IndiGo Flight Bomb Threat: इंडिगो फ्लाइट में बम की धमकी, टॉयलेट में मिला नोट; जांच में जुटी एजेंसियां
IndiGo Flight Bomb Threat: बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दिल्ली जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट में बम होने की सूचना मिली। यह अलर्ट तब जारी हुआ जब एक यात्री को विमान के वॉशरूम में टिश्यू पेपर का एक टुकड़ा मिला। इस नोट में दावा किया गया था कि विमान के अंदर विस्फोटक उपकरण रखा गया है।
सुरक्षित निकाले गए सभी यात्री
धमकी की जानकारी मिलते ही पायलट ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को सूचित किया। मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विमान को खाली कराया गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। सुरक्षा टीमों और बम निरोधक दस्ते ने पूरे विमान की गहन तलाशी ली। हालांकि, जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
अफवाह निकली बम की खबर
गहन तलाशी के बाद अधिकारियों ने इस धमकी को महज एक अफवाह (Hoax) करार दिया। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद विमान ने देर शाम दिल्ली के लिए उड़ान भरी और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचा। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि वॉशरूम में वह नोट किसने छोड़ा था। इसके लिए यात्रियों की सूची और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
मैसूरु से आरोपी श्रीनिवास गिरफ्तार
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मैसूरु से 47 वर्षीय श्रीनिवास लुइस को गिरफ्तार किया है। उस पर देशभर के स्कूलों, अस्पतालों, उच्च न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों को 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी वाले संदेश भेजने का आरोप है। आरोपी को कर्नाटक के मैसूरु में उसके किराए के मकान से पकड़ा गया।
मानसिक तनाव में था आरोपी
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी श्रीनिवास लुइस मानसिक तनाव से जूझ रहा था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसने ईमेल और अन्य माध्यमों से देशभर में सैकड़ों धमकी भरे संदेश भेजे थे। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली हाई कोर्ट, विधानसभा और कई बड़े संस्थानों को मिली धमकियों के पीछे भी इसी का हाथ बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड ग्रीन कॉरिडोर, जानें खासियत
Asia Longest Wildlife Corridor: दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी को कम करने और यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए तैयार किया गया दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-709B) अब हकीकत बन चुका है।
यह एक्सप्रेसवे केवल ईंट और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत की बदलती तस्वीर और तेज रफ्तार प्रगति का प्रतीक है। वर्षों से लोग दिल्ली-मेरठ मार्ग और संकरी सड़कों पर लगने वाले घंटों के जाम से परेशान थे, लेकिन अब यह नया कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच विकास की एक नई लाइफलाइन साबित होगा।
इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूनों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को समेटे हुए यह प्रोजेक्ट अब अपनी फाइनल फिनिशिंग पर है।
आधारशिला और लागत: ₹12,000 करोड़ का मेगा विजन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2021 में रखी थी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के विजन को धरातल पर उतारते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसे रिकॉर्ड समय में पूरा किया है।
लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 210 किमी लंबा सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे 'भारतमाला परियोजना' का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह आने वाले दशकों तक उत्तर भारत के सबसे व्यस्त और आधुनिक मार्गों में गिना जाएगा।
एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: पर्यावरण और विकास का संतुलन
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी यूएसपी और दुनिया भर में चर्चा का विषय इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है।
यह कॉरिडोर उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर बनाया गया है। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि तेज रफ्तार वाहनों के शोर और मूवमेंट से हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास और उनके रास्तों पर कोई प्रभाव न पड़े।
यह एशिया का अपनी तरह का सबसे लंबा और आधुनिक कॉरिडोर है, जहां जानवरों के लिए विशेष अंडरपास और प्रकाश प्रदूषण को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
विस्तृत रूट मैप: दिल्ली के अक्षरधाम से देहरादून के आशारोड़ी तक
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास से शुरू होता है और लोनी, बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता हुआ देहरादून पहुंचता है।
प्रमुख इंटरचेंज: पूरे मार्ग में 7 बड़े इंटरचेंज दिए गए हैं, जो यात्रियों को अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ने की सुविधा देते हैं।
हरिद्वार के लिए सीधा रास्ता: इस कॉरिडोर की एक विशेष शाखा (स्पर) सहारनपुर के पास से हरिद्वार के लिए निकाली गई है, जिससे दिल्ली से हरिद्वार का सफर भी मात्र 2 घंटे में सिमट जाएगा। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
इंजीनियरिंग की चुनौतियां और तकनीकी खूबियां
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने के लिए इसमें कई तकनीकी चमत्कार किए गए हैं। डाट काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी टनल का निर्माण किया गया है ताकि पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता को नुकसान पहुंचाए बिना रास्ता सुगम बनाया जा सके। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 100 किमी/घंटा निर्धारित की गई है।
सुरक्षा की दृष्टि से इसमें 113 से अधिक अंडरपास और यात्रियों के आराम के लिए 14 अत्याधुनिक जन-सुविधा केंद्र विकसित किए गए हैं, जहां आधुनिक शौचालय, रेस्टोरेंट्स और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशंस की सुविधा उपलब्ध है।
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