Mohanlal को नहीं मिला Visa, Sydney में शो रद्द होने के बाद मांगी माफी
तिरुवनंतपुरम, आठ अगस्त मलयालम अभिनेता मोहनलाल ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में होने वाले उस कार्यक्रम के आयोजकों और दर्शकों से शनिवार को माफी मांगी, जिसमें वह वीजा न मिलने के कारण शामिल नहीं हो पाए। सिंगापुर में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में मोहनलाल ने कार्यक्रम में हिस्सा न ले पाने पर निराशा जताई और कहा कि वह इस स्थिति के लिए किसी को कसूरवार नहीं ठहराना चाहते। खबरों के मुताबिक, मोहनलाल के सिडनी न जा पाने के कारण यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
मोहनलाल ने कहा, “मैं सिंगापुर से आपसे बात कर रहा हूं। मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं अपना दुख कैसे जाहिर करूं। मैं बहुत निराश हूं।
फिल्म उद्योग में कदम रखे मुझे लगभग 50 साल बीत चुके हैं। शायद मैं भारत का एक ऐसा अभिनेता हूं, जिसने सबसे ज्यादा कार्यक्रम किए हैं।” उन्होंने कहा कि वह इस साल अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और आयरलैंड में प्रस्तुतियां दे चुके हैं और सिडनी में भी अच्छी थीम पर कार्यक्रम की योजना बनाई गई थी। मोहनलाल ने कहा, “केएस चित्रा समेत मेरे साथ के सभी लोग वहां हैं।
लेकिन पता नहीं, ऐसा कैसे हो गया। जिंदगी में पहली बार मुझे वीजा नहीं मिला। मुझे नहीं पता कि ऐसा कैसे हुआ।
यह कोई तकनीकी या लिपिकीय गलती हो सकती है या फिर एआई से जुड़ी कोई समस्या। मैं इस बात की गहराई में नहीं जा रहा हूं कि असल में क्या हुआ है।” उन्होंने कहा, “मैं इस स्थिति की सारी जिम्मेदारी खुद ले रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं कि यह मेरी गलती है।
मुझे इसके लिए बहुत अफसोस है और मैं आप सबसे माफी मांगता हूं।
Manipur में SoO समूहों ने 7 शिविर स्थानांतरित करने पर जताई सहमति, घटाई जाएगी संख्या
इंफाल, आठ अगस्त मणिपुर में ‘अभियान निलंबन’ (एसओओ) समझौते में शामिल उग्रवादी संगठनों ने संघर्ष प्रभावित इलाकों से सात नामित शिविरों को स्थानांतरित करने और ऐसे शिविरों की कुल संख्या घटाने पर शनिवार को सहमति जताई। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के मुताबिक, यह फैसला नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और दो उग्रवादी संगठनों-कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) तथा यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ)-के प्रतिनिधियों के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिया गया।
बयान के अनुसार, बैठक एक संशोधित त्रिपक्षीय एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर के साथ संपन्न हुई, जिसमें नयी शर्तें और नियम शामिल हैं, जो हस्ताक्षर वाले दिन से एक साल की अवधि के लिए लागू होंगे। एसओओ संघर्ष-विराम के लिए तीन पक्षों के बीच हुआ एक समझौता है, जिसमें केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और केएनओ तथा यूपीएफ जैसे संगठनों के तहत काम करने वाले कुकी और जोमी उग्रवादी समूह शामिल हैं। यह समझौता पहली बार 2008 में किया गया था।
बयान के मुताबिक, बैठक में मणिपुर में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए बातचीत के जरिये समाधान निकालने पर भी सहमति बनी। इसमें कहा गया है कि बैठक में “केएनओ और यूपीएफ सात शिविरों को संघर्ष की आशंका वाले इलाकों से दूर दूसरी जगह ले जाने और तय शिविरों की संख्या घटाने पर भी सहमत हो गए हैं”, साथ ही हथियारों को भी पास के सीआरपीएफ/बीएसएफ शिविरों में ले जाया जाएगा। सरकारी अनुमान के अनुसार, एसओओ में शामिल संगठन पहाड़ी जिलों-खासकर चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी-में 14 शिविर संचालित कर रहे हैं, जिनमें केएनओ और यूपीएफ के लगभग 2,200 कैडर रह रहे हैं।
ये शिविर निगरानी वाली रिहायशी जगहें हैं, जहां उन उग्रवादी गुटों के सदस्यों को रखा जाता है, जिन्होंने सरकार के साथ एसओओ या शांति समझौते पर दस्तखत किए हैं। ऐसे शिविर हथियारबंद गुटों को तय नियमों के दायरे में सीमित और नियंत्रित रखते हैं।
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