापन आया जिसकी बदौलत उन्होंने गजल, पॉप, कैबरे, भजन से लेकर फोक तक, लगभग हर जॉनर में गाया है। वेस्टर्न म्यूजिक और इंग्लिश फिल्मों की दीवानी थीं इंडिन क्लासिकल म्यूजिक के अलावा उन पर वेस्टर्न जैज और लैटिन अमेरिन म्यूजिक का भी खासा प्रभाव रहा। आशा 9 साल की उम्र से 'गॉन विद द विंड' और 'फॉर हुम द बेल टोल्स' जैसी इंग्लिश फिल्मों की दीवानी थीं। उन्हें फ्रेड एस्टेयर की सारी फिल्में पसंद थी। उन्हें खासकर पुर्तगाली-ब्राजीलियन एक्ट्रेस और सांबा सिंगर कारमेन मिरांडा की सल्ट्री वॉइय बहुत पसंद थी। वो अक्सर घर में दुपट्टा ओढ़कर 'Mama yo quiero' गाते हुए कारमेन मिरांडा की तरह डांस किया करतीं। ये सब देख उनकी मां को लगता कि ये लड़की पागल है। 1986 में आई डॉक्यूमेंट्री 'आशा' में उन्होंने ये सब बताया था। 10 साल में सिंगिंग डेब्यू किया आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में मराठी फिल्मों में गाकर अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की। 1943 में आई फिल्म 'माझा बल' में गीत गाकर सिंगिंग डेब्यू किया। फिर 1949 में आई जगदीश सेठी की फिल्म 'रात की रानी' में उन्हें पहला सोलो हिंदी सॉन्ग मिला। इसी साल ‘महल’ फिल्म के गीत के सक्सेस ने लता को रातों-रात स्टार बना दिया। ऐसे में आशा के लिए मुश्किलें बढ़ीं जब हर गीत के लिए प्रोड्यूसर्स की पहली पसंद लता मंगेशकर हो गईं। लता नहीं तो गीता दत्त या शमशाद बेगम उनकी दूसरी पसंद होती। ऐसे में आशा का नाम उस लिस्ट में दूर तक नहीं आता। आशा को बी-ग्रेड या कम बजट फिल्मों में ही गाने मिलते। वे भी जो मिला वो करती गईं। फिर 1957 में फिल्म आई 'नया दौर'। उसमें उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म के गीत 'उड़े जब-जब जुल्फें तेरी' से वो हर घर में जानी जाने लगीं। अपनी उम्र से दोगुने उम्र के गणपतराव से भागकर शादी की 1949 में 16 साल की उम्र में आशा ने 31 साल के गणपतराव भोसले के साथ घर से भागकर, परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली। गणपतराव भोसले लता मंगशकर के सेक्रेटरी थे। इससे नाराज आशा के परिवार ने उनसे बातचीत बंद कर दी। इससे दोनों बहनों के बीच भी दरार आ गई। एक-दूसरे के साथ साए की तरह रहने वाली बहनों के बीच ऐसी दरार आई कि भरने में सालों लगे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब उनके रिश्ते बहुत कड़वे हो गए थे और सालों तक बातचीत तक बंद रही। लता को लगता था कि वो इंसान आशा के लिए सही नहीं है। ससुराल वालों को गायक बहू पसंद नहीं थी लता की ये सोच सही साबित हुई। गणपतराव से आशा की शादी किसी भयावह सपने से कम नहीं थी। उन्होंने कई बार इंटरव्यूज में बताया कि उनका ससुराल बहुत ऑर्थोडॉक्स था जिन्हें एक गायक बहू पसंद नहीं थी। पति अक्सर पीटा करता था और शक करता था। इस शादी में आशा का दम घुटने लगा। एक ओर निजी जिंदगी तबाह हो रही थी तो दूसरी ओर पेशेवर जिंदगी भी बेहद उतार-चढ़ाव और मुश्किलों से गुजर रही थी। आखिरकार, 1960 में आशा ने पति गणपतराव को तलाक दिया और अपने बच्चों को अपने साथ ले गईं। हालांकि, उन्होंने गणपतराव भोसले को अपनी जिंदगी से तो निकाल दिया लेकिन अपना सरनेम नहीं बदला। ऐसा इसलिए कि वो तब तक हर भारतीय घर में इसी नाम से पहचान बना चुकी थीं। लता हिरोइन तो आशा वैम्प की आवाज बनीं लिजेंड्री म्युजिकल डुओ कल्याणजी-आनंदजी ने 2013 के एक इंटरव्यू में बताया था कि लता को शुरुआती करियर में ऐसे गाने मिलते जो सच्ची और अच्छी भारतीय औरत पर फिल्माए गए हों। वहीं आशा को बचे-खुचे या फिर वैम्प (फिमेल विलेन) के और कैबरे सिंगर के ही गाने मिलते। ऐसे गाने जो सेंसुअस और सल्ट्री हो। इसके साथ ही एक ओर एक गाना गाने के लिए लता को उस समय में करीब 500 रुपए मिलते वहीं आशा को 100 रुपए मिलते। लता के पास इतना काम आता कि उसमें से उन्हें चुनना पड़ता लेकिन आशा को बमुश्किल जो मिलता वही गाना पड़ता। बहन से आगे निकलना चाहती थीं ऐसे में आशा के मन में लता से प्रतिस्पर्धा की भावना जागी। आशा ने ठान लिया कि वे खुद को साबित करके रहेंगी। वो आगे बढ़ने के लिए बेताब थीं कि तभी O.P. नैयर से आशा की मुलाकात हुई। O.P. नैयर ने उन्हें सिंगिंग करियर का बड़ा ब्रेक दिया। आशा को 1953 में बिमल रॉय की फिल्म परिणीता, राज कपूर की बूट पॉलिश और S.D. बर्मन की पेइंग गेस्ट के गानों से थोड़ा फेम मिला था। फिर 1957 में आई B.R. चोपड़ा की फिल्म नया दौर ने उनके इस नए फेम को और ऊंचाई दी। इसमें O.P. नैयर ने 'उड़े जब जब जुल्फें तेरी' और 'मांग के साथ तुम्हारा' जैसे गीत आशा को दिए। इसके बाद 1958 में हावड़ा ब्रिज फिल्म का गीत 'आइए मेहरबान' की सक्सेस ने आशा को कामयाबी के उस पायदान पर पहुंचाया जहां से उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके साथ ही वो वैम्प से हिरोइनों की आवाज बन गईं। O.P. नैयर और S.D. बर्मन ने सफलता की नई राहें खोली एक ओर O.P. नैयर सोचने लगे कि वे लता के बिना भी सुपरहिट गाने दे सकते हैं तो दूसरी ओर S.D. बर्मन का लता के साथ मनमुटाव था। दोनों के लिए आशा ने गाकर अपने लिए सफलता की नई राहें खोली। कैबरे क्वीन बनी आशा 60–70 के दशक में जब बॉलीवुड में कैबरे गाने अपनी पहचान बना रहे थे, तब उनकी आवाज ने इन गीतों को एक अलग ही अंदाज दिया। 'पिया तू अब तो आजा', 'ये मेरा दिल' और 'आओ हुजूर तुमको' जैसे गानों में उनका नटखट, बोल्ड और सेंसुअस अंदाज साफ झलकता है। स्क्रीन पर हेलन जैसी डांसर की अदाओं को उनकी आवाज ने जान दी। सबसे दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने कभी 'इमेज' के दायरे में खुद को कैद नहीं किया। बल्कि इसे अपनी ताकत बनाया और हर गाने में एक नया रंग भर दिया। उन्होंने शोखी वाले रोमांटिक, चुलबुले और मस्ती भरे सेंसुअस गीत, पॉप और जैज सॉन्ग्स गाए तो गजल और ठुमरी भी गाए हैं। पंचम की मां ने कहा था- शादी मेरी लाश पर ही होगी’ R.D. बर्मन की आशा से मुलाकात 1966 में फिल्म तीसरी मंजिल के दौरान हुई थी। साथ काम करते-करते दोनों के बीच गहरी दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। R.D. बर्मन ने सही मौका देखकर आशा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। आशा झट से मान गईं। लेकिन उनकी मां को यह रिश्ता मंजूर नहीं था, क्योंकि आशा उनसे उम्र में बड़ी थीं और तीन बच्चों की मां थीं। उनकी मां ने साफ कहा था- शादी मेरी लाश पर होगी। मां के विरोध के चलते दोनों ने उस समय शादी नहीं की। लेकिन बाद में S. D. बर्मन के निधन के बाद 1980 में आशा और बर्मन ने शादी कर ली। 