जेन-जी आंदोलन के बाद पार्टियां रणनीति बदल रहीं:2027 में 7 राज्यों में चुनाव, 22% वोटर जेन-जी; 5% इधर-उधर हुए तो सरकारें बदल सकती हैं
अगले साल 7 राज्यों (यूपी, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, मणिपुर और गोवा) में विधानसभा चुनाव हैं। लेकिन इस बार जेन-जी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला- जुलाई में दिल्ली में हुए जेन-जी आंदोलन से बदले हालात। दूसरा- बिहार के बांकीपुर और मध्यप्रदेश के दतिया में उपचुनाव के चौंकाने वाले नतीजे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव में अब महिला, पिछड़ा, किसान व दलित जैसे ही जेन-जी एक नया वर्ग जुड़ गया है। इन सभी चुनावी राज्यों में करीब 22% मतदाता जेन-जी हैं, यानी 18 से 29 आयु वर्ग के हैं। जो किसी भी पार्टी का समीकरण बदल सकते हैं। 7 राज्यों के पिछले चुनाव में 257 सीटों पर 5% वोट मार्जिन रहा अगर पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े देखें तो इन 7 राज्यों की कुल 940 सीटों में से 257 सीटें (27%) ऐसी थीं, जहां जीत का अंतर 5% या उससे कम था। इस आधार पर कह सकते हैं कि अगर 22% जेन-जी वोटर्स में से 5% भी एकजुट होकर किसी पार्टी के पाले में चले गए तो सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। उत्तरप्रदेश की 403 में से 131 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत का मार्जिन 5% से कम था। इसी तरह गुजरात की 182 में से 27, पंजाब की 117 में से 24, उत्तराखंड की 70 में से 15 और हिमाचल की 68 में से 14 सीटों पर वोट मार्जिन 5% से कम था। यही वजह है कि राजनीतिक दल अब अपनी पूरी रणनीति जेन-जी वोटर्स के इर्द-गिर्द बुनने में लग गए हैं। भाजपा, कांग्रेस और सपा ने इसकी मुहिम शुरू कर दी है। युवाओं का नया वर्ग जाति-धर्म के समीकरण बिगाड़ सकता है देश की सियासत में लंबे समय बाद जाति और धर्म आधारित पार्टियों के समीकरण बिगड़ सकते हैं। क्योंकि, युवाओं का नया वर्ग तेजी से उभरा है। आगामी चुनावों में अभी 6-7 महीने बचे हैं, अब देखना ये है कि तब तक यह युवा सेंटिमेंट कितना मजबूत रहता है। अगर ये सेंटिमेंट बरकरार रहा या और बढ़ा तो हरेक पार्टी अगले कुछ ही हफ्तों में पांच बदलाव करने को मजबूर होगी। राजनीतिक पार्टियां अगले कुछ हफ्तों में पांच बदलाव करने को मजबूर 1. युवाओं पर फोकस्ड राजनीति शुरू होगी: भास्कर एक्सपर्ट के मुताबिक पहले घोषणापत्र में युवाओं के सिर्फ मुद्दे होते थे, पर अब रोजगार व स्किल डेवलपमेंट जैसे विषय सीधे भाषणों में होंगे। दलों को सिर्फ बेरोजगारों को भत्ता देने के बजाय यह समझाना होगा कि वे रोजगार और कौशल विकास कैसे बढ़ाएंगे। जो दल रोजगार, शिक्षा, डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट के मुद्दे उठाएगा, युवा उसी के साथ जाएंगे। 2. जाति-धर्म समीकरण: अगर यही माहौल रहा, तो जेन-जी के मुद्दों के कारण जातिगत और धार्मिक समीकरण काफी हद तक बिखर जाएंगे। युवा भी अब तक जाति-धर्म के आधार पर बंटे हुए थे। अब बदलाव दिख रहा है। चुनाव में जाति का बोध थोड़ा-बहुत तो रहेगा ही, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और प्रतिनिधित्व में उसका असर साफ दिखेगा। पार्टियां सेल्फ-मेड युवाओं को अधिक टिकट देंगी, जिससे जेन-जी को चुनावी मैदान में बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके। 3. महिलाओं जैसा बदलाव: जैसे महिलाओं ने जातिगत समीकरण तोड़कर एनडीए को वोट दिए, युवा भी किसी एक तरफ जा सकते हैं। 4. मुफ्त योजनाओं से दूरी: युवाओं को मुफ्त की रेवड़ी या लुभावनी योजनाएं नहीं चाहिए, बल्कि वह दलों से ठोस समाधान चाहता है। 5. व्यावहारिक वादे: राजनीतिक पार्टियां आगामी चुनावों में ऐसे व्यावहारिक वादे करेंगी, जिन्हें धरातल पर उतारा जा सके। मोदी से लेकर भागवत तक, सभी युवाओं से सीधे जुड़ रहे... कांग्रेस-सपा भी पीछे नहीं भाजपा: पीएम मोदी समेत सभी नेता इंस्टाग्राम पर आने लगे पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक पूरी तरह युवाओं पर केंद्रित थी, जिसमें रोजगार को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया। पार्टी के मोर्चों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जेन-जी से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सुनें, उनका समाधान करें और इस पीढ़ी के साथ लगातार संपर्क बढ़ाएं। आरएसएस: भागवत का जेन-जी प्रोग्राम संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को जेन-जी व जेन-अल्फा के साथ प्रोग्राम किया। संघ ने एप के जरिए हर महीने 10 हजार नए युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, किशोर गण और तरुण गण शाखाओं के माध्यम से जेन-जी की सहभागिता पर विशेष ध्यान दे रहा है। एबीवीपी: 80 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा 80 लाख सदस्य बनाने के लिए स्कूल-कॉलेज से निकलकर आगे कोचिंग सेंटर्स और क्लबों तक पहुंच रहा है। करियर गाइडेंस केंद्र खोलेगा। कांग्रेस: आंदोलनकारियों को वकील दिलवाएंगे प्रियंका गांधी वाड्रा की निगरानी में कन्हैया कुमार व जिग्नेश मेवानी दिल्ली के आंदोलनकारी युवाओं के संपर्क में हैं। 150 वकीलों का नेटवर्क बनाया गया है। छोटे वीडियो, पीपीटी, पॉडकास्ट और ‘छात्रों की गूंज’ जैसे संवाद कार्यक्रम होंगे। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस ने भी कई कार्यक्रम शुरू किए। सपा: डिंपल यादव को जिम्मा सौंपा गया सांसद डिंपल यादव जिम्मेदारी संभालेंगी। लगातार संवाद, कैंपस में कार्यक्रम। युवजन सभा और समाजवादी छात्र सभा के जरिए अभियान चलाएंगी।
Weekly Numerology Horoscope 10 To 16 August 2026: इस हफ्ते मूलांक 1 चुनौतियों का करेंगे सामना, अंक 6 रहेंगे असुरक्षित! कैसा रहेगा अपका सप्ताह? पढ़ें अंक ज्योतिष
Weekly Numerology Horoscope 10 To 16 August 2026: अगस्त का नया सप्ताह 10 तारीख से 16 तक है. इस सप्ताह में मूलांक 1 वालों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ये 7 दिन आपके लिए काफी कठिन हो सकते हैं. वहीं मूलांक 6 वाले लोग इस हफ्ते खुश को असुरक्षित महसूस कर सकते हैं. आपके लिए कैसा रहेगा नया सप्ताह? जानें अपना साप्ताहिक अंक ज्योतिष.
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