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शांति की बात या युद्ध की तैयारी? इस्लामाबाद वार्ता के बीच ट्रंप ने भेजे जंगी जहाज, 50000 सैनिक तैनात

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता होने जा रही है। लेकिन मिडिल ईस्ट में 50,000 अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और ट्रंप की चेतावनी से युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। जानिए ईरान की शर्तें और अमेरिका की दोहरी रणनीति।

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US Kuwait Base Attack | पेंटागन बनाम जमीनी हकीकत! कुवैत बेस हमले में बचे सैनिकों ने खोली सैन्य दावों की पोल

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना और पेंटागन के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। 1 मार्च को कुवैत के शुएबा बंदरगाह (Shuaiba Port) पर हुए ईरानी ड्रोन हमले में बाल-बाल बचे अमेरिकी सैनिकों ने पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी सरकार के दावों को "झूठ" करार दिया है।
इजरायल और अमेरिका (US) के एक संयुक्त हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के जवाब में - जिससे आखिरकार मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू हुआ - ईरान ने इस इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसमें कुवैत का शुएबा बंदरगाह भी शामिल था, जिस पर 1 मार्च को हमला किया गया था। इस हमले में अमेरिकी सेना के रिज़र्व के छह सदस्य मारे गए और 20 अन्य घायल हो गए। यह इस संघर्ष में अमेरिका को हुआ पहला नुकसान था। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा था कि यह हमला एक ईरानी "स्क्वर्टर" ड्रोन का इस्तेमाल करके किया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि यह ड्रोन उस "मज़बूती से किलेबंद" बेस पर लगे हवाई सुरक्षा सिस्टम को चकमा देने में कामयाब रहा था। लेकिन हमले में बच निकले लोगों ने, अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति में, पेंटागन द्वारा बताई गई घटनाओं की जानकारी को गलत बताया और कहा कि उनकी यूनिट - 103वीं सस्टेनमेंट कमांड - "तैयार नहीं" थी।
 

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CBS News से बात करते हुए, एक घायल सैनिक ने कहा कि यूनिट अपनी खुद की सुरक्षा करने के लिए "तैयार नहीं" थी। उसने यह भी बताया कि वह बेस कोई "किलेबंद" जगह नहीं थी। नाम न बताने की शर्त पर उस सैनिक ने कहा, "यह दिखाना कि 'एक ड्रोन किसी तरह बचकर अंदर घुस आया' - यह बात बिल्कुल गलत है।"

'सब कुछ हिल गया'
अमेरिकी सैनिकों ने दावा किया कि उनकी यूनिट को ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों की मारक सीमा के और करीब ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सुबह मिसाइल हमले की चेतावनियाँ मिलने के बाद उनकी यूनिट ने सुरक्षित जगहों पर पनाह ले ली थी, लेकिन ड्रोन हमले से ठीक पहले "खतरा टल जाने का संकेत (all-clear signal) दे दिया गया था।" एक सैनिक ने CBS News को बताया कि इसके तीस मिनट बाद ड्रोन हमला हुआ और "सब कुछ ज़ोर से हिल गया।"

उस सैनिक ने कहा, "यह कुछ-कुछ वैसा ही था जैसा आप फिल्मों में देखते हैं। आपके कानों में ज़ोर की गूंज होती है। सब कुछ धुंधला सा लगता है। आपकी नज़र धुंधली हो जाती है। आपको चक्कर आने लगते हैं। हर तरफ धूल और धुआँ ही धुआँ होता है।" उसने आगे कहा, "सिर में चोटें, बहुत ज़्यादा खून बहना, कई लोगों के कान के पर्दे फट जाना, और हर तरफ बम के टुकड़े (छर्रे) बिखरे होना - लोग अपने पेट, हाथों और पैरों से खून से लथपथ थे।"