1981 में उमराव जान के लिए पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीता उनकी जिंदगी का एक और मोड़ आया। वही मोड़ जिसने उन्हें सिर्फ गायिका से लिजेंड बना दिया। उस दौर में गजल पर लता मंगेशकर का जैसे एकाधिकार था। लेकिन मेकर्स को एक अलग, नई गजल की आवाज चाहिए थी, जो पाकीजा की विरासत से हटकर अपनी पहचान बना सके। फिल्म उमराव जान के लिए खय्याम ने आशा को चुना, शर्त यह थी कि वे अपनी चुलबुली शैली छोड़कर ठहराव भरी गायकी अपनाएं। नीचले सुर में गाना उनके लिए नया था, लेकिन कड़े रियाज के बाद 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती' जैसी गजलों ने उनकी भीतर की संजीदा गायिका को उभारा। आशा और खय्याम को इस फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। पैशनेट कुक हैं, माला सिन्हा से मोमो बनाना सीखा आशा भोसले को खाना पकाने का बेहद शौक रहा है। वे पैशनेट कुक थीं जिसके चलते उन्होंने 2002 में दुबई के वाफी सिटी मॉल में Asha's रेस्टोरेंट खोला था। दरअसल ये रेस्टोरेंट उन्होंने दुबई में रह रहे अपने बेटे आनंद भोसले के लिए खोला था। यहां वे कई बार खुद आकर पकाती भी थीं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया भी था कि उन्हें शेफ का कोर्ट पहनकर ही बहुत खुशी होती है। दुबई के अलावा अभी उनके रेस्टोरेंट लंदन, कुवैत, मैनचेस्टर, बर्मिंघम, बहरीन और कतर में हैं। उन्हें खाना बनाने का इतना शौक था कि मजरूह सुल्तानपुरी की बेगम से लखनवी खाना बनाना सीखा और एक्ट्रेस माला सिन्हा से मोमो बनाना सीखा था। वो जहां जाती थीं, वहां से कोई न कोई रेसिपी जरूर सीखतीं। उन्हें खाने से ज्यादा लोगों को खिलाने का शौक था। वे सबको हर दावत में खुद खाना पकाकर खिलाती थीं। खाना पकाती हुईं हेमंत कुमार गाने और गुलाम अली के गजल गाया करती थीं। जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो से बेकार आवाज कहकर निकाल दिया था 1947 की बात है जब पहली बार प्लेबैक सिंगिंग के ऑडिशन के लिए किशोर कुमार और आशा साथ गए। दोनों फेमस स्टूडियों में राज कपूर और नरगिस स्टारर फिल्म ‘जान पहचान' के लिए एक गाना रिकॉर्ड करने गए थे। तब उनकी आवाज को खराब बताकर रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया। साथ ही कहा कि ये प्लेबैक सिंगर नहीं बन सकते। इस वाकिये से एक बार को किशोर कुमार घबराए और आशा से कहा- अब क्या करेंगे हम? इस पर आशा ने साफ कहा कि आपकी आवाज अच्छी है, आपको कोई नहीं रोक सकता। आशा को अपनी काबिलियत पर कभी ऐसा शक नहीं हुआ। उन्हें हमेशा खुद पर यकीन रहता कि वे जरूर कुछ करके दिखाएंगी। स्टोरी - सोनाली राय ============== ये खबरें भी पढ़ें... कैश मामले की जांच के बीच जस्टिस यशवंत का इस्तीफा: पिता भी हाईकोर्ट जज थे, 33 साल से कानूनी पेशे में; जानें पूरी प्रोफाइल कैश कांड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर हुए जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंप दिया। 14 मार्च 2025 को जस्टिस यशवंत के दिल्ली वाले घर में आग लगने पर 500-500 के जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। पूरी खबर पढ़ें...
'वो मॉन्स्टर है...' इरफान पठान ने RCB के धांसू बल्लेबाज पर दिया ऐसा बयान, हो गया वायरल
IPL 2026 : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में बतौर डिफेंडिंग चैंपियन उतरी है. टीम ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है. RCB को 4 मुकाबलों में 3 में जीत मिली है, जबकि उसे 1 मैच में हार का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही आरसीबी 6 अंकों के साथ प्वाइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर बनी हुई है. आरसीबी को कप्तान रजत पाटीदार ने आईपीएल 2026 की ट्रॉफी दिलाई थी. अब वो एक बार फिर बतौर कप्तान आईपीएल 2026 में अपनी ट्रॉफी डिफेंड करने के लिए आए हैं.
