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जरूरत की खबर- महिलाओं के लिए यूरिन रोकना खतरनाक:ब्लैडर को गंभीर नुकसान, बढ़ता इंफेक्शन का रिस्क, टॉयलेट हाइजीन के 11 टिप्स

अक्सर महिलाएं काम की व्यस्तता, ट्रैफिक या गंदे पब्लिक टॉयलेट के डर से यूरिन लंबे समय तक रोककर रखती हैं। बार-बार ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक यूरिन रोकने से ब्लैडर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ जाता है। इससे मसल्स कमजोर होने और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए सही टॉयलेट हाइजीन अपनाना जरूरी है। इसलिए जरूरत की खबर में जानेंगे कि एक्सपर्ट: डॉ. मानिनी पटेल, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- जब कोई महिला बहुत देर तक यूरिन को होल्ड करके रखती है तो इससे शरीर में क्या होता है? जवाब- लंबे समय तक यूरिन रोकने से ब्लैडर पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। इससे कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। जैसेकि- सवाल- ज्यादा देर तक यूरिन होल्ड करने से ब्लैडर को क्या नुकसान होता है? जवाब- ब्लैडर ज्यादा देर तक भरा रहने से उसकी मांसपेशियों और अंदरूनी लेयर पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे संक्रमण व अन्य कॉम्प्लिकेशन का जोखिम बढ़ता है। ग्राफिक से समझिए यूरिन रोकने से ब्लैडर को क्या नुकसान होता है- सवाल- ज्यादा देर तक यूरिन होल्ड करने से कौन-कौन से हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- इससे कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ग्राफिक में सभी हेल्थ रिस्क देखिए- आइए, ग्राफिक में दी गई कुछ बीमारियों के बारे में थोड़ा विस्तार से समझते हैं- 1. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) 2. ब्लैडर पर दबाव 3. किडनी पर असर 4. ब्लैडर स्टोन (पथरी) 5. पेल्विक फ्लोर डैमेज 6. दर्द और असहजता सवाल- क्या देर तक यूरिन रोककर रखने से किडनी डैमेज हो सकती है? जवाब– हां, इससे किडनी से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं। जैसेकि- सवाल- क्या प्रेग्नेंसी के दौरान यूरिन रोकना ज्यादा खतरनाक हो सकता है? जवाब- हां, इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। अगर ये इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाए तो प्री-मेच्यौर डिलीवरी का कारण भी बन सकता है। सवाल- कितनी देर तक यूरिन को रोककर रखना सेफ है? जवाब– यह व्यक्ति की उम्र, कितनी मात्रा में पानी या फ्लूइड लिया है और उसकी सेहत की स्थिति पर निर्भर करता है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ के अनुसार, आमतौर पर हर 3–4 घंटे में यूरिन पास करना बेहतर माना जाता है। हालांकि जैसे ही यूरिन पास करने की जरूरत लगे तुरंत जाना बेहतर है। सवाल- क्या बार-बार यूरिन रोकने से ब्लैडर की क्षमता स्थायी रूप से कम होती है? जवाब- कभी-कभार यूरिन रोकने से ब्लैडर की क्षमता स्थायी रूप से कम नहीं होती। लेकिन लंबे समय तक लगातार ऐसा करने से ब्लैडर फंक्शन प्रभावित होता है। इससे संक्रमण या अन्य यूरिनरी प्रॉब्लम्स का जोखिम बढ़ जाता है। सवाल- सभी को आमतौर पर एक टॉयलेट हाइजीन फॉलो करना चाहिए? ये क्या है और इसमें कौन–कौन सी चीजें शामिल हैं? जवाब- अक्सर लोग जल्दबाजी या लापरवाही में हाइजीन से जुड़ी छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है। हालांकि कुछ बेसिक टॉयलेट हाइजीन कई बीमारियों से बचाती हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- इन आसान आदतों को अपनाकर यूरिन इंफेक्शन और अन्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। सवाल- क्या लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से भी ब्लैडर हेल्थ प्रभावित होती है? जवाब- हां, इससे ब्लैडर पर नेगेटिव असर पड़ता है। पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- यूरिन रोकने के अलावा हमारी रोजमर्रा की और कौन सी आदतें ब्लैडर हेल्थ को प्रभावित करती हैं? जवाब- खराब लाइफस्टाइल, डिहाइड्रेशन, क्रॉनिक डिजीज और खराब हाइजीन ब्लैडर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में ब्लैडर को नुकसान पहुंचाने वाली आदतें देखिए- सवाल- ब्लैडर को हेल्दी रखने के लिए हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए? जवाब- इसके लिए संतुलित लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी है। इसे ग्राफिक में देखिए- कुल मिलाकर, शरीर के नेचुरल सिग्नल्स को नजरअंदाज करने की बजाय समय पर यूरिन पास करना, सही टॉयलेट हाइजीन फॉलो करना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। …………………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- कभी न पहनें टाइट जीन्स:हो सकता है स्किनी जीन्स सिंड्रोम, बढ़ता मेल इनफर्टिलिटी का रिस्क, बता रहे हैं यूरोलॉजिस्ट आजकल टाइट जीन्स फैशन का अहम हिस्सा बन गया है, ये हमारी सेहत पर भारी पड़ सकता है। हाल ही में ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बहुत टाइट कपड़े पहनने से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का रिस्क बढ़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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पेरेंटिंग- जॉब के साथ बच्चे को वक्त नहीं दे पाते:वो जिद्दी हो रहा है, अपनी डिमांड पूरी करने के लिए ब्लैकमेल करता है, क्या करें?

सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा 8 साल का एक बेटा है। मैं और मेरे हसबैंड, दोनों कॉरपोरेट जॉब करते हैं। काम की वजह से हम बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे। इस कमी को पूरा करने के लिए हम अक्सर उसे महंगे गिफ्ट्स, गैजेट्स दे दिया करते थे। उसकी हर इच्छा भी पूरी करते थे। लेकिन कुछ समय से हमें ऐसा लग रहा है कि बेटे की उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। वह अपनी बात मनवाने के लिए इमोशनली ब्लैकमेल भी करने लगा है। हमें अब अपनी गलती का एहसास भी हो रहा है, लेकिन ये समझ नहीं आ रहा कि इसे ठीक कैसे करें। सही संतुलन कैसे बनाएं? प्लीज हेल्प। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। यह सवाल आज कई वर्किंग पेरेंट्स की स्थिति को दिखाता है। वर्किंग पेरेंट्स के लिए काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना चैलेंजिंग होता है। ऐसे में बच्चे को पर्याप्त समय न दे पाने पर गिल्ट होना स्वाभाविक है। बहुत से पेरेंट्स इस कमी को पूरा करने के लिए बच्चों को महंगे खिलौने, गैजेट्स या पैसे देकर खुश करने की कोशिश करते हैं। शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है। लेकिन धीरे-धीरे बच्चे के मन में यह धारणा बन जाती है कि प्यार का मतलब सिर्फ भौतिक चीजें या सुख-सुविधाएं हैं। हालांकि अच्छी बात है कि आपने समय रहते इस बदलाव को नोटिस किया है। ऐसे में समझदारी से इस स्थिति को मैनेज किया जा सकता है। वर्किंग पेरेंट्स को गिल्ट क्यों होता है? गिल्ट के और कई कारण हो सकते हैं- ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ का बच्चे पर प्रभाव गिल्ट की वजह से पेरेंट्स बच्चे को जरूरत से ज्यादा चीजें, छूट या लाड़-प्यार देते हैं। शुरुआत में यह ‘प्यार’ लगता है, लेकिन लंबे समय में इसका असर बच्चे की सोच, व्यवहार और इमोशनल डेवलपमेंट पर पड़ता है। ग्राफिक में देखिए गिल्ट पेरेंटिंग का बच्चे पर क्या असर होता है- आइए, अब ‘गिल्ट पेरेंटिंग’ को मैनेज करने के तरीके समझते हैं। वर्किंग पेरेंट्स ‘गिल्ट’ कैसे मैनेज करें? वर्किंग पेरेंट्स के लिए ‘गिल्ट’ पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। आइए इसे प्रैक्टिकल तरीके से समझते हैं- कुल मिलाकर इस समय बच्चे को ज्यादा समय, ज्यादा अटेंशन और ज्यादा साथ की जरूरत है। पेरेंटिंग गिल्ट को मैनेज करने के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। इसे ग्राफिक में देखिए- बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ जरूरी बच्चे के लिए पेरेंट्स का साथ उसकी इमोशनल, मेंटल और सोशल ग्रोथ की बुनियाद होता है। यह उसकी पर्सनैलिटी को आकार देता है। बच्चे को समय की कमी कैसे समझाएं? 6–10 साल के बच्चे में समझने की क्षमता विकसित हो रही होती है। ऐसे में उन्हें अपने काम के बारे में तर्क से समझाया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- अंत में यही कहूंगी कि बच्चों के लिए सबसे बड़ी जरूरत महंगे गिफ्ट्स नहीं, बल्कि माता-पिता का समय, अटेंशन और प्यार है। अगर पेरेंट्स रोज थोड़ी देर भी बिना मोबाइल, बिना काम के बच्चे के साथ बिताते हैं तो यह बच्चे के लिए बहुत मायने रखता है। ………………….. पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल की बेटी एकदम मुंहफट है: जो मुंह में आए, बोल देती है, ये उसकी साफगोई है या संवेदना की कमी, उसे कैसे समझाएं 10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन 'सोशल इंटेलिजेंस' (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

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न बटलर न गिल, 30 साल का ये भारतीय बना प्लेयर ऑफ द मैच, पंत ने भी की तारीफ

prasidh krishna won POTM: प्रसिद्ध कृष्णा को उनकी शानदार गेंदबाजी के लिए लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. प्रसिद्ध ने चार ओवर के अपने स्पेल में सिर्फ 28 रन देकर चार बल्लेबाजों को आउट किया. उन्होंने ऐडन मारक्रम, आयुष बडोनी, निकोलस पूरन जैसे विस्फोटक बल्लेबाजों के विकेट चटकाकर लखनऊ टीम की रन गति पर अंकुश लगाया. Mon, 13 Apr 2026 00:27:44 +0530

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PM Modi Bengal Visit : चुनावी रैली में पीएम मोदी बोलने लगे बंगाली ! #pmmodi #westbengal #bengali #tmktech #vivo #v29pro
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West Bengal Elections 2026 : मोदी+योगी..अबकी बार बंगाल के लिए उपयोगी? | CM Yogi #tmktech #vivo #v29pro
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