ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने में करना पड़ रहा संघर्ष: रिपोर्ट
वाशिंगटन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। पहले से ही तनावपूर्ण जियोपॉलिटिकल माहौल में एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि ईरान को हाल की लड़ाइयों के दौरान समुद्री माइंस बिछाने के बाद स्ट्रेटेजिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने यूएस अधिकारियों के हवाले से बताया कि तेहरान उन सभी माइंस का पता नहीं लगा पा रहा है जिन्हें उसने जरूरी शिपिंग कॉरिडोर में लगाया है। इससे समुद्री सुरक्षा और ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है।
होर्मुज की खाड़ी, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ती है, दुनिया के सबसे जरूरी तेल ट्रांजिट रास्तों में से एक है, जहां दुनिया भर के तेल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा जाता है। भारत जैसे देशों के लिए, यह निर्भरता और भी ज्यादा है, क्योंकि उसके एनर्जी इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा इसी पतले चैनल से होकर गुजरता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पिछले महीने छोटी नावों का इस्तेमाल करके माइंस लगाई थीं; यह तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यूएस और इजरायल के जॉइंट एयरस्ट्राइक के तुरंत बाद हुआ था। हालांकि, अब अधिकारियों का मानना है कि माइनिंग ऑपरेशन को शायद सिस्टमैटिक तरीके से डॉक्यूमेंट नहीं किया गया होगा। कुछ डिवाइस, रिकॉर्ड होने पर भी, इस तरह से लगाए गए थे कि वे इधर-उधर बहते रहे, जिससे उनका पता लगाना और हटाना काफी मुश्किल हो गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस अधिकारियों ने माइनिंग की कोशिश को “बेतरतीब” बताया और कमर्शियल शिपिंग के खतरों की ओर ध्यान दिलाया।
इस स्थिति ने डिप्लोमैटिक कोशिशों, खासकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही अति अहम बातचीत पर भी असर डाला है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने चेतावनी जारी की थी कि स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज समुद्री माइन से टकरा सकते हैं। हालांकि, इसने टोल देने वाले जहाजों के आने-जाने के लिए दूसरा रास्ता खुला छोड़ दिया है।
चिंताओं को और बढ़ाते हुए, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जहाजों को संभावित खतरे की चेतावनी देते हुए एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की है।
आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को यह बताया जाता है कि समुद्री सुरक्षा के नियमों का पालन करने और समुद्री माइन के संभावित टकराव से बचने के लिए… उन्हें होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक के लिए दूसरे रास्ते अपनाने की सलाह दी जाती है।”
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तय डेडलाइन से ठीक पहले ईरान ने सीजफायर के बाद स्ट्रेट को फिर से खोलने की सहमति दी, लेकिन माइंस को तेजी से साफ न कर पाने की वजह से नॉर्मल शिपिंग ऑपरेशन को पूरी तरह से फिर से शुरू करने में देरी हुई है। अधिकारियों ने इसके बजाय रिस्क कम करने के लिए दूसरे नेविगेशन रूट सुझाए हैं।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
लघु सूतशेखर रस: पेट की जलन से लेकर पित्त शांत करने तक, गुणकारी है आयुर्वेद की यह औषधि
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की जीवनशैली में जहां खाने-पीने से लेकर सेहत के लिए समय नहीं निकल पाते हैं, वहां पेट से जुड़ी समस्याएं होना आम बात है।
पेट की मंद गति शरीर में कई रोगों का कारण बनती है और पेट में बार-बार दर्द होना, गैस बनना, कब्ज होना हर दिन की परेशानी हो जाती है, लेकिन पेट से जुड़ी हर समस्या का समाधान आयुर्वेद में छिपा है। ऐसे में आयुर्वेद लघु सूतशेखर रस की सलाह देता है, लेकिन चिकित्सक की सलाह के बाद ही।
लघु सूतशेखर रस आयुर्वेद की सबसे गुणकारी जड़ी बूटी है, जो बाजार में चूर्ण और वटी दोनों के रूप में मिल जाती है। इसे पारद, गंधक, भस्म, कपूर, दालचीनी, इलायची, नागकेसर, सौंठ और पान के पत्तों के रस को मिलाकर बनाया जाता है। बहुत सारी जड़ी-बूटियों के शामिल होने की वजह से उनके सेवन की सलाह देना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद में पेट में जुड़े रोगों के पीछे पित्त बढ़ने को सबसे बड़ा कारण माना गया है। पित्त बनने शरीर में पित्त अधिक बनता है तो सिर दर्द से लेकर पेट में दर्द की परेशानी बढ़ने लगती है।
लघु सूतशेखर रस का मुख्य काम पित्त को शांत करना ही होता है। लघु सूतशेखर रस के सेवन से एसिडिटी में राहत मिलती है, गैस और अपच में सुधार होता है, माइग्रेन और सिरदर्द में भी राहत मिलती है, उल्टी या मतली आने की परेशानी भी कम होती है और पेट में अम्ल बनने की प्रक्रिया भी कम होती है।
लघु सूतशेखर रस के सेवन के साथ ही जीवनशैली में बदलाव करने भी जरूरी है। आहार में ज्यादा तीखा, अधिक मसालेदार, तैलीय और वसा युक्त खाना कम खाएं। इससे पेट में जलन और अम्ल अधिक बढ़ सकती हैं। खाली पेट चाय और कॉफी के सेवन से बचें। खाली पेट चाय पेट को नुकसान पहुंचाती है, जिससे जलन और एसिडिटी बढ़ती है।
अगर आप देर रात को खाते हैं, तो यह आदत भी पेट और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे नींद और पाचन दोनों प्रभावित होते हैं। देर रात खाना खाने की वजह से शरीर मरम्मत का काम छोड़ पाचन में व्यस्त हो जाता है, जिससे नींद नहीं आती और पूरा शरीर भारी महसूस होता है। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि बिना चिकित्सक की सलाह के इसका इस्तेमाल न करें। गर्भवती महिलाएं और बच्चे भी बिना सलाह के सेवन से बचें।
--आईएएनएस
पीएस/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















