खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित, 2 हजार से अधिक लोग लौटे: केंद्र सरकार
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार ने रविवार को बताया कि खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय झंडे वाले जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग के जरिए अब तक 2,084 से ज्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की है, जिनमें से पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से 75 लोग शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत के सभी बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य है और कहीं भी भीड़ या रुकावट की कोई समस्या नहीं है। मंत्रालय विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि नाविकों की सुरक्षा और समुद्री गतिविधियां बिना रुकावट चलती रहें।
शिपिंग कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहा है और शुरू होने के बाद से अब तक 6,053 कॉल और 12,787 से ज्यादा ईमेल संभाल चुका है। पिछले 24 घंटों में 80 कॉल और 112 ईमेल प्राप्त हुए हैं।
इस क्षेत्र में भारतीय दूतावास लगातार भारतीय लोगों के संपर्क में हैं और उनकी मदद कर रहे हैं, साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी सलाह भी दे रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह खाड़ी और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। भारतीय दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं और भारतीय नागरिकों की सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं। समय-समय पर नई जानकारी और सलाह भी दी जा रही है, जिसमें स्थानीय नियम, उड़ानों की स्थिति और कांसुलर सेवाएं शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, दूतावास भारतीय समुदाय, प्रोफेशनल समूहों और कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
जहां हवाई क्षेत्र खुला है, वहां से उड़ानें जारी हैं। 28 फरवरी से अब तक लगभग 8,97,000 यात्री इस क्षेत्र से भारत आ चुके हैं।
यूएई में सुरक्षा और संचालन को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में विशेष उड़ानें चल रही हैं, और आज लगभग 95 उड़ानों की उम्मीद है।
सऊदी अरब और ओमान के कई हवाई अड्डों से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है, इसलिए आज कतर एयरवेज की करीब 8–10 उड़ानें भारत आने की उम्मीद है।
ईरान और इजराइल का हवाई क्षेत्र अभी बंद है। ईरान से भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारत लाया जा रहा है, जबकि इजराइल से लोगों को जॉर्डन और मिस्र के जरिए भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
म्यांमार में मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति बनने पर छिड़ी बहस, जनरल की नियुक्ति पर उठे सवाल
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। म्यांमार की राजनीति में जनरल मिन आंग ह्लाइंग को देश के नए राष्ट्रपति बनाए जाने के बाद बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या यह नागरिक शासन की ओर एक बदलाव है या फिर यह म्यांमार की सेना (जुंटा) शासन की यथास्थिति पहले की तरह जारी रहने वाली है।
कुछ लोग जनरल के सैन्य अनुभव और देश में सुधार की जरूरत की बात करते हैं, लेकिन असलियत यह दिखाती है कि सेना की पकड़ और मजबूत हो रही है।
राजधानी की एक सेना-समर्थक वेबसाइट ने इस बदलाव को “सिविलियन लोकतंत्र की वापसी” बताया, जिससे बहस और तेज हो गई। आलोचकों ने पुराने ऐसे कई उदाहरण सामने रखे हैं, जिनमें जनरल के समय में दमन और सख्ती देखी गई।
एक प्रमुख पोर्टल, ग्लोबल एशिया फोरम, की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में तीन चरणों में चुनाव हुए, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे सिर्फ सेना के शासन को ही औपचारिक रूप दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2021 में सेना ने तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। चुनी हुई संसद को भंग कर दिया गया, सांसदों और नेताओं (राष्ट्रपति विन म्यिंट और आंग सान सू ची भी शामिल थे) को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद विरोध करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की गई।
इसके अलावा सभी लोकतांत्रिक पार्टियों को खत्म कर दिया गया और संसद की एक-चौथाई सीटें सेना के लिए रिजर्व कर दी गईं।
विश्लेषकों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक केंद्रीय मंत्री कथित तौर पर या तो सेवारत अधिकारी हैं या फिर सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नए राष्ट्रपति ने अपने संभावित विरोधियों को हटाकर अपने भरोसेमंद लोगों को आगे बढ़ाया है।
उनके पहले डिप्टी जनरल रहे सोए विन की जगह अब जनरल ये विन ऊ को लाया गया है, जो पहले मिलिट्री सिक्योरिटी में थे और जिन्हें जनरल का बेहद करीबी माना जाता है।
एक विश्लेषक के मुताबिक, सोए विन जैसे पुराने और मजबूत नेता जनरल के लिए चुनौती बन सकते थे, जबकि नए अधिकारी उन पर ज्यादा निर्भर और वफादार माने जाते हैं।
बीबीसी की एक जीवनी के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग धीरे-धीरे सेना में ऊपर बढ़ते गए और 2010 में जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ बने। माना जाता है कि उनकी वफादारी ने उन्हें शीर्ष तक पहुंचाया।
आज जब वे राष्ट्रपति बने हैं, तब म्यांमार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय हालात और लंबे समय से खराब प्रबंधन की वजह से और बढ़ गया है। अब यह देखना बाकी है कि वे इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और अपने पद पर कितने समय तक टिक पाते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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