Iran America War Update: इस्लामाबाद डील फेल होने के 10 बड़े कारण | Islamabad Deal | Ceasefire |Israel
Iran America War Update: इस्लामाबाद डील फेल होने के 10 बड़े कारण | Islamabad Deal | Ceasefire |Israel #iranamericawar #breakingnews #ceasefire #trump #khamenei #mojtabakhamenei #iranisraelwar #pakistannews America-Iran Talk Latest Update: ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल हो गई है. ईरान ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका 'उचित समझौते' के लिए तैयार नहीं होगा, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा. इस्माइल बक़ाई के बयान और जेडी वेंस की पुष्टि के बाद साफ है कि बातचीत बेनतीजा रही. इससे दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा गया है, जंग का खतरा बढ़ गया है और वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका तेज हो गई है. news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_digital SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
हंगरी में संसदीय चुनाव जारी, वोटिंग से पहले ही US ने नए PM का कर दिया ऐलान; जानें यहां कैसे होते हैं इलेक्शन्स
यूरोपीय देश हंगरी में आज संसदीय चुनाव हो रहे हैं. हंगरी में होने वाले चुनाव सिर्फ नई सरकार चुनने तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस चुनाव ने वैश्विक भू-राजनीति में हलचल भी पैदा कर दी है. प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान 16 वर्षों से हंगरी की सत्ता पर काबिज है लेकिन इस बार का चुनाव उनके लिए आसान नहीं होने वाला है. इस बार विक्टर को विपक्षी पार्टी के नेता पीटर माग्यार उनको कड़ी टक्कर दे रहे हैं.
खास बात है कि हंगरी में हो रहे संसदीय चुनाव को अमेरिका और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुला समर्थन दिया है. आरोप है कि अमेरिका इस चुनाव में हस्तक्षेप भी कर रहा है, जिस वजह से यूरोपीय संघ की चिंता बढ़ गई है.
जेडी वेंस ने पहले ही घोषित कर दिया पीएम
पीटर के कड़े मुकाबले के बावजूद, अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने मतदान से पहले ही विक्टर ओर्बान को हंगरी का अगला प्रधानमंत्री घोषित कर दिया है. अमेरिका को डर सता रहा है कि यूरोपीय संघ से बढ़ती अमेरिका की टकरार के बीच अगर ओर्बान हार जाते हैं तो हंगरी पूर्ण रूप से रूसी खेमे का समर्थन कर सकता है.
बता दें, ओर्बान शुरू से ही यूरोपीय संघ की शरणार्थी नीति के विरोधी रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप और विक्टर आर्बान दोनों ही कंजरवेटिव विचारधारा के समर्थक रहे हैं. ट्रंप ओर्बान को डिसरप्टर के रूप में देखते हैं, जो यूरोप को कमजोर कर सकता है.
मौजूदा पीएम और विपक्षी नेता में कांटे की टक्कर
सर्वे में विपक्ष की तिसा पार्टी के नेता पीटर माग्यार को बढ़त के संकेत मिल रहे हैं, जिसने मुकाबले को कड़ा और रोमांचक कर दिया है. इस वजह से अमेरिका विक्टर ओर्बान के समर्थन में सामने आ गया है.
लोकतांत्रिक गिरावट और केंद्रीकृत शासन के आरोपों के बीच, रविवार को होने वाला मतदान ही ये तय करेगा कि यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीति और नाटों की आतंरिक एकता का रुख और उसका भविष्य क्या होने वाला है.
हंगरी में कैसे होता है चुनाव
हंगरी की संसदीय प्रणाली काफी ज्यादा दिलचस्प है क्योंकि ये एकसदनीय यानी (Unicameral) है. आसान भाषा में समझाएं तो वहां भारत की ससंद की तरह दो सदन (लोकसभा और राज्यसभा) नहीं है. वहां सिर्फ एक ही सदन होता है, जिसके 'नेशनल असेंबली' (Országgyűlés) कहा जाता है.
हंगरी का इलेक्शन प्रोसेस आसान भाषा में समझें
हंगरी की संसद में कुल 199 सीटें होती हैं. इन्हीं सीटों को भरने के लिए चुनाव होता है. हंगरी में मिश्रित चुनाव प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है.
106 सीटें (Individual Constituencies)- 199 में से 106 सीटों पर जनता अपने चुने हुए उम्मीदवार को भेजती है. यानी संसदीय क्षेत्र में चुनाव होते हैं और अलग-अलग पार्टी के नेता वहां से खड़े होते हैं, जिस व्यक्ति को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे जीता माना जाता है और वह नेशनल असेंबली की 106 सीटों में से एक सीट पर कब्जा कर लेता है. ये ठीक भारत के लोकसभा चुनाव की तरह है.
93 सीटें (National List)- 199 में से 106 सीटों पर डायरेक्ट चुनाव हुए और अब बची 93 सीटें. इन 93 सीटों को पार्टियों को मिलने वाले कुल वोटों के अनुपात के आधार पर बांटी जाती है.
हंगरी में इस तरह वोट डालते हैं वोटर्स
हंगरी के वोटिंग के दौरान, आम नागरिक दो वोट डालता है. एक वोट वह अपने क्षेत्र के पसंदीदा उम्मीदवार को देता है और दूसरा वोट अपनी पसंदीदा राजनीतिक पार्टी को.
खास बात है कि हंगरी में एक 'विजेता मुआवजा' (Winner Compensation) सिस्टम है. इस सिस्टम के तहत अगर कोई उम्मीदवार जीत जाता है, तो उसके पास बहुमत से ज्यादा जितने भी वोट होते हैं, उन्हें उसकी पार्टी के 'नेशनल लिस्ट' वाले वोटों में जोड़ दिया जाता है. इससे बड़ी पार्टियों को फायदा हो जाता है.
हंगरी में इस प्रकार होता है प्रधानमंत्री का चुनाव
हंगरी में प्रधानमंत्री पद का चुनाव सीधे जनता नहीं करती है. बल्कि संसद के सदस्य करते हैं. ठीक भारत की तरह. चुनाव खत्म होने के बाद हंगरी के राष्ट्रपति उस पार्टी नेता के नाम को प्रस्तावित करते हैं, जिसकी पार्टी ने चुनाव में सबसे अधिक सीटे जीतीं हैं. राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित नाम पर संसद के सभी 199 सदस्य वोट डालते हैं. प्रधानमंत्री बनने के लिए उम्मीदवार को संसद के आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना जरूरी है. बहुमत हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री पद की नियुक्ति हो जाती है और वह अपने कैबिनेट मंत्रियों का चुनाव करता है.
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