आरसीबी ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ बीते रविवार अपना आईपीएल के इस सीजन का चौथा मुकाबला खेला. इस मैच में आरसीबी ने एमआई को 18 रनों से हरा दिया. बेंगलुरु के लिए कप्तान रजत पाटीदार ने इस मुकाबले में कमाल का प्रदर्शन किया. उन्होंने तूफानी अंदाज में अर्शधतकीय पारी खेली.
The #RCB skipper is putting on a show! ????
— IndianPremierLeague (@IPL) April 12, 2026
???? 3️⃣ consecutive sixes for Rajat Patidar right out of the blocks ????
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रजत पाटीदार ने खेली तूफानी पारी
रजत पाटीदार ने 20 बॉल में 4 चौके और 5 चौकों के साथ 53 रनों की विस्फोटक पारी खेली. इस पारी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 265.00 का रहा था. उन्होंने मात्र 17 बॉल में ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. इसके साथ ही वो आरसीबी के लिए सबसे तेज शतक लगाने वाले आईपीएल इतिहास के संयुक्त रूप से दूसरे बल्लेबाज बन गए.
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— IndianPremierLeague (@IPL) April 12, 2026
How good was that knock from Rajat Patidar? ????
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IPL में आरसीबी के लिए सबसे तेज अर्धशतक
14 गेंदें - रोमारियो शेफर्ड बनाम CSK, बेंगलुरु, 2025
17 गेंदें - क्रिस गेल बनाम PWI, बेंगलुरु, 2013
17 गेंदें - रजत पाटीदार बनाम MI, वानखेड़े, 2026
18 गेंदें - फाफ डु प्लेसिस बनाम GT, बेंगलुरु, 2024
19 गेंदें - रॉबिन उथप्पा बनाम KXIP, बेंगलुरु, 2010
रजत पाटीदार की इस विस्फोटक पारी की तारीफ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी की है. उन्होंने मैच के दौरान कमेंट्री में रजत की ताफी की और उन्हें मॉन्स्टर बल्लेबाज का खिताब दे दिया है. इरफान ने रजत को लेकर क्या कहा, आइए इसके बारे में जानते हैं.
इरफान पठान ने रजत पाटीदार पर दिया बड़ा बयान
इरफान पठान ने कहा कि, 'अगर कोई बैटर खुद को गैंगस्टर समझता है, तो रजत पाटीदार मॉन्स्टर है. वह क्रीज पर आता है, पहली बॉल से ही स्मैश करता है और स्पिनर्स को लगभग खत्म कर देता है. वह इस समय RCB के लिए सच में अविश्वसनीय है. उसने अपनी इनिंग्स में ही वह गेम लगभग खत्म कर दिया था. मुंबई इंडियंस के बॉलर्स उसकी हिटिंग एबिलिटी के सामने कुछ नहीं थे. वह बॉलर्स के लिए बिल्कुल मॉन्स्टर है'.
IRFAN PATHAN ON RAJAT PATIDAR BATTING
— Akshat (@Akshatgoel1408) April 13, 2026
He said : If any batter thinks he is a gangster, then Rajat Patidar is the monster. He arrives at the crease, smashes from the first ball itself, and almost finishes the spinners. He is truly unbelievable at the moment for RCB. He almost… pic.twitter.com/Ze5CaFQf6Q
रजत पाटीदार का आईपीएल 2026 में धमाकेदार प्रदरशन
आईपीएल 2026 में अब तक आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदरा ने कमाल का प्रदर्शन किया है. उन्होंने अब तक 4 मैचों में 2 अर्धशतकों के साथ 195 रन बनाए हैं. वो ऑरेंज कैप हासिल करने से सिर्फ 6 रन दूर है. इस समय ऑरेंज कैप वैभव सूर्यवंशी (200) के नाम है. रजत पाटीदार ने पहले मैच में 31, दूसरे मैच में 48 नॉट आउट, तीसरे मैच में 63 और मुंबई इंडियंस के खिलाफ चौथे मैच में 53 रनों की पारी खेली है.
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