Responsive Scrollable Menu

बढ़ती उम्र में मसल्स का ख्याल रखना क्यों है जरूरी? जानें वजह

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं. ऐसे में मसल्स की देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. लापरवाही करने पर कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. आइए इस बारे में डिटेल में समझते हैं.

Continue reading on the app

त्रिपुर वध की पौराणिक कथा: जानिए कैसे भगवान शिव ने एक ही बाण से किए असुरों के तीन मायावी नगर ध्वस्त

Tripur Vadh Lord Shiva story: तारकासुर के वध के बाद उसके तीन पराक्रमी पुत्रों- तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने और तीनों लोकों पर अधिकार करने के लिए ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और वर मांगने को कहा।

असुरों ने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि मृत्यु इस संसार का अटल सत्य है, इसलिए कोई अन्य वरदान मांगो। तब उन तीनों भाइयों ने एक चालाकी भरी शर्त रखी। उन्होंने कहा कि उनके लिए तीन अलग-अलग मायावी नगरों (एक सोने का, एक चांदी का और एक लोहे का) का निर्माण किया जाए, जो आकाश में घूमते रहें। हजार वर्षों में वे तीनों नगर एक सीध में आएं और केवल एक ही बाण (एकसंधान) द्वारा जो भगवान शिव को समर्पित हो, उनका अंत कर सके। ब्रह्मा जी ने उन्हें यह वरदान दे दिया।

त्रिपुर का आतंक और देवताओं की प्रार्थना
वरदान मिलते ही मय दानव ने उनके लिए तीन अत्यंत सुंदर और अजेय नगर (त्रिपुर) बना दिए। इन नगरों में बैठकर वे असुर तीनों लोकों में आतंक मचाने लगे और साधु-संतों व देवताओं को प्रताड़ित करने लगे। उनके पास ऐसी माया थी कि वे पलभर में गायब हो जाते थे।

जब इन तीनों असुरों का अत्याचार चरम पर पहुंच गया, तो सभी देवता भयभीत होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे और त्राहि-त्राहि करते हुए रक्षा की गुहार लगाई। देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने उन असुरों के संहार का संकल्प लिया।

शिवजी का दिव्य रथ और त्रिपुर का अंत
भगवान शिव ने त्रिपुर का नाश करने के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया- पृथ्वी को रथ बनाया, सूर्य और चंद्रमा उसके पहिए बने, मेरु पर्वत धनुष बना और स्वयं विष्णु जी उस धनुष की प्रत्यंचार (डोरी) बने। अग्नि देव उस बाण की नोक बने।

भगवान शिव अपने इस ब्रह्मांडीय रथ पर सवार होकर युद्ध भूमि में पहुंचे। वे उस क्षण की प्रतीक्षा करने लगे जब तीनों मायावी नगर वर्ष में एक बार आकाश में एक सीध में (अभिजित मुहूर्त में) आएं। जैसे ही वे तीनों नगर एक सीध में आए, शिवजी ने अत्यंत शांत मुद्रा में अपना पाशुपत अस्त्र चलाया। भगवान शिव के उस एकमात्र महा-बाण ने तीनों नगरों को पलभर में जलाकर राख कर दिया और असुरों का अहंकार समाप्त हो गया। इसी घटना के बाद भगवान शिव को 'त्रिपुरारी' और 'त्रिपुरंतक' के नाम से जाना गया।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा शिव पुराण और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक सनातन धर्म की पावन कथाओं और उनके आध्यात्मिक संदेशों को पहुंचाना है।

Continue reading on the app

  Sports

आशीष कुमार को लेकर मचा बवाल, शिकायत के बाद GFI ने लिस्ट से ही नाम काट दिया

भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ (GFI) की चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद बड़ा बदलाव किया गया है. राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के पदक विजेता आशीष कुमार और जिम्नास्ट आदित्य राणा का नाम स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ मेरिट (SOM) की संशोधित सूची से हटा दिया गया है. दोनों को पहले अस्थायी सूची में जगह मिली थी। शिकायतों के बाद खेल मंत्रालय ने GFI से जवाब मांगा था. नियमों के मुताबिक SOM में शामिल होने के लिए खिलाड़ी को आवेदन से कम से कम एक साल पहले संन्यास लेना जरूरी है. GFI ने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद जरूरी सुधार किए गए हैं. Tue, 11 Aug 2026 15:53:55 +0530

  Videos
See all

पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह? पुलिस ने आरोपी को Encounter में पकड़ा | uttar pradesh | Lakhimpur #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T11:16:13+00:00

Chamoli Cloudburst: चमोली में बादल फटने से भारी तबाही | Niti Valley | Bailey Bridge #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-11T11:17:10+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers