इंदौर: डिस्ट्रीब्यूटरशिप का लालच देकर गुजरात के व्यापारी से ऐंठे 1 करोड़ रुपये, रकम मांगने पर दी धमकी, डायरेक्टर गिरफ्तार
इंदौर: इंदौर क्राइम ब्रांच ने डिस्ट्रीब्यूटरशिप और बिजनेस मार्जिन का झांसा देकर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच ने गुजरात के एक व्यापारी से मेडिकेयर कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर 1 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में कंपनी के 74 वर्षीय डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि आरोपियों ने पीड़ित व्यापारी से 1 करोड़ रुपये लेने के बाद न तो उसे व्यापार का माल उपलब्ध कराया और न ही जमा की गई मूल राशि वापस लौटाई। जब पीड़ित द्वारा अपने रुपये वापस मांगे गए तो आरोपी कथित तौर पर गाली-गलौज करने लगे और धमकियां देने लगे। पीड़ित की शिकायत और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यह पूरा मामला गुजरात के दाहोद झालोद निवासी पीड़ित व्यापारी कमलेश अग्रवाल से जुड़ा है। इन्होंने क्राइम ब्रांच डीसीपी कार्यालय में धोखाधड़ी की एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, इंदौर स्थित मेसर्स आई.एच.एल. मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड और इन्फुटेक हेल्थकेयर लिमिटेड के डायरेक्टरों ने उन्हें गुजरात क्षेत्र की डीलरशिप और डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने का बड़ा लालच दिया था।
आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित कमलेश अग्रवाल ने 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में कुल 1 करोड़ रुपये कंपनी में जमा करा दिए थे। आरोपियों ने जुलाई 2022 तक मार्जिन मनी के रूप में 28.50 लाख तो दिए, लेकिन इसके बाद न तो कोई माल सप्लाई किया और न ही बाकी के पैसे लौटाए।
आरोपियों ने फरियादी को दी धमकी
इतना ही नहीं जब फरियादी अपने रुपये वापस मांगने पहुंचा तो आरोपियों ने रुपये तो वापस नहीं किए बल्कि धमकी देकर वहां से भगा दिया। जिसके बाद पीड़ित ने सीधे पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया और विस्तार से पूरे मामले की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज कराई।
क्राइम ब्रांच ने 74 वर्षीय डायरेक्टर को किया गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने बैंक स्टेटमेंट, लेजर और कानूनी राय के आधार पर मामले की जांच की। जांच में धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के आरोप सामने आए। इसके बाद पुलिस ने 74 वर्षीय डायरेक्टर मनोहरलाल गुप्ता और उनके सहयोगी आदित्य गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने मनोहरलाल गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले में आगे की जांच जारी है।
UPI यूजर्स के लिए बड़ी राहत: सरकार ने कहा - नहीं लगेगा कोई चार्ज, व्यापारियों को भी मिलेगी छूट
UPI charges news: केंद्र सरकार ने शनिवार को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर शुल्क को लेकर आम उपभोक्ताओं के बीच बनी आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि यूजर्स और छोटे व्यापारियों को किसी भी तरह के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा कि व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन मुफ्त ही बने रहेंगे।
सीमित लेनदेन पर ही लगेगा नाममात्र का MDR
हालांकि मंत्रालय ने यह भी बताया कि जब भी शुल्क लागू किया जाएगा, तो व्यापारियों पर एक नाममात्र का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। गौरतलब है कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का बिल 6 अगस्त को लोकसभा में पारित किया गया था।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, उपभोक्ताओं से भुगतान करते समय किसी भी तरह का लेनदेन शुल्क नहीं वसूला जाएगा और सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त ही बने रहेंगे। बयान में यह भी बताया गया कि नाममात्र का MDR "केवल एक सीमित संख्या में व्यापारी लेनदेन पर ही लागू किया जाएगा", जो एक निश्चित सीमा से ऊपर होंगे। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR से "काफी कम" होगी।
व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन रहेंगे मुफ्त: वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने आगे बताया कि "UPI पर व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेनदेन मुफ्त ही बने रहेंगे।" मंत्रालय ने यह भी जोड़ा कि "अगर MDR लागू किया भी जाता है, तो यह केवल सीमा-आधारित होगा, न कि सभी लेनदेन पर एक समान रूप से लगाया जाएगा।"
मंत्रालय के मुताबिक, एक बार जब टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को संसद से मंजूरी मिल जाएगी, तो नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की अध्यक्षता वाली "यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी" यह तय करेगी कि MDR लगाया जाए या नहीं, और अगर लगाया जाए तो कितना। बता दें कि टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।
आखिर क्यों लाया गया यह संशोधन?
वित्त मंत्रालय ने इस संशोधन को लाने के पीछे की वजह भी विस्तार से बताई। मंत्रालय के अनुसार, यह प्रावधान UPI की "दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी उन्नति और उभरते खतरों के खिलाफ मजबूती सुनिश्चित करने" के उद्देश्य से लाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि लेनदेन की संख्या में भारी बढ़ोतरी के चलते इस सिस्टम को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में "लगातार और महत्वपूर्ण अपग्रेड" की जरूरत है।
इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी तर्क दिया कि यह संशोधन "अधिक कंपनियों को अपने परिचालन का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आवश्यक है", जिसके लिए एक "स्वयं-स्थायी राजस्व मॉडल" जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य "केवल सब्सिडी पर निर्भरता" को कम करना है, क्योंकि उनके अनुसार यह मॉडल "अगली विकास लहर के लिए व्यावहारिक नहीं है।"
मंत्रालय ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि UPI को "मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार" बनाए रखने के लिए एक "संतुलित ढांचे" की आवश्यकता है।
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