पोषक तत्वों से भरपूर पेड़ों पर फलने वाली 'जंगल जलेबी', इम्युनिटी बूस्ट कर हड्डियों को बनाती है मजबूत
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। मीठी-मीठी मिठाई जलेबी तो आपने खूब खाई होगी। लेकिन पौष्टिक तत्वों से भरपूर पेड़ों पर फलने वाली जंगल जलेबी के बारे में शायद ही सुना हो। इस अनोखे फल का आयुर्वेद में खासा स्थान है। इसका स्वाद मीठे-खट्टे का मिश्रण है, जो सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।
आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और हड्डियों को मजबूत बनाने में खासा मददगार है। जंगल जलेबी का वैज्ञानिक नाम पीथेसेलोबियम डल्स है। इसे मनीला तमरिंद या मद्रास थॉर्न के नाम से भी जाना जाता है। यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ है, जिसकी फलियां मुड़ी हुई और जलेबी की तरह दिखती हैं। पकने पर ये फलियां लाल या गुलाबी रंग की हो जाती हैं। अंदर सफेद गूदेदार पल्प होता है, जिसमें मीठा-खट्टा स्वाद होता है। एक फली में करीब 10 बीज होते हैं।
यह फल पौष्टिक तत्वों का खजाना है। इसमें आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जो एनीमिया से बचाता है और एनर्जी बढ़ाता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं। विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह इम्युनिटी बूस्ट करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। एंटीऑक्सीडेंट्स (फ्लेवोनॉयड्स, पॉलीफेनॉल्स) शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करते हैं, सूजन घटाते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
पाचन की दृष्टि से भी यह फल बेहद उपयोगी है। इसमें डाइटरी फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज दूर करता है, आंतों को स्वस्थ रखता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। कई अध्ययनों में इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल और ब्लड डायबिटीज नियंत्रित करने वाले गुण भी पाए गए हैं।
पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल पेट की समस्याओं, बुखार और त्वचा संबंधी परेशानियों में किया जाता है। इसके अलावा, कांटेदार होने के कारण यह पेड़ फेंसिंग और बाड़ के रूप में भी उपयोगी है। यह तेजी से बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करता है। गर्मियों में सड़क किनारे या बाजार में आसानी से उपलब्ध यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद है।
खास बात है कि इसे कच्चा खाया जा सकता है या जूस बनाकर पिया जा सकता है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका के साथ वार्ता फेल होने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से हुआ रवाना
इस्लामाबाद, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच घंटों की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। गैर-नतीजतन वार्ता खत्म होने के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया है। इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अपने देश लौटने के लिए इस्लामाबाद से निकल गए।
बता दें, ईरानी प्रतिनिधिमंडल में कुल 71 लोग शामिल थे। मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरानी डेलिगेशन में पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल थे और वार्ता खत्म होने के बाद ये सभी पाकिस्तान से निकल गए हैं।
वहीं घाना में ईरानी दूतावास ने अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, यूएस अपने उपराष्ट्रपति को आधी दुनिया पार करके इस्लामाबाद ले गया। 21 घंटे की बातचीत हुई। उन्होंने हर वो चीज मांगी जो वे जंग से हासिल नहीं कर सकते थे। ईरान ने पूरी तरह से ना कहा। बातचीत खत्म हो गई है। स्ट्रेट अभी भी बंद है और उपराष्ट्रपति खाली हाथ घर लौट रहे हैं। अब बस फिर से ईरान की बात करेंगे। उनके पास अपनी इज्जत बचाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए ईरानी दूतावास के एक्स हैंडल ने जवाब दिया, वे स्टॉपवॉच लेकर कमरे में आए। हम कैलेंडर लेकर बैठ गए। नतीजे पर कभी शक नहीं हुआ।
ईरानी दूतावास का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान समय का दबाव बना रहा था। उन्हें फैसला जल्दी चाहिए था। वहीं ईरान लंबी रणनीति के साथ बैठा था। ईरान धैर्य के साथ बात करना चाहता था।
इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकई ने कहा कि देश अमेरिका के पिछले वादे तोड़ने को न भूला है और न भूलेगा। इससे इस्लामाबाद में बातचीत जारी रहने के बावजूद गहरे अविश्वास का पता चलता है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी एक राउंड की बातचीत में नतीजे की उम्मीद नहीं की थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक डिटेल्ड पोस्ट में इस्माइल बाकई ने कहा, “हमारे लिए कूटनीति (डिप्लोमेसी) ईरानी सरजमीं के रक्षकों के संघर्ष को जारी रखना है। हम अमेरिका द्वारा वादों को तोड़ने और उसके पिछले कड़वे अनुभवों को न तो भूले हैं और न ही कभी भूलेंगे। ठीक उसी तरह, जैसे हम दूसरे और तीसरे थोपे गए युद्धों के दौरान उनके और यहूदी शासन द्वारा किए गए जघन्य अपराधों को कभी क्षमा नहीं करेंगे।। हालांकि, ईरान बातचीत की शुरुआत से पहले भी दोहराता रहा है कि अमेरिका के साथ विश्वास की कमी है।
उन्होंने बातचीत को तेज और लंबा बताते हुए कहा, आज इस्लामाबाद में ईरान के डेलिगेशन के लिए एक व्यस्त और लंबा दिन था। शनिवार सुबह से पाकिस्तान की अच्छी कोशिशों और बीच बचाव से शुरू हुई गहरी बातचीत अब तक बिना किसी रुकावट के जारी है और दोनों पक्षों के बीच कई मैसेज व टेक्स्ट एक्सचेंज हुए।
ईरानी डेलिगेशन के पक्के इरादे पर जोर देते हुए, बाकई ने कहा, ईरान की ओर से बातचीत करने वाले ईरान के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अपनी पूरी काबिलियत, अनुभव और जानकारी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारे बड़े-बुजुर्गों, प्रियजनों और साथी देशवासियों के भारी नुकसान ने ईरानी देश के हितों और अधिकारों को आगे बढ़ाने के हमारे इरादे को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया है।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