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'एक जाना-पहचाना टारगेट'
अमेरिकी सैनिकों को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू होने से ठीक एक हफ़्ता पहले ही जॉर्डन और सऊदी अरब में तैनात होने के निर्देश दे दिए गए थे। उन्हें ईरानी ड्रोन और मिसाइलों की रेंज से दूर रहने की सलाह दी गई थी, लेकिन 103वीं सस्टेनमेंट कमांड के कई सैनिकों को छोटे शुएबा बंदरगाह के मिलिट्री आउटपोस्ट पर जाने का निर्देश दिया गया।

सैनिकों ने इसे "एक क्लासिक, पुराना मिलिट्री बेस" बताया, जहाँ छोटे-छोटे बैरियर थे और कामचलाऊ दफ़्तरों के लिए "टीन की छोटी-छोटी इमारतें" थीं। उन्होंने कहा कि यह बेस "एक जाना-पहचाना निशाना" था और वे सीधे खड़े ब्लास्ट बैरिकेड्स की एक पतली-सी लाइन के अलावा किसी और चीज़ से सुरक्षित नहीं थे।

एक सैनिक ने CBS News को बताया "हम ईरान के और करीब चले गए, एक बेहद असुरक्षित इलाके में, जो एक जाना-पहचाना निशाना था। मुझे नहीं लगता कि इसके पीछे कभी कोई ठोस वजह बताई गई।" सैनिक ने आगे कहा मेरा मतलब है, मैं इसे 'कुछ नहीं' की श्रेणी में रखूँगा। ड्रोन से बचाव की क्षमता के मामले में... कुछ भी नहीं।

हमले के बारे में सैनिकों का जो ब्योरा है, वह पेंटागन के बयान के ठीक उलट है; पेंटागन ने यह भी दावा किया था कि सैनिकों को तुरंत राहत पहुँचाई गई थी। हालाँकि, सैनिकों ने इस बात से इनकार किया और कहा कि घायल सैनिकों को प्राथमिक उपचार उन्होंने खुद ही दिया था। इससे पहले, अमेरिका की एक मीडिया रिपोर्ट में भी इसी तरह के दावे किए गए थे, जिसमें यह सवाल उठाया गया था कि क्या उस बेस पर हवाई सुरक्षा प्रणालियाँ (air defence systems) लगाई गई थीं। अब तक, अमेरिका की सेना या पेंटागन के किसी भी अधिकारी ने सैनिकों के इन दावों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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  Sports

IPL 2026: RCB के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी का धमाल, हारने के बाद विराट कोहली ने दिया ये खास तोहफा

आईपीएल 2026 में 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी हर दिन एक नई कहानी लिख रहा है। वह आए दिन अपने बल्ले से सभी को प्रभावित कर रहे हैं। वैभव ने आरसीबी के खिलाफ खेले गए मुकाबले में 26 गेंदों में 78 रन की पारी खेलकर आरसीबी के गेंदबाजों की पूरी रणनीति पर पानी फेर दिया। 

शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए वैभव सूर्यवंशी ने पावरप्ले में ही मैच का रुख तय कर दिया। भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड जैसे अनुभवी गेंदबाज उनके सामने बेअसर नजर आए।

मैदान पर जो हुआ उसका तो गुवाहाटी के बारसापारा लेकिन असली फुल सर्कल मोमेंट मैच के बाद देखने को मिला। मैच खत्म होने के बाद सूर्यवंशी ने विराट कोहली से ऑटोग्राफ लिया। कोहली ने राजस्थान की कैप पर लिखा प्रिय वैभव, बहुत बढ़िया। ये मैसेज तो छोटा था लेकिन इसका मतलब बहुत बड़ा था। क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी से मिली ये तारीफ वैभव के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। 
 
सूर्यवंशी की ये पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने मैच का पूरा समीकरण बदल दिया। उनके शुरुआत हमले के बाद राजस्थान रॉयल्स ने आसानी से 6 विकेट से जीत दर्ज की और 12 गेंदें बाकी रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।  
Sat, 11 Apr 2026 12:36:00 +0530

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