मानसिक स्वास्थ्य कैसे प्रभावित करता है जीवन? आयुर्वेद से जानिए संतुलन का सही तरीका
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर हम उतनी गंभीरता से नहीं लेते जितना लेना चाहिए, जिसका सीधा असर हमारे सोचने, समझने, निर्णय लेने और यहां तक कि हमारे शरीर की सेहत पर भी पड़ता है। अगर मन शांत और संतुलित है, तो जीवन आसान लगता है लेकिन अगर मन तनाव, चिंता या नकारात्मक विचारों से भरा हो, तो छोटी-छोटी बातें भी बड़ी लगने लगती हैं।
आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को बहुत गहराई से समझाया गया है। इसके अनुसार मन सिर्फ विचारों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह शरीर और आत्मा के बीच एक सेतु की तरह काम करता है। जब मन संतुलित रहता है, तो शरीर और आत्मा दोनों सही तरीके से काम करते हैं। वहीं, जब मन अस्थिर हो जाता है, तो उसका असर शरीर की सेहत और जीवन की गुणवत्ता दोनों पर पड़ता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, गुस्सा और अवसाद जैसी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। लोग हर समय किसी न किसी दबाव में रहते हैं कभी काम का, कभी रिश्तों का, तो कभी भविष्य की चिंता का। यही मानसिक असंतुलन धीरे-धीरे शरीर में भी रोग पैदा करने लगता है, जैसे नींद न आना, सिरदर्द, थकान, पाचन की समस्या और यहां तक कि गंभीर बीमारियां भी।
आयुर्वेद के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए सबसे जरूरी दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार है। अगर हम अपने रोजमर्रा के जीवन में थोड़ी नियमितता और अनुशासन लाएं, तो मन काफी हद तक शांत रह सकता है। समय पर सोना, समय पर उठना, संतुलित आहार लेना और शरीर को थोड़ा आराम देना बहुत जरूरी है।
इसके अलावा, आयुर्वेद में ध्यान (मेडिटेशन) और प्राणायाम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। जब हम गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। ध्यान करने से विचारों की भागदौड़ कम होती है और व्यक्ति वर्तमान में जीना सीखता है।
आयुर्वेद यह भी कहता है कि प्रकृति के साथ जुड़ाव मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है। पेड़-पौधों के बीच समय बिताना, सुबह की ताजी हवा लेना और थोड़ी देर शांत वातावरण में बैठना मन को स्थिर करता है। आज के डिजिटल युग में जब हर तरफ शोर और स्क्रीन टाइम बढ़ गया है, ऐसे में प्रकृति से जुड़ना और भी जरूरी हो गया है।
खान-पान का भी मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या प्रोसेस्ड फूड मन को अस्थिर कर सकता है। आयुर्वेद में सात्त्विक भोजन को बहुत महत्व दिया गया है, जिसमें ताजे फल, सब्जियां, दूध और हल्का भोजन शामिल होता है। ऐसा भोजन मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है। इसके साथ ही सकारात्मक सोच भी मानसिक स्वास्थ्य का एक बड़ा हिस्सा है।
--आईएएनएस
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Islamabad Talks: पाकिस्तान में इजरायल के खिलाफ माहौल, शांति वार्ता से पहले जानें क्या-क्या हुआ?
Islamabad Talks: पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित सीजफायर वार्ता से पहले मीडिया में इजरायल के खिलाफ माहौल बनता नजर आ रहा है. देश के प्रमुख अखबार और न्यूज प्लेटफॉर्म लगातार ऐसे लेख और संपादकीय प्रकाशित कर रहे हैं, जिनमें इजरायल की नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना की जा रही है.
‘डॉन’ का संपादकीय, इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में आरोप लगाया है कि इजरायल शांति वार्ता को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहा है. अखबार के मुताबिक, ईरान को कमजोर करने की इजरायल और अमेरिका की संयुक्त रणनीति विफल रही है, जिससे तेल अवीव में नाराजगी बढ़ी है.
संपादकीय में यह भी कहा गया कि इजरायल अब लेबनान में हमले तेज कर रहा है और ‘दाहिये सिद्धांत’ के तहत आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जिसे युद्ध अपराध बताया गया है.
पाकिस्तान टुडे और जियो न्यूज की भी आलोचना
पाकिस्तान टुडे ने भी अपने संपादकीय में इजरायल की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. अखबार का कहना है कि लेबनान पर जारी हमले सीजफायर की भावना के खिलाफ हैं और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है.
वहीं Geo News ने ईरान के नेता मोजतबा खामेनेई के बयान को प्रमुखता दी, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ‘गुनहगारों’ को छोड़ा नहीं जाएगा.
लेबनान को लेकर बढ़ती चिंता
इस पूरे घटनाक्रम में लेबनान एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है. पाकिस्तानी मीडिया का दावा है कि इजरायल वहां सैन्य कार्रवाई जारी रखकर न केवल सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को भी बिगाड़ रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर हमले जारी रहे, तो ईरान समझौते से पीछे हट सकता है.
ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान
इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ तीखी टिप्पणी की. उन्होंने इजरायल को 'मानवता के लिए अभिशाप' और 'कैंसर' बताया, साथ ही लेबनान में हो रहे हमलों को 'नरसंहार' करार दिया. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बाद उन्हें अपना यह पोस्ट हटाना पड़ा.
कूटनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी और मीडिया नैरेटिव शांति वार्ता को प्रभावित कर सकते हैं. पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ऐसे में उसके भीतर का माहौल भी कूटनीतिक संतुलन पर असर डाल सकता है.
शांति से पहले तनाव का माहौल
कुल मिलाकर, इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता से पहले माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है. एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी से हालात और जटिल होते नजर आ रहे हैं. अब देखना होगा कि यह वार्ता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में कदम साबित होती है या फिर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप इसे कमजोर कर देते हैं.
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