बलूचिस्तान में उड़ाई गई मुख्य गैस पाइपलाइन, सप्लाई बाधित
इस्लामाबाद, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। बलूचिस्तान प्रांत के सिबी जिले और उसके आस-पास के इलाकों में गैस सप्लाई तब रुक गई जब कुछ हथियारबंद लोगों ने एक पाइपलाइन में विस्फोट कर दिया।
स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से ये जानकारी दी। सूत्रों के हवाले से, पाकिस्तानी अखबार डॉन ने बताया कि गुरुवार देर रात सिबी शहर के बाहरी इलाके में चार इंच डायमीटर वाली गैस पाइपलाइन में धमाका हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई।
सुई सदर्न गैस कंपनी (एसएसजीसी) के इंजीनियरों ने क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से गैस सप्लाई रोक दी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा बल अन्य एजेंसियों के साथ, मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों के मुताबिक, धमाके की वजह और प्रकृति का पता लगाने के लिए जांच चल रही है, इलाके को घेर लिया गया है और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं।
यह घटना कुछ दिनों पहले वेस्टर्न बाईपास इलाके में मुख्य गैस पाइपलाइन पर हुए धमाके की तरह अंजाम दी गई। इसी तरह के हमले के बाद क्वेटा और बलूचिस्तान के कई जिलों में गैस सप्लाई बंद कर दी गई थी।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, एसएसजीसी के प्रवक्ता ने कहा, अज्ञात लोगों ने अख्तराबाद इलाके में 18 इंच डायमीटर वाली मुख्य गैस पाइपलाइन में धमाका कर दिया। पुलिस ने कहा कि हथियारबंद लोगों ने 30 मार्च की शाम को गैस पाइपलाइन के नीचे एक एक्सप्लोसिव डिवाइस लगाया और उसे उड़ा दिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने कहा कि पाइपलाइन में आग लगने के बाद क्वेटा और बलूचिस्तान के कई हिस्सों में गैस सप्लाई रोक दी गई थी।
एसएसजीसी के प्रवक्ता ने कहा कि हजारा टाउन, पिशिन, जियारत, कलात, मस्तुंग, हजारगंजी, खैजी, नोहसर और कुचलक में गैस सप्लाई पर असर पड़ा।
डॉन ने रिपोर्ट में बताया कि एसएसजीसी अधिकारियों ने कहा, ब्लास्ट से गैस पाइपलाइन का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया। उन्होंने कहा कि अधिकारी इलाके में पहुंच गए हैं और सिक्योरिटी क्लियरेंस के बाद पाइपलाइन की मरम्मत का काम शुरू होगा।
डॉन ने रिपोर्ट किया कि घटना के बाद, क्वेटा में गैस फैसिलिटीज पर भारी सिक्योरिटी बल को तैनात किया गया था।
इस बीच, 9 अप्रैल को, बलूचिस्तान के तुर्बत में पाकिस्तानी फोर्स पर हमला किया गया, जहां एक बलूच हथियारबंद गुट ने पहले रोड ब्लॉक कर दिया था।
सूत्रों के हवाले से, द बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया कि हमला तब हुआ जब ग्रुप ने तुर्बत के बाहरी इलाके में करीब तीन घंटे तक सड़क ब्लॉक की, फिर पास की एक पुलिस पोस्ट पर कब्जा कर हथियार जब्त कर लिए थे।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-इजरायल के बीच रिश्तों को नई दिशा देने की जरूरत, सामाजिक स्तर पर साझेदारी मजबूत करने की जरूरत
तेल अवीव/नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और इजरायल को ज्यादा मजबूत, सामान्य और आगे की सोच वाली साझेदारी बनाने के लिए अपना सामाजिक आधार बढ़ाना होगा।
पिछले एक दशक में भारत-इजरायल के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं, लेकिन अब इन्हें टिकाऊ बनाने की चुनौती है। इसके लिए दोनों देशों को अपने सामाजिक आधार का विस्तार करना चाहिए।
भारत और इजरायल के बीच संबंधों को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए केवल रणनीतिक स्तर ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहराई लाने की जरूरत है। इसके लिए छात्रों, पेशेवरों, कामगारों, कलाकारों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और स्थानीय समुदायों के बीच रोजमर्रा के संवाद और भागीदारी में गंभीर निवेश जरूरी है।
द जेरूशलम पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-इजरायल संबंध लंबे समय से रक्षा, कृषि, खुफिया, तकनीक और व्यापार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित रहे हैं। नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में इजरायल यात्रा ने इस साझेदारी को और मुख्यधारा में ला दिया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधों के अगले चरण को स्थायी बनाने के लिए इन्हें सिर्फ सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आधिकारिक दौरे और समझौते संबंधों को गति तो देते हैं, लेकिन भरोसा, आपसी समझ और दीर्घकालिक स्वीकृति समाज के भीतर रोजमर्रा के संपर्कों से ही बनती है—जैसे कक्षाओं, कार्यस्थलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समुदायों में।
रिपोर्ट के अनुसार, आज भी कई भारतीय इजरायल को मुख्य रूप से भू-राजनीति और संघर्ष के नजरिए से देखते हैं, जबकि कई इजरायली भारत को व्यापक सांस्कृतिक या पर्यटन दृष्टिकोण से समझते हैं। इस वजह से रणनीतिक और सामाजिक समझ के बीच एक अंतर बना हुआ है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि जनमत ही यह तय करता है कि संकट के समय दोनों समाज कैसे प्रतिक्रिया देंगे और क्या वे संबंधों को सिर्फ लेन-देन के रूप में देखते हैं या एक सार्थक साझेदारी के रूप में।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि छोटे-छोटे सामाजिक संपर्क—जैसे छात्र विनिमय, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साझा त्योहार या कार्यस्थल की दोस्ती—वास्तव में दोनों देशों के बीच मानवीय जुड़ाव को मजबूत करते हैं, जो कूटनीतिक प्रयासों से हमेशा संभव नहीं होता।
इसका नतीजा यह निकला कि भारत-इजरायल संबंधों का भविष्य सिर्फ रक्षा कॉरिडोर और डिप्लोमैटिक मीटिंग्स में ही नहीं, बल्कि किचन, कैंपस, वर्कप्लेस और डिजिटल स्पेस में भी तय होगा। यहीं पर जान-पहचान बढ़ती है, भरोसा ज्यादा मजबूत होता है, और यहीं पर रणनीतिक साझेदारी इंसानी गहराई हासिल करती है।”
--आईएएनएस
केके/वीसी
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