Responsive Scrollable Menu

Foot Care: केवल ठंड ही नहीं, गलत Footwear और Hormonal Changes भी हैं जिम्मेदार, ऐसे करें पैरों का बचाव

ठंड के मौसम में अक्सर लोगों को एड़ियों के फटने और रूखेपन की समस्या होती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनको हर मौसम में फटी एड़ियों की शिकायत बनी रहती है। इसकी वजह न सिर्फ मौसम बल्कि कुछ सामान्य लापरवाहियां भी एड़ियों को तंग करती है। हवा में खुश्की होने की वजह स्किन से नमी कम होना लाजमी है। अधिकतर एसी में रहने या ठंड के मौसम में ऐसा होना एक सामान्य प्रोसेस है। लेकिन अगर मॉइश्चराइज न किया जाए, तो एड़ियां खुरदरी और फटने लगती हैं।

मौसम की मार के अलावा जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं या फिर एड़ियों की देखरेख में लापरवाही बरतते हैं। तब भी एड़ियों के फटने की समस्या होती है, जोकि किसी भी मौसम में हो सकती है। शुरूआत में एड़ियां रूखी बनी रहती है। वहीं समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो एड़ियों में गहरी दरारें आना शुरू हो जाती हैं और इनमें दर्द भी होता है। कई बार गंभीर स्थितियों में एड़ियों से खून आने लगता है।

इसे भी पढ़ें: Digital Era में बढ़ती हुई Texting Anxiety: क्या रिप्लाई न मिलना आपकी Mental Health बिगाड़ रहा है?


क्यों होती है क्रैक्ड हील की समस्या

ज्यादा नहाने, खुश्क मौसम या हार्श सॉप की वजह से एड़ियों की नमी खोने लगती है।

सख्त फर्श पर लंबे समय तक खड़े रहने से।

नंगे पैर ज्यादा देर तक चलने से।

सही फिटिंग का फुटवियर न होने पर या पीछे से फुटवियर खुला होने पर।

मोटापा, इससे भी एड़ियों पर अधिक भार पड़ता है।

बढ़ती उम्र में भी नेचुरल रूप से स्किन की इलास्टिसिटी कम होने लगती है।

साइरोसिस, फंगल इंफेक्शन या एग्जिमा होना पर।

हाइपोथायरॉएडिज्म या डायबिटीज जैसी बीमारियां होने पर।

ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार

एड़ियों को मेटल के स्क्रबर से घिसना।
एड़ियों पर ज्यादा स्क्रबर करना।
रोजाना ज्यादा गर्म पानी से नहाना।
ऐसे फुटवियर पहनना जो सख्त हों और तलवों के लिए कुशन नहीं होता है।
शुरूआत में एड़ियों के रूखेपन को नजरअंदाज करना।
लंबे समय तक नंगे पैर चलना या पैर घिसकर चलना।
नहाने के बाद मॉइश्चराइजर या फुट केयर न करना।

किसे होती है क्रैक हील की सबसे ज्यादा समस्या

अक्सर ज्यादा वेट वाले या मोटे लोगों में क्रैक हील की समस्या होती है। क्योंकि शरीर का भार एड़ियों पर आता है और इससे उन पर दबाव पड़ता है। जिन लोगों को लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है और उनको भी फटी एड़ियों की समस्या होती है। इनमें फैक्ट्री कर्मचारी, सेल्स मैन, टीचर और महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा डायबिटीज जैसी समस्याएं या एग्जिमा जैसी स्किन की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को क्रैक हील की समस्या हो सकती है।

लाइफस्टाइल संबंधी समस्याएं

ज्यादातर महिलाएं पीछे से खुली चप्पलें पहनती हैं, जिनमें एड़ियां ढकी नहीं रहती हैं।

लगातार पानी में रहकर काम करने से।

जेनेटिक्स की वजह

रोजाना मॉश्चराइजर लगाए बगैर बार-बार पेडिक्योर कराना।

हार्मोन या मेनोपॉज में बदलाव की वजह से।

ऐसे रखें एड़ियों का ख्याल

आप हर मौसम में फटी एड़ियों से बचने के लिए कुछ तरीके अपना सकते हैं और बदलाव करेंगे। इससे रूखी और फटी एड़ियां ठीक होंगी और हील्स भी क्रैक होने से बचेंगी।

दिन में दो बार एड़ियों पर मॉश्चराइजर लगाएं। मॉश्चराइजर में ग्लिसरीन, यूरिया, सेरामाइड और लैक्टिक एसिड जैसी चीजें होती हैं।

पैर धोने या फिर नहाने के बाद पैरों को पोंछने के बाद मॉश्चराइजर लगाना चाहिए।

सप्ताह में एक या दो बार प्यूमिक स्टोन से एड़ियों को स्क्रब करें, इससे डेड स्किन हट जाएगी।

वहीं नंगे पैर रहने से बचना चाहिए।

पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

रात को सोने से पहले फुट क्रीम लगाना न भूलें।

बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाने से बचना चाहिए।

अगर नियमित देखरेख की जाए, तो एड़ियों को फटने से बचाया जा सकता है। नियमित देखरेख और रूखेपन की शुरूआत में ही अगर आप एहतियात बरतती हैं, तो क्रैक हील की शिकायत नहीं होगी। लेकिन अगर एड़ियों में ज्यादा समस्या है और दरारें गहरी हो गई हैं और उनमें खून आता है या तेज दर्द होता है। तब आपको डर्मेटोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है।

Continue reading on the app

Digital Era में बढ़ती हुई Texting Anxiety: क्या रिप्लाई न मिलना आपकी Mental Health बिगाड़ रहा है?

आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट के जरिए टेक्सट मैसेजिंग से बातचीत करना बेहद आसान हो चुका है। अब हर कोई कहीं न कहीं चैट पर बिजी रहता है। इस दौरान कई लोग महसूस करते हैं कि किसी को मैसेज भेजने के बाद जब देर तक रिप्लाई नहीं आता, तो दिल की धड़कनें तेजी से बढ़ जाती हैं। जिससे व्यक्ति बार-बार फोन चेक करता है, एक अलग सी एंग्जायटी देखनो को मिलती है। सामने वाले व्यक्ति के Typing... स्टेटस का लगातार चेक करते रहना , हमेशा इंतजार में बनें रहते हैं या आप भी सोचते हैं कि कहीं आपने कुछ गलत तो नहीं लिख दिया है।
दरअसल, ये सभी लक्षण टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण होते हैं। वैसे यह कोई मेडिकल बीमारी नहीं है, बल्कि स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल और लगातार ऑनलाइन रहने से दिमाग में स्ट्रेस और घबराहट का कारण बन जाता है। आइए आपको बताते हैं टेक्स्टिंग एंग्जायटी क्या है और इससे कैसा बचा जाए?

क्या होती है टेक्स्टिंग एंग्जायटी
अगर आप मैसेज के जरिए बातचीत करते समय घबराहट होने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हो सकता है, आइए आपको इसके बारे में बताते हैं-

- हाव-भाव और टोन की कमी: असल में जब हम आमने-सामने बातचीत में चेहरे एक्सप्रेशन और टोन से बात का सही मतलब समझा जाता है। टेक्स्ट में यह सब गायब हो जाता है, जिससे कई बार गलतफहमी का डर बन जाता है।

- लगातार ऑनलाइन रहने का दबाव: अक्सर मैसेज आते रहते हैं और हर समय रिप्लाई करने की मजबूरी इंसान को दिमागी रुप से थका रही है।

- फोन का ज्यादा यूज करना: स्मार्टफोन का लगातार यूज करने से दिमाग में 'डोपामाइन' के स्तर को प्रभावित करता है, जिससे नोटिफिकेशन चेक करने की आदत एक लत बन जाती है।

 - सोशल एंग्जायटी और साइबर बुलिंग: जिन लोगों को पहले से ही घबराहट होती हैं या ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार रह चुके हैं, उन्हें मैसेज का जवाब देने का इंतजार करने में डर लगने लगता है।

टेक्स्टिंग एंग्जायटी के लक्षण

 शारीरिक और मानसिक लक्षण
- मैसेज भेजने के बाद अचानक से दिल की धड़कन तेज होना या बैचेनी होना।

- लगातार चिड़चिड़ापन, घबराहट या हाथ-पैरों में कंपकंपी महसूस होना।

- सांस लेने में भारीपन या छाती में खिंचाव महसूस होना।

व्यावहारिक लक्षण
- नोटिफिकेशन न आने पर भी बार-बार फोन की स्क्रीन चेक करना।

- अनसोल्वड मैसेज देखकर डरना या मैसेज का जवाब देने से पूरी तरह बचना।

- किसी का देर से रिप्लाई करने पर खुद को दोषी मानना या लगातार ओवरथिंकिंग करते रहना।

मैसेज के स्ट्रेस को दूर कैसे करें?
- अधिक फोन का इस्तेमाल करने से बचें। दिन में कुछ घंटे ऐसे तय करें जब आप फोन से पूरी तरह दूर रहें।

- किसी भी गंभीर मुद्दे पर टेक्स्ट करने के बजाय फोन पर बात करें या मिलाकर बात करें। इससे गलतफहमी नहीं होती है। 

- दोस्तों और सहकार्मियों को साफ रुप से बताएं कि हर समय आप तुरंत रिप्लाई देने के लिए उपबल्ध नहीं रह सकते हैं।

- अगर किसी का रिप्लाई रूखा या देर से आए, तो यह न समझें कि वह आपसे नाराज है। क्या पता सामने वाला व्यक्ति काम में बिजी हो।

डॉक्टर या विशेषज्ञ से संपर्क कब करें?
जब घबराहट रोजाना काफी बढ़ जाए, ऑफिस के वर्क या पर्सनल रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित होने लगे, तो आप किसी थेरेपिस्ट या काउंसलर की मदद लेना समझदारी है। दरअसल, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी तकनीकों से इस डिजिटल स्ट्रेस को दूर करने में मदद मिल सकती है।  

Continue reading on the app

  Sports

IND vs SL: टेस्ट में इतिहास रचने की दहलीज पर भारत, 2 जीत से टूटेगा ये बड़ा रिकॉर्ड

IND vs SL Test Series: श्रीलंका के खिलाफ खेली जाने वाली 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया की नजर एक महारिकॉर्ड अपने नाम करने पर रहेगी. इसके लिए भारत को दोनों मुकाबले जीतने होंगे. Mon, 10 Aug 2026 15:37:13 +0530

  Videos
See all

Iran America War Update: Hormuz पर Trump का बहुत बड़ा ऐलान! | War News | IRGC | Mojataba | N18G #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-10T10:17:03+00:00

झारखंड के रांची में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हेमंत सत्ता का निर्मम लाठीचार्ज | #jharkhand #protest #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-10T10:13:00+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers