गाड़ी का बीमा नहीं तो पेट्रोल-डीजल न मिले:सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- नई कारों का बीमा 4 और बाइक के लिए 6 साल का हो
जिस गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है, तो उसे पेट्रोल-डीजल ना दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके तहत बीमा न होने पर पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों को फ्यूल देने से मना कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की समय सीमा भी बढ़ा दी है। आइए सवाल-जवाब में समझते हैं कि कोर्ट का निर्देश क्या है, यह कैसे लागू होगा और इसका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा… सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल-डीजल और गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर क्या निर्देश दिया? जवाब: जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा। अगर किसी गाड़ी का बीमा वैलिड नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप पर उसे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। जब तक गाड़ी मालिक बीमा नहीं करा लेता, तब तक गाड़ी को ईंधन नहीं मिलेगा। सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने इतना सख्त कदम उठाने का फैसला क्यों किया? जवाब: कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों के मुताबिक, देश की सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों में से लगभग 56% गाड़ियों का कोई बीमा ही नहीं है। स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस (2024-25) की रिपोर्ट के अनुसार, जब इन वाहनों से सड़क हादसे होते हैं, तो पीड़ितों या उनके परिवारों को उचित और समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। सवाल: पेट्रोल पंपों पर बीमा की जांच कैसे की जाएगी? जवाब: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, पायलट प्रोजेक्ट पर इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय मिलकर काम करेंगे। पेट्रोल पंपों और मुख्य सड़कों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे गाड़ी के नंबर प्लेट को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) और केंद्र सरकार के वाहन (VAHAN) पोर्टल के डेटा से ऑटोमैटिक कनेक्ट करके बीमा स्टेटस चेक करेंगे। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने इस व्यवस्था पर सहमति दी है। सवाल: नई गाड़ी खरीदने वालों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियमों में क्या बदलाव होगा? जवाब: कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जरूरी समयसीमा को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है… 2018 में कारों के लिए 3 साल और बाइक्स के लिए 5 साल का नियम लागू किया गया था, लेकिन 8 साल बीतने के बाद भी करोड़ों गाड़ियां बिना बीमा के चल रही हैं। इसीलिए यह समयसीमा बढ़ाई गई है। सवाल: सड़क पर चेकिंग के दौरान पुलिस कैसे पता लगाएगी कि इंश्योरेंस है या नहीं? जवाब: वर्तमान में राज्यों की पुलिस के पास मौके पर तुरंत इंश्योरेंस चेक करने का कोई एक समान सिस्टम नहीं है। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइसेज या मोबाइल एप्स दिए जाएं। ये डिवाइसेज VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) के डेटाबेस से सीधे जुड़े होंगे। इससे पुलिस तुरंत गाड़ियों का रियल-टाइम बीमा स्टेटस चेक कर सकेगी और चालान (E-challan) काट सकेगी। सवाल: टोल प्लाजा पर लंबी लाइनों और रुकने की समस्या से निपटने के लिए क्या निर्देश हैं? जवाब: नेशनल हाईवे पर हादसों और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि चुनिंदा कॉरिडोर पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए। इसके तहत टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने की प्रक्रिया को खत्म कर ऑटोमैटिक डिटैक्शन सिस्टम (ANPR सिस्टम) से बदला जाएगा, ताकि गाड़ियां बिना रुके गुजर सकें। सवाल: बिना बीमा वाली गाड़ियों से आम लोगों और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को क्या नुकसान होता था? जवाब: मोटर व्हीकल एक्ट (MVA) की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसे के शिकार लोगों को तुरंत आर्थिक मुआवजा दिलाना है। जब गाड़ी का बीमा नहीं होता, तो पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे और जिम्मेदारी तय कराने के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। खासकर उन परिवारों के लिए स्थिति भयावह हो जाती है, जहां हादसे में कमाने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है। सवाल: क्या वाहन मालिकों को बीमा के लिए अतिरिक्त विकल्प या कस्टमाइजेशन की सुविधा मिलेगी? जवाब: हां, सुप्रीम कोर्ट ने IRDA को निर्देश दिया है कि वह प्राइवेट वाहन मालिकों को अलग-अलग पॉलिसी ऑप्शन उपलब्ध कराए। इसमें बेस थर्ड-पार्टी कवर के साथ-साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एड-ऑन और ओन-डैमेज कवर चुनने के कई विकल्प मिलने चाहिए, ताकि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से बीमा चुन सकें। सवाल: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होता क्या है? जवाब: जब आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति (तीसरे पक्ष), उसकी गाड़ी या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो बीमा कंपनी उस नुकसान की भरपाई करती है। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 146 के तहत भारत में हर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसमें आपकी अपनी गाड़ी के नुकसान का कवर शामिल नहीं होता। ये खबर भी पढ़ें… अगले 2 महीने सस्ता लोन नहीं, EMI भी नहीं घटेगी: RBI गवर्नर बोले- दुनिया में उथल-पुथल से महंगाई बढ़ी; ब्याज दर 5.25% पर बरकरार अगर आप घर, गाड़ी या पर्सनल जरूरत के लिए सस्ते लोन का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI ने ब्याज दर को 5.25% पर बरकरार रखा है। इसके मायने हैं कि नए लोन की तरह मौजूदा लोन और EMI भी सस्ती नहीं होंगी। पूरी खबर पढ़ें…
अगले 2 महीने सस्ता लोन नहीं, EMI भी नहीं घटेगी:RBI गवर्नर बोले- दुनिया में उथल-पुथल से महंगाई बढ़ी; ब्याज दर 5.25% पर बरकरार
अगर आप घर, गाड़ी या पर्सनल जरूरत के लिए सस्ते लोन का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI ने ब्याज दर को 5.25% पर बरकरार रखा है। इसके मायने हैं कि नए लोन की तरह मौजूदा लोन और EMI भी सस्ती नहीं होंगी। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को बताया कि दुनियाभर में जारी उठापटक की वजह से महंगाई बढ़ी है। इसके चलते फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। RBI का यह फैसला अपनी बचत के पैसे बैंक में रखने वालों के लिए राहतभरा है, क्योंकि FD पर मिलने वाला ब्याज फिलहाल कम नहीं होगा। हालांकि, सभी बैंक RBI के बताए मुताबिक ब्याज दरें एक जैसी नहीं रखते, वे अपनी लागत और बाजार को देखकर इसमें थोड़ा बदलाव कर सकते हैं। अब 7 सवालों के जवाब से जानिए रेपो रेट से जुड़ी जरूरी बातें सवाल 1: रेपो रेट क्या होता है? जवाब: रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दर तय करते हैं। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC हर तीन महीने में इसकी समीक्षा करती है। सवाल 2: रेपो रेट बदलने से EMI पर क्या असर पड़ता है? जवाब: अगर रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है। इससे होम, कार और पर्सनल लोन की ब्याज दर और EMI बढ़ सकती है। वहीं, रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते होने और EMI कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, इसका असर उन लोन पर ज्यादा पड़ता है, जिनकी ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी होती है। सवाल 3: RBI ने रेपो रेट क्यों नहीं घटाया? जवाब: RBI के मुताबिक दुनिया में अभी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। कई देशों में तनाव बना हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसका असर सामान ढोने की लागत और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में अगर RBI अभी ब्याज दर घटा देता, तो बाजार में पैसा बढ़ जाता और महंगाई और बढ़ने का खतरा रहता। इसी वजह से RBI ने फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर ही रखा। सवाल 4: दुनिया में क्या हुआ, जिससे RBI चिंतित है? जवाब: पश्चिम एशिया में तनाव: इससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। अमेरिका की टैरिफ नीति: अमेरिका की आयात शुल्क (टैरिफ) नीति में बदलाव और वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। दुनिया भर में अनिश्चितता: कई देशों में आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। RBI का मानना है कि इन हालात का असर भारत में महंगाई पर भी पड़ सकता है। सवाल 5: रेपो रेट और महंगाई का क्या संबंध है? जवाब: जब महंगाई बढ़ती है, तो RBI अक्सर रेपो रेट बढ़ाता है या उसे कम नहीं करता। इससे बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। बैंक भी लोन पर ज्यादा ब्याज लेते हैं। लोग कम कर्ज लेते हैं और खर्च भी कम करते हैं। इससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है। वहीं, जब महंगाई कम होती है, तो RBI रेपो रेट घटा सकता है। इससे लोन सस्ते होते हैं और लोग ज्यादा खर्च व निवेश करते हैं। सवाल 6: महंगाई ज्यादा होने पर RBI रेपो रेट क्यों नहीं घटाता? जवाब: अगर महंगाई ज्यादा है या उसके बढ़ने का खतरा बना हुआ है, तो रेपो रेट घटाने से बाजार में ज्यादा पैसा आ जाता है। इससे खरीदारी बढ़ सकती है और महंगाई फिर तेज हो सकती है। इसलिए RBI तब तक रेपो रेट कम नहीं करता, जब तक उसे भरोसा न हो जाए कि महंगाई काबू में है। सवाल 7: आगे ब्याज दर कब घट सकती है? जवाब: जब महंगाई कम होगी और RBI को लगेगा कि लोगों और कारोबार को सस्ते लोन की जरूरत है, तब वह रेपो रेट घटा सकता है। RBI हर बैठक में महंगाई, देश की आर्थिक हालत और दुनिया के हालात देखकर यह फैसला लेता है। 2026 में तीन बार की बैठकों में ब्याज दर नहीं बदली 2026 में अब तक RBI की तीन बैठकें हो चुकी हैं। अप्रैल, जून और अगस्त में हुई तीनों बैठकों में रेपो रेट 5.25% पर ही रखा गया। यानी लगातार तीसरी बार ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे पहले 2025 में RBI ने लोगों को राहत देते हुए ब्याज दर तीन बार घटाई थी। अप्रैल में रेपो रेट 6.00% किया गया, जून में 5.50% और दिसंबर में 5.25% पर लाया गया। तब से लेकर अब तक RBI ने महंगाई और दुनिया के हालात को देखते हुए ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। एक्सपर्ट बोले- दिसंबर में हो सकती है बढ़ोतरी इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मौलिक पटेल ने कहा कि दुनिया भर में ब्याज दरें बढ़ रही हैं, इसलिए RBI भी आगे कोई भी फैसला बहुत सोच-समझकर लेगा। उम्मीद है कि दिसंबर में जब RBI अपनी पॉलिसी पर दोबारा विचार करेगा, तो वो ब्याज दर में थोड़ी बढ़ोतरी (0.25%) कर सकता है। रिटेल महंगाई और जीडीपी अनुमान ये खबर भी पढें… RBI ने FD के नए नियम जारी किए: स्मॉल-फाइनेंस-बैंकों को अब ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले देनी होगी; जानें- 5 बड़े बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
